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Wednesday, January 21, 2026

प्रधानमंत्री आवास योजना के घोटाले में करोड़ों खा जाते हैं पंचायत और ब्लॉक अधिकारी

इंडियाप्रधानमंत्री आवास योजना के घोटाले में करोड़ों खा जाते हैं पंचायत और ब्लॉक अधिकारी

ज़मीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना की हालत काफ़ी अफसोसनाक है। बताया जाता है कि अधिकतर पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना के आवास उन लोगों को दे दिये गये, जिनके पास पहले से मकान, ट्रैक्टर, चार पहिया वाहन, और अन्य सुविधाएं मौजूद होती हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में हर ग़रीब को पक्का मकान देने के संकल्प के तहत जन-जन भागीदारी के जरिये तीन करोड़ से अधिक मकानों का निर्माण किया गया है। मोदी जी ने ट्वीट कर कहा कि “ देश के हर ग़रीब को पक्का मकान देने के संकल्प में हमने एक अहम पड़ाव तय कर लिया है। जन-जन की भागीदारी से ही तीन करोड़ से ज़्यादा घरों का निर्माण संभव हो पाया है। मूलभूत सुविधाओं से युक्त ये घर आज महिला सशक्तीकरण का प्रतीक भी बन चुके हैं।”

प्रधानमंत्री मोदी का ट्वीट

मोदी ने ट्वीट के साथ एक फोटो भी साझा किया है, जिसमें बताया गया है कि अब तक प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) योजना के तहत 2.52 करोड़ मकानों का निर्माण किया गया है और इसके लिए 1.95 लाख करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता जारी की गई। प्रत्येक लाभार्थी को प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के अंतर्गत रसोई गैस कनेक्शन की सुविधा भी दी गई है।

उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत अब तक शहरी क्षेत्र में 58 लाख मकानों का निर्माण किया गया है। इसके लिए 1.18 लाख करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता जारी की गयी है। इस योजना के तहत महिला सदस्य या संयुक्त नाम पर घर का स्वामित्व होता है। हर घर में, रसोई, शौचालय और पानी की सुविधा दी जाती हैं।

बता दें कि ज़मीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना की हालत काफ़ी अफसोसनाक है। बताया जाता है कि अधिकतर पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना के आवास उन लोगों को दे दिये गये, जिनके पास पहले से मकान, ट्रैक्टर, चार पहिया वाहन, और अन्य सुविधाएं मौजूद होती हैं।

यह आंबटन उन लोगो को किया जाता है जो पूरी तरह से सक्षम थे। इस योजना में शासन की गाइड लाइन के अनुसार पात्र हितग्राहियों की जांच करके उन्हें योजना का फायदा दिया जाना होता है, लेकिन हर पंचायत में सैकड़ों की तादात में अपात्र लोगों को पात्र बना कर गलत तरीके से योजना का लाभ दे दिया जाता है। और शासन की योजना की राशि का जमकर बंदरबांट होता है।

योजना का फायदा अधिकतर अमीर लोग उठा लेते हैं

नीतियों के अनुसार इस योजना का फायदा ग़रीब लोगों को मिलना होता है जबकि इस योजना का फायदा अधिकतर अमीर लोग उठा लेते हैं, जिसके कारण ग़रीब तबके की जनता इस योजना का लाभ लेने से वंचित रह गई, और अगर किसी ग़रीब को मिलता भी है तो आधी से ज़्यादा राशि पंचायत से लेकर ब्लॉक के अधिकारी खा जाते हैं। ये काम इतनी सफाई से होती है कि इसे पकड़ना काफ़ी मुश्किल होती है, क्यूंकी ये सब उनकी सहमति से होता है जिसे इस योजना का लाभ मिलता है। सहमति न होने का केवल एक नतीजा होता है कि काग़जों कोई न कोई गड़बड़ी निकालकर दरख्वास्त को बरख्वास्त कर दिया जाता है। फिर एक ग़रीब यही सोचता है कि जीतने भी मिल जाएं ठीक है।

सवाल उस प्रशासनिक व्यवस्था पर तो उठ ही रहे हैं कि आखिर कैसे इस महत्वपूर्ण योजना का पैसा ग़लत ढंग से अपात्र लोगों में बांट दिया गया। अधिकारियों ने क्यों इसकी जांच नहीं की, और कमीशन के दम पर योजना का फायदा इसे लोग उठाते हैं जो इसके पात्र नहीं हैं।

इसमें एक्शन लेने की ज़रूरत इस तरह है कि पहले ऐसे लोगों की सूची तैयार की जाए, फिर इनकी जांच कराकर शासन की गाइडलाइन अनुसार योजना का क्रियान्वयन करते हुए उस हितग्राही को लाभ दिया जाए जो वास्तविकता में इस योजना का लाभ लेने के लिए हकदार था, वहीं इस गड़बड़ घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए, और जिन्होंने ग़लत ढंग से इस योजना का फायदा लिया या फिर किसी अन्य को दिलाया, उन पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए।

उनके खिलाफ़ एफ आई आर दर्ज की जानी चाहिए

अपात्र हितग्राहियों और पंचायत के लोगों और ब्लॉक अधिकारियों की जांच के बाद उनसे पैसे की वसूली की जाए और पैसा वापस नहीं करने पर उनके खिलाफ़ एफ आई आर दर्ज की जानी चाहिए। ज्ञात हो कि यहां पर मामले की अगर जांच होती है तो हजारों हितग्राहियों का करोड़ों रुपए का घोटाला निकल कर सामने आने की आशंका दिखाईगी।

अभी 2 दिन पहले की ख़बर है राजस्थान के भरतपुर से भाजपा सांसद रंजीता कोली की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को की गई शिकायत के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है। भरतपुर के पहाड़ी और कामा पंचायत समिति में आवास घोटाला उजागर हुआ है। इस जांच में घोटाला सामने आने के बाद 12 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री आवास योजना में 698 मकानों को कागज में दिखाकर तक़रीबन 1 करोड़ 28 लाख रुपये अधिकारी खा गए। इस मामले की जांच होने और उसमें घोटाला पाए जाने के बाद 12 कर्मचारियों को अधिकारियों के साथ निलंबित कर दिया गया है। साथ ही अब करोड़ों रुपये की यह राशि इन कर्मचारियों से वसूली जाएगी।

दरअसल पूरे देश में इस योजना में घोटाला हो रहा है। इसलिए पूरे प्रदेश के हर ज़िले में इस योजना में पूरे घोटाले की जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

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