13.1 C
Delhi
Wednesday, January 21, 2026

मस्जिदों में अज़ान के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर क्या कहता है देश का क़ानून और खुद इस्लाम

इंडियामस्जिदों में अज़ान के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर क्या कहता है देश का क़ानून और खुद इस्लाम

अधिकांश मुस्लिम विद्वान धार्मिक गतिविधियों और प्रार्थनाओं के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को ठीक नहीं मानते. अदालतों में भी विभिन्न निर्णयों के साथ इस मुद्दे को निपटाया क्या गया है.

महाराष्ट्र में मस्जिदों में अज़ान के समय लाउडस्पीकर के इस्तेमाल का मुद्दा गरमा गया है. अब कर्नाटक के सीएम बासवराज बोम्मई ने भी इसपर बयानबाजी शुरू कर दी है. उन्होंने कहा है कि इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश का पालन होना चाहिए. पिछले साल हाईकोर्ट ने धार्मिक स्थानों पर लाउडस्पीकर न लगाने की बात कही थी.

बता दें कि एमएनएस नेता राज ठाकरे ने कुछ दिनों पहले यह मामला उठाया था. उन्होंने एक रैली के दौरान अपने भाषण मने मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की मांग की थी. ऐसा नहीं होने पर मंदिरों से लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा करने की भी धमकी दी थी.

कर्नाटक में भी हिजाब और हलाल मीट के बवालों के बाद अब अज़ान का मुद्दा गरमा गया है. मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई ने इस मामले पर बयान दिया है. ‌उन्होंने कहा है कि इस मामले मे हाईकोर्ट के आदेश का पालन होना चाहिए. इससे पहले कर्नाटक के मंत्री केएस ईश्वरप्पा ने कहा था, ‘राज्य में मस्जिदों के ऊपर लाउडस्पीकर लगाकर अजान करने संबंध में एक हल निकालने की जरूरत है.’

उन्होंने कहा, यह हाई कोर्ट का आदेश है और सब कुछ बात करके या लोगों को समझाकर करना ही जरूरी नहीं है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने इस मामले में कहा कि, ‘नियम केवल अजान के लिए नहीं हैं बल्कि जहां भी लाउडस्पीकर लगाए जाते हैं, उनको संज्ञान में लेकर कार्रवाई होनी चाहिए.’

उच्चतम न्यायालय ने जुलाई 2005 में ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर ध्वनि प्रदूषण के गंभीर प्रभावों का हवाला देते हुए सार्वजनिक स्थानों पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच (सार्वजनिक आपात स्थिति के मामलों को छोड़कर) लाउडस्पीकरों और संगीत प्रणालियों के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था.

लाउडस्पीकर के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए विभिन्न जनहित याचिकाएं

गुजरात, झारखंड और कुछ अन्य राज्यों के उच्च न्यायालयों में हाल ही में मस्जिदों में लाउडस्पीकर के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए विभिन्न जनहित याचिकाएं (पीआईएल) दायर की गई हैं. अदालतों ने अतीत में विभिन्न निर्णयों के साथ इस मुद्दे को निपटाया है.

28 अक्टूबर, 2005 को, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि साल में 15 दिनों के लिए उत्सव के अवसरों पर मध्यरात्रि तक लाउडस्पीकर का उपयोग करने की अनुमति दी जा सकती है.

अगस्त 2016 में, बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि लाउडस्पीकर का इस्तेमाल मौलिक अधिकार नहीं था.

26 जून, 2018 को, उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने लाउडस्पीकर के लिए पांच डेसिबल की सीमा निर्धारित की थी.

सितंबर 2018 में, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था.

जुलाई 2019 में, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने धार्मिक स्थलों सहित सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया.

15 मई, 2020 को, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माना कि अज़ान को मस्जिदों की मीनारों से मानव आवाज द्वारा केवल किसी भी प्रवर्धक उपकरण या लाउडस्पीकर का उपयोग किए बिना अज़ान पढ़ा जा सकता है.

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने जुलाई 2020 में अपने पहले के आदेश को संशोधित करते हुए जून 2018 में ध्वनि के स्तर को पांच डेसिबल तक सीमित करते हुए इसे “आकस्मिक त्रुटि” कहा.

11 जनवरी, 2021 को कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को राज्य में धार्मिक स्थलों पर अवैध लाउडस्पीकरों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया.

नवंबर 2021 में, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से उस कानून के प्रावधानों की व्याख्या करने को कहा था जिसके तहत मस्जिदों में लाउडस्पीकर और सार्वजनिक संबोधन प्रणाली की अनुमति दी गई थी, और उनके उपयोग को प्रतिबंधित करने के लिए क्या कार्रवाई की जा रही है.

दिलचस्प बात यह है कि अधिकांश मुस्लिम विद्वान धार्मिक गतिविधियों और प्रार्थनाओं के लिए लाउडस्पीकर के अत्यधिक उपयोग की भी निंदा करते हैं. कुछ मुस्लिम मौलाना मौलवी तो लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को नमाज़ में नजाएज़ काम मानते रहे हैं. मुस्लिम समुदाय से आने वाले आम लोग इसके इस्तेमाल को एक परेशान करने वाला धार्मिक कृत्य मानते हैं जो इस्लाम में अनिवार्य नहीं है बल्कि नापसंदीदा है. ऐसा कहा जाता है कि इस्लाम मानव को परेशान करने वाले किसी भी कार्य की इजाज़त नहीं देता है.

Check out our other content

Check out other tags:

Most Popular Articles