शिक्षा मंत्रालय के सांसद और ज़िलाधिकारी कोटे से केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले पर रोक के निर्णय का स्वागत किया है.
नई दिल्ली: शिक्षा से जुड़े लोगों ने केंद्रीय विद्यालयों में सांसद और ज़िलाधिकारी कोटे से होने वाले लगभग 30 हजार दाखिले पर इस रोक के निर्णय का स्वागत किया है. अब ये मांग की जा रही है कि इस कोटा को स्थायी रूप से समाप्त किया जाए.
कोटा स्थगित करने के शिक्षा मंत्रालय के निर्णय से इन सीटों पर भी अनुसूचित जाति जनजाति (एससी-एसटी) और अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) के कोटे से हर साल 15000 छात्रों को आरक्षण का लाभ मिलेगा.
सांसद और कलक्टर कोटे से दाखिला बंद करने की मांग बहले भी उठती रहती थी.
अब तक हर सांसद दस और विद्यालय प्रबंधक समिति अध्यक्ष के नाते हर कलक्टर अपने जिले के प्रत्येक केंद्रीय विद्यालय में न्यूनतम 17 छात्रों का दाखिला अपने कोटे से करा सकता था.
सांसद कोटे से 7,500 और कलक्टर कोटे से 22,000 छात्रों के दाखिले होते रहे. ऐसे नामांकन में न आरक्षण के नियमों का पालन होता है, न योग्यता को आधार बनाया जाता है.
दाखिला को कोटा से इस छुटकारा करने से आरक्षण और योग्यता के आधार पर नामांकन के लिए एक झटके में 30 हज़ार सीटें बढ़ जाएंगी.
यह कोटा जनप्रतिनिधियों और सांसद से कहीं न कहीं लोगों की नाराज़गी का कारण भी बना हुआ था क्यूंकी वो अपने कोटे से केवल दस दाखिला ही करा सकता था जबकि लाभ लेने वाले कि ख्वाहिश रखने वालों की संख्या सैंकड़ों में होती थी.

