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Wednesday, January 21, 2026

ग्रामीण विकास ट्रस्ट और डॉ. कॉर्नेलियस के निवेश से कृषि स्टार्टअप भरेंगे उड़ान

अर्थव्यवस्थाग्रामीण विकास ट्रस्ट और डॉ. कॉर्नेलियस के निवेश से कृषि स्टार्टअप भरेंगे उड़ान

ग्रामीण विकास ट्रस्ट, राष्ट्रीय स्तर की एक गैर-लाभकारी संस्था है जिसकी स्थापना सन 1992 में कृषक भारती सहकारी लिमिटेड (कृभको) और रसायन और उर्वरक मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से हुई थी।

ग्रामीण विकास ट्रस्ट और वैश्विक स्तर के निवेशक डॉ कॉर्नेलियस बॉश के निवेश से देश में कृषि क्षेत्र में कार्यरत स्टार्टअप नयी उड़ान भरने वाले हैं।

दुनिया के कुछ जाने माने एवं प्रसिद्ध निवेशकों में से एक डॉ. बॉश भारत आ रहे हैं। वह यहां ग्रामीण विकास ट्रस्ट (जीवीटी) के सीईओ शिव शंकर सिंह से भेट करेंगे। कृषि आधारित स्टार्ट-अप की क्षमताओं के विश्लेषण के मद्देनजर यह भेंट काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

श्री सिंह और डॉ. बॉश के बीच यह मुलाकात 8 अप्रैल को होने जा रही है।

डॉ. बॉश माउंटेन पार्टनर्स के निदेशक मंडल के संस्थापक एवं कार्यकारी अध्यक्ष हैं। उनका यह दौरा भारत में कृषि क्षेत्र आधारित स्टार्ट-अप में निवेश की संभावनाओं की खोज के तहत अहम हो सकता है, जिसके लिए वह अपनी टीम के साथ श्री सिंह से मिलेंगे।

ग्रामीण विकास ट्रस्ट, राष्ट्रीय स्तर की एक गैर-लाभकारी संस्था है जिसकी स्थापना सन 1992 में कृषक भारती सहकारी लिमिटेड (कृभको) और रसायन और उर्वरक मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से हुई थी।

श्री सिंह इस भेंटवार्ता को लेकर बहुत आशांवित और उत्साहित हैं। उनका मानना है कि कृषि आधारित स्टार्ट-अप में एक भरोसेमंद निवेश से देश के कृषि क्षेत्र से जुड़े किसानों और उनके परिवारों के जीवन में बहुत ही सकारात्मक परिवर्तन लाए जा सकते हैं।

अपने इस दौरे के दौरान डॉ. बॉश यहां ग्रामीण विकास ट्रस्ट से जुड़े किसान उत्पाद संगठनों (एफपीओ) में निवेश की संभावनाओं के अवसरों को समझने और निवेश हेतु उनके मूल्यांकन इत्यादि को जानने का प्रयास करेंगे।
इस मुलाकात का एक उद्देश्य विभिन्न किसान उत्पाद संगठनों की आजीविका में न केवल सुधार लाना, बल्कि उसे बढ़ाना भी है।

इस बारे में ग्रामीण विकास ट्रस्ट के सीईओ कहते हैं- “मुझे बहुत खुशी है कि डॉ. बॉश ने ग्रामीण विकास ट्रस्ट स्टार्ट-अप में निवेश हेतु रुचि दिखाई है।

हमें निश्चित रूप से उम्मीद है और हर्ष भी कि इससे भारतीय किसान परिवारों तथा विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों की सहायता में मदद मिलेगी तथा उनकी आजीविका में भी सुधार लाया जा सकेगा।”

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