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Thursday, January 22, 2026

प्रेग्नेंट महिला बिलकिस बानो गैंगरेप केस के 11 दोषियों को गुजरात सरकार ने दी माफी, 15 साल से काट रहे थे सज़ा

इंडियाप्रेग्नेंट महिला बिलकिस बानो गैंगरेप केस के 11 दोषियों को गुजरात सरकार ने दी माफी, 15 साल से काट रहे थे सज़ा

प्रेग्नेंट महिला बिलकिस बानो के साथ हुए गैंगरेप और उसके परिवार गुजरात के बिलकिस बानो गैंग रेप मामले में आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे सभी 11 दोषी गोधरा जेल से रिहा कर दिया गया है.

अहमदाबाद: गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के दौरान अहमदाबाद के पास रंधीकपुर गांव में 3 मार्च, 2002 को बिलकिस बानो के परिवार पर भीड़ ने हमला बोल दिया था.

2002 में गुजरात में प्रेग्नेंट महिला बिलकिस बानो के साथ हुए गैंगरेप और उसके परिवार गुजरात के बिलकिस बानो गैंग रेप मामले में आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे सभी 11 दोषी गोधरा जेल से रिहा कर दिया गया है.

BJP सरकार की सज़ा माफी नीति के तहत उन्हें रिहा किया गया है. आरोपियों को 2004 में गिरफ्तार किया गया था जबकि 2008 में उन्हें सज़ा सुनाई गई थी.

गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के दौरान अहमदाबाद के पास रंधीकपुर गांव में 3 मार्च, 2002 को बिलकिस बानो के परिवार पर भीड़ ने हमला बोल दिया था.

भीड़ के इस हमले में बिलकिस के परिवार के सात लोगों की मौत हो गई थी. उस समय बिलकिस बानों पांच महीने की गर्भवती थीं. उनके साथ गैंगरेप किया गया था.

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि छह अन्य आरोपी मौके से फरार हो गये थे.

सीबीआई की मुंबई स्थित एक विशेष अदालत ने 11 दोषियों को 21 जनवरी 2008 को सामूहिक बलात्कार और बिलकिस बानो के परिवार के सात सदस्यों की हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी.

बांबे हाई कोर्ट ने भी उनकी सज़ा को बरकरार रखा था. इन दोषियों ने 15 साल से ज्यादा कैद की सज़ा काट ली. उनमें से एक दोषी ने समय से पहले रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

पंचमहल के आयुक्त सुजल मायत्रा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से उसकी सज़ा के मामले में क्षमा पर गौर करने का निर्देश दिया था. सरकार ने एक समिति का गठन किया. मायत्रा ही इस समिति के प्रमुख थे.

उन्होंने बताया कि समिति ने सर्वसम्मति से इस मामले के सभी 11 दोषियों को क्षमा करने के पक्ष में निर्णय किया था, जिस पर सरकार ने अंतिम मुहर लगाई. उनका कहना है कि समिति ने मामले के तमाम पहलुओं और आरोपियों की सज़ा को देखकर फैसला लिया था. वो 15 साल से जेल में थे.

गुजरात सरकार ने अपनी क्षमा नीति के तहत सभी दोषियों की रिहाई को मंजूरी दी. मुंबई में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो की एक विशेष अदालत ने 11 दोषियों को 21 जनवरी 2008 को सामूहिक बलात्कार और बिलकिस बानो के परिवार के सात सदस्यों के क़त्ल के जुर्म में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी.

केस से जुड़ी खास बातें

1. गुजरात में गोधरा कांड के बाद 2002 में बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार मामले में उम्रकैद की सज़ा पाए सभी 11 दोषी सोमवार को गोधरा उप कारागार से रिहा हो गए.

2. इस केस में दोषियों ने 15 साल से अधिक जेल की सज़ा काट ली थी जिसके बाद उनमें से एक ने अपनी समय से पहले रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

3. पैनल की अध्यक्षता करने वाले पंचमहल कलेक्टर सुजल मायात्रा ने कहा कि शीर्ष अदालत ने गुजरात सरकार को उनकी सज़ा में छूट के मुद्दे पर गौर करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद सरकार ने एक समिति का गठन किया.

4. इस केस में दोषियों को भारतीय दंड संहिता के तहत एक गर्भवती महिला से बलात्कार की साजिश रचने, हत्या और गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने के आरोप में दोषी ठहराया गया था.

5. विशेष अदालत ने सात अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया. एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी.

6. इस समिति ने सभी 11 दोषियों को रिहा करने के पक्ष में सर्वसम्मति से फैसला लिया. वहीं राज्य सरकार को सिफारिश भेजी गई थी और उनकी रिहाई के आदेश जारी कर दिए गए.

7. गुजरात में 2002 दंगों के बाद बिलकिस बानो पर हमला किया गया था. हमले के दौरान अहमदाबाद के रंधिकपुर में रहने वाली बिलकिस बानो के परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी गई थी. उस वक्त बिलकिस उसिर्फ 19 साल की थी और पांच माह की गर्भवती थी, उनके साथ गैंगरेप किया गया था.

8. मानवाधिकार वकील शमशाद पठान ने सोमवार रात कहा कि बिलकिस मामले से कम जघन्य अपराध करने वाले बड़ी संख्या में दोषी बिना किसी छूट के जेलों में बंद हैं. ऐसे सिस्टम में पीड़ित की उम्मीद कम हो जाती है.

9. सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2019 में, गुजरात सरकार को बिलकिस बानो को ₹ 50 लाख मुआवजा, एक नौकरी और एक घर का भुगतान करने का निर्देश दिया था.

10. जिन 11 दोषियों को समय से पहले रिहा किया गया, उनमें जसवंतभाई नई, गोविंदभाई नई, शैलेश भट्ट, राधेशम शाह, बिपिन चंद्र जोशी, केसरभाई वोहानिया, प्रदीप मोर्धिया, बकाभाई वोहानिया, राजूभाई सोनी, मितेश भट्ट और रमेश चंदना शामिल हैं.

11. 27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के कोच को जला दिया गया था. इस ट्रेन से कारसेवक लौट रहे थे. इससे कोच में बैठे 59 कारसेवकों की मौत हो गई थी.

12. इसके बाद दंगे भड़क गए थे. दंगों की आग से बचने के लिए बिलकिस बानो अपनी बच्ची और परिवार के साथ गांव छोड़कर चली गई थीं.

13. बिलकिस बानो और उनका परिवार जहां छिपा था, वहां 3 मार्च 2002 को 20-30 लोगों की भीड़ ने तलवार और लाठियों से हमला कर दिया.

14. भीड़ ने बिलकिस बानो के साथ बलात्कार किया. उस समय बिलकिस 5 महीने की गर्भवती थीं. इतना ही नहीं, उनके परिवार के 7 सदस्यों की हत्या भी कर दी थी. बाकी 6 सदस्य वहां से भाग गए थे.

अब जबकि गुजरात सरकार ने रिहाई का फ़ैसला ले लिया तो उसके इस फैसले की बड़े पैमाने पर आलोचना भी हो रही है.

ह्यूमन राइट्स के वकील शमशाद पठान के मुताबिक़ बड़ी संख्या में कई दोषी अभी भी जेल में बंद हैं, जिन्होंने बिलकिस केस से कम जघन्य अपराध किया है.

उन्होंने कहा कि जब सरकार ऐसा फैसला लेती है, तो उससे पीड़ित की सिस्टम से उम्मीद टूट जाती है.

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