Saturday, March 28, 2026

गृह मंत्रालय ने कहा रोहिंग्या को दिल्ली में फ्लैट नहीं दिये जायेंगे और ये रहेंगे हिरासत केन्द्रों में

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गृह मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत में रहने वाले रोहिंग्या समुदाय के लोगों को दिल्ली में फ्लैट नहीं दिये जायेंगे और मंत्रालय ने इस संबंध में किसी को कोई निर्देश नहीं दिया है.

नई दिल्ली: गृह मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट रूप से कहा कि भारत में रहने वाले रोहिंग्या समुदाय के लोगों को दिल्ली में फ्लैट नहीं दिये जायेंगे और मंत्रालय ने इस संबंध में किसी को कोई निर्देश नहीं दिया है.

मंत्रालय ने एक वक्तव्य जारी कर कहा कि मीडिया के एक वर्ग में इस तरह की खबर आ रही है कि रोहिंग्या समुदाय के लोगों को राजधानी के बक्करवाला में आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के लोगों के लिए बनाये गये फ्लैट दिये जायेंगे.

दरअसल यह विवाद केन्द्रीय शहरी कार्य एवं आवास मंत्री हरदीप सिंह पुरी के एक ट्वीट के बाद पैदा हुआ जिसमें कहा गया था कि रोहिंग्या समुदाय के लोगों को बक्करवाला में आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के लोगों के लिए बनाये गये फ्लैट में स्थानांतिरत किया जायेगा.

इस ट्वीट के बाद आम आदमी पार्टी तथा खुद भारतीय जनता पार्टी के नेता तथा हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता इसके विरोध में उतर आये थे और उन्होंने इसकी कड़ी आलोचना की थी.

इसके बाद गृह मंत्रालय ने सफाई देते हुए कहा है कि सरका ने इस संबंध में किसी को कोई निर्देश नहीं दिया है.

मंत्रालय ने कहा है कि दिल्ली सरकार ने रोहिंग्या समुदाय के लोगों को नयी जगह पर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया था जबकि केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि रोहिंग्या समुदाय के लोगों को उनकी मौजूदा जगह कंचन कुंज, मदनपुर खादर में ही रखा जाये क्योंकि उन्हें उनके देश वापस भेजने के लिए संबंधित देश की सरकार के साथ विदेश मंत्रालय ने यह मामला उठाया है.

गृह मंत्रालय ने कहा है कि रोहिंग्या समुदाय के लोगों को कानून के अनुसार हिरासत केन्द्रों में ही रखा जाये. मंत्रालय के अनुसार दिल्ली सरकार ने अभी रोहिंग्या के मौजूदा आवास स्थल को हिरासत केन्द्र घोषित नहीं किया है. मंत्रालय ने दिल्ली सरकार को तत्काल यह कदम उठाने का निर्देश दिया है.

रोहिंग्या मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय के लोग हैं जो अधिकतर पश्चिमी म्याँमार के रखाइन प्रांत में रहते हैं. इस प्रांत की राजधानी सितवे है, यहीं पर भारत का विशेष आर्थिक क्षेत्र भी मौजूद है. रोहिंग्या आमतौर पर म्याँमार में बोली जाने वाली बर्मीज भाषा की जगह बंगाली भाषा की एक बोली बोलते हैं. हालाँकि ये रोहिंग्या म्याँमार में सदियों से रह रहे हैं लेकिन म्याँमार का मानना है कि रोहिंग्या म्याँमार में उपनिवेशीय शासन के दौरान आए थे.

इस आधार पर म्याँमार सरकार ने रोहिंग्या समुदाय को अभी तक पूर्ण नागरिकता का दर्जा नहीं दिया है.

बर्मा का नागरिकता कानून कहता है कि एक नृजातीय अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में रोहिंग्या समुदाय म्याँमार की नागरिकता पाने योग्य तभी होगा जब महिला या पुरुष रोहिंग्या इस बात का सबूत दें कि उनके पूर्वज म्याँमार में वर्ष 1823 के पहले निवास करते थे, अन्यथा उन्हें विदेशी निवासी या फिर सहवर्ती नागरिक (एसोसिएट सिटीज़न) माना जाएगा, भले ही उनके अभिभावकों में से कोई एक म्याँमार का नागरिक हो.

चूँकि रोहिंग्या मुसलमानों को नागरिकता का दर्जा नहीं मिला है, साथ ही उन्हें बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया है.

वे म्याँमार की प्रशासनिक सेवा के भी अंग नहीं बन सकते तथा भाषायी शोषण के शिकार हैं.

एमनेस्टी इंटरनेशनल की हाल ही में जारी रिपोर्ट से म्याँमार में सैनिकों द्वारा किये गए जघन्यतम कृत्यों का बोध होता है जिसमें प्रमुख रूप से महिलाओं और बच्चों के साथ किये गए कृत्य शामिल हैं. इसके अतिरिक्त रखाइन प्रांत में रोहिंग्याओं की आवाजाही पर भी पाबंदी लगा दी गई है.

बता दें कि हाल में अमेरिका द्वारा धार्मिक स्वतंत्रता पर अंतर्राष्ट्रीय मंत्रिस्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया.

इस सम्मेलन में ही अमेरिका ने म्याँमार के सैन्य कमांडरों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की.

इस घोषणा के साथ ही अमेरिका प्रथम देश बन गया है जिसने सार्वजनिक स्तर पर म्याँमार सेना के अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाया है.

भारत के गृह मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग चालीस हज़ार रोहिंग्या शरणार्थी रहते हैं. ये बांग्लादेश से भारत पहुँचे हैं.

भारत सभी रोहिंग्या शरणार्थियों को अवैध प्रवासी मानता है और इन्हें इनके मूल देश वापस भेजने के लिये प्रभावी प्रत्यावर्तन समझौते की तलाश में है.

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