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Thursday, January 22, 2026

पश्चिम बंगाल नरसंहार की सीबीआई जांच का आदेश: कलकत्ता हाई कोर्ट

इंडियापश्चिम बंगाल नरसंहार की सीबीआई जांच का आदेश: कलकत्ता हाई कोर्ट

कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल नरसंहार मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो से कराने के निर्देश दिये. इस नरंहार में आठ लोगों को जिंदा जला दिया गया था.

कोलकाता: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के बोगतुई गांव में हुए नरसंहार मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने के निर्देश शुक्रवार को दिये.

इसी सप्ताह हुए इस नरंहार में आठ लोगों को जिंदा जला दिया गया था.

मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति आर भारद्वाज की खंडपीठ ने सीबीआई को इस भयानक घटना की जांच कर रही राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच अपने हाथ में लेने के निर्देश दिये.

पीठ ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों की मांग है कि ‘न्याय के हित में और समाज में विश्वास पैदा करने तथा सच्चाई का पता लगाने के लिए निष्पक्ष जांच करने के लिए’ आवश्यक है कि जांच सीबीआई को सौंप दी जाय.

न्यायाधीशों ने कहा, “तदनुसार, हम राज्य सरकार को मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश देते हैं.”

अदालत ने राज्य के पुलिस अधिकारियों और एसआईटी को भी इस मामले में आगे कोई जांच नहीं करने के लिए कहा.

अदालत ने राज्य के अधिकारियों से मामले के कागजात, साथ ही मामले में गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए आरोपियों तथा संदिग्धों को सौंपने को कहा.

एसआईटी की तीखी आलोचना करते हुए, पीठ ने कहा कि उसने अपने सामने पेश की गई घटना की केस डायरी की सूक्ष्मता से जांच की है और पाया है कि एसआईटी का गठन 22 मार्च को किया गया था, लेकिन उसने आज तक कोई प्रभावी योगदान नहीं दिया है.

अदालत ने कहा, “यह प्रस्तुत किया गया है कि इस तथ्य के बावजूद कि पुलिस थाना घटना स्थल के बहुत करीब है, पुलिस समय पर नहीं पहुंची और घरों के अंदर फंसे लोग जलते रहे.”

अदालत ने कहा, “केस डायरी की सूक्ष्म जांच पर, हमारी राय है कि अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए अपेक्षित जांच नहीं की गई है. हम विवरण का उल्लेख नहीं कर रहे हैं. जांच में कमी देखी गई क्योंकि इससे पक्षों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. हम यह भी पाते हैं कि यह एक ऐसा असाधारण मामला है जहां अपेक्षित निर्देश की आवश्यकता है.”

अदालत ने यह आदेश ममता बनर्जी सरकार द्वारा मामले को संघीय जांच एजेंसी को नहीं सौंपने के अनुरोध को खारिज करने के बाद दिया.

न्यायालय ने बुधवार को मामले का स्वत: संज्ञान लिया था और सभी पक्षों को सुनने के बाद गुरुवार को फैसला सुरक्षित रख लिया था.

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