श्री चौबे ने 26 अगस्त की रात नयी दिल्ली में समिट इंडिया के ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भागीदारी सम्मेलन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के साथ हम नयी ऊंचाई पर पहुंच रहे हैं और यह युवाओं का भविष्य संवारने में महती भूमिका अदा करेगी।
केन्द्रीय खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति युवाओं को नयी दिशा देगी और यह देश को अग्रणी राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को पूरा करने में मददगार साबित होगी।
श्री चौबे ने 26 अगस्त की रात नयी दिल्ली में समिट इंडिया के ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भागीदारी सम्मेलन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के साथ हम नयी ऊंचाई पर पहुंच रहे हैं और यह युवाओं का भविष्य संवारने में महती भूमिका अदा करेगी। इससे देश को पांच ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने बहुत मदद मिलेगी।
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के अध्यक्ष अनिल सहस्त्रबुद्धे ने इस मौके पर कहा,“ भारत आत्मनिर्भर हो गया है, आज देश में एक कलम की निब से लेकर उपग्रह बनाये जा रहे हैं। हमें युवाओं की तकनीकी शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। कौशल आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से हम अधिक उद्यमी तैयार कर सकते हैं। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।”
आत्मनिर्भर भारत, भारत के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम
समिट इंडिया के अध्यक्ष श्याम जाजू ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत, भारत के विकास के बुनियादी ढांचे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। समिट इंडिया के माध्यम से हमारा उद्देश्य सरकार की शिक्षा और रोजगार की नीतियों के बारे में जागरुकता बढ़ाना है। उन्होंने कहा, “हम जमीनी स्तर पर जनता तक पहुंचेंगे, इसे सफल बनायेंगे। इससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे। लोग आत्मनिर्भर होने लगेंगे ओर आत्मनिर्भर भारत का सपना पूरा होगा।
हालांकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति की ओपॉज़िशन पार्टियों और एजुकेशन के कई माहिर बहुत पहले से आलोचना करते आए हैं। आलोचकों का मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति पूरी तरह से असंवैधानिक है, क्योंकि यह शिक्षा के बारे में महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने के राज्य सरकारों के अधिकारों को भंग करता है जबकि शिक्षा भारतीय संविधान की समवर्ती सूची का विषय है। ऐसे विषय पर कोई निर्णय आमतौर पर राज्य सरकारों को ही लेना चाहिए। केंद्रीय नियामक निकाय, केंद्रीकृत पात्रता व मूल्यांकन परीक्षण और कक्षा 3, 5 और 8 में केंद्रीकृत परीक्षाओं को लागू करके यह नीति जरूरी अकादमिक और शैक्षणिक निर्णय लेने के राज्य सरकारों को संवैधानिक रूप से प्रदत्त संघीय अधिकार को दरकिनार करती है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020
इस नीति के आलोचक ये भी कहते हैं कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भेदभाव से पीड़ित अनुसूचित जाति/जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग/विकलांग और अन्य वंचित वर्गों को सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण के संवैधानिक प्रावधान का कोई उल्लेख नहीं है और यह कि नीति जान-बूझ कर ‘धर्मनिरपेक्षता’ और ‘समाजवाद’ शब्द की अनदेखी करती है जो आज़ादी की लड़ाई की विरासत का हिस्सा है।
कहा जाता है कि इसमें कहीं भी सभी बच्चों के लिए या वंचित वर्गों के लिए ‘मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा’ के संवैधानिक जनादेश का उल्लेख नहीं है। आलोचकों का ये भी मानना है कि यह नीति शिक्षा के व्यवसायीकरण को बढ़ावा देती है परोपकारी संस्थानों की स्थापना के नाम पर, बिना किसी भी प्रभावी तंत्र की स्थापना के। सेल्फ फाइनेन्सिंग कोर्स अनुदानों में कमी, छात्र ऋणों, छात्रवृत्ति में कमी को बढ़ावा देता है।
यह भी कहा जाता है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शैक्षिक संस्थानों के शुल्क और वेतन संरचनाओं को पूरी तरह से समाप्त कर देती है, वे केवल ऑनलाइन पारदर्शी स्व-प्रकटीकरण की आवश्यकता को पूरा करते हैं।
समिट इंडिया के महासचिव महेश वर्मा ने कहा, “इस आयोजन के पीछे हमारा उद्देश्य न केवल विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जागरुकता पैदा करना है बल्कि विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों द्वारा किये गये सफल कार्यों की सराहना भी करना है।
इस अवसर पर ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, चिकित्सा विज्ञान, दर्शन, सकारात्मक दृष्टिकोण और उनकी उत्कृष्टता के लिए राष्ट्रीय उपलब्धि पुरस्कार 2022 के साथ कुछ योग्य आत्मनिर्भर राष्ट्रीय नायकों को सम्मानित किया गया।

