न्यूज 18 ने लिखा कि महिलाओं के लिए विभिन्न योजनाओं के साथ नीतीश सरकार महिलाओं के लिए लगातार कार्य करती रही. 2016 में शराबबंदी कानून लागू कर महिलाओं का विश्वास पाया और इसका लाभ 2020 के विधान सभा चुनाव में प्राप्त किया.
योगी आदित्यनाथ और नीतीश कुमार समान मुद्दों पर फोकस करते हैं. बिहार में जिस प्रकार नीतीश सरकार ने 2005 से 2010 के बीच में कानून व्यवस्था को लेकर कार्य किया, इसका फायदा यही रहा महिलाओं ने नीतीश सरकार को भरपूर समर्थन दिया और नीतीश सरकार की सत्ता में वापसी करवाई.
News 18 हिन्दी ने लिखा है कि “महिलाओं के लिए विभिन्न लाभकारी योजनाओं के साथ ही नीतीश सरकार महिलाओं के लिए लगातार कार्य करती रही. वर्ष 2016 में शराबबंदी कानून लागू कर महिलाओं का विश्वास पाया और इसका लाभ 2020 के विधान सभा चुनाव में प्राप्त किया. योगी आदित्यनाथ भी लोक कल्याणकारी योजनाओं और माताओं एवं बहनों की सुरक्षा को प्रधानता देते हैं.”
पोर्टल आगे लिखता है कि “प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टीकी बड़ी जीत हुई है. चर्चा इस बात की भी होने लगी कि समाजवादी पार्टी ने बहुत बेहतर प्रदर्शन किया है. इसके पीछे तर्क यह भी दिए गए कि मुस्लिम और यादव समुदाय के मतदाताओं ने यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पक्ष में जमकर वोटिंग की है.”
हालांकि बताया ये भी जा रहा है कि यादों और पिछड़ों ने अखिलेश यादव को वोट करने के बजाए भाजपा का साथ दिया वरना अखिलेश की इतनी बुरी हालत नहीं होती.
पिछली बार के मुकाबले में समाजवादी पार्टी गठबंधन को 2017 की 22 प्रतिशत की तुलना में इस बार 14 प्रतिशत अधिक मत मिले हैं और इसमें 19 प्रतिशत मुसलिम मतों का बड़ा योगदान माना जा रहा है.
वहीं इन आंकड़ों की तुलना भाजपा की 44 प्रतिशत से मतों से हो रही है जिसमें अकसर ख़बर वाले ये कह रहे हैं कि इसमें महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान है और इसके पीछे का कारण केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का भी रहा.
न्यूज चेनलों का कहना है कि योगी को भी महिला यानी ‘M’ और योजना यानी ‘Y’ का समर्थन प्राप्त हुआ है, जिससे ये बताया जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ की जीत में भी ‘MY’ फैक्टर का बड़ा योगदान है.”
न्यूज 18 ने “योगी आदित्यनाथ के इस ‘MY’ की तुलना पड़ोसी राज्य बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘MY’ से की है.
पोर्टल का मानना है कि “बिहार में भी सीएम नीतीश कुमार ने मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दलके ‘माय’ समीकरण यानी मुस्लिम-यादव वोट बैंक की राजनीति के तोड़ के लिए अपना माय समीकरण यानी ‘महिला+ योजना’ बनाया. यही वजह रही कि 2005 में राजद से सत्तान्तरण होने के बाद वर्ष 2010 में जदयू-भाजपा की बंपर जीत हुई थी. अपने 2005 से 2010 के कार्यकाल में नीतीश सरकार ने महिलाओं को पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण देकर खामोश क्रांति का आगाज कर दिया था. इसका लाभ नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार को मिला. योगी सरकार ने भी इसी तरह महिलाओं के लिए कई योजनाएं चलाईं और इसका लाभ इस चुनाव में मिला.”
हालांकि महिलाओं ने किस पार्टी को वोट क्या है इसका पता लगाना काफ़ी कुशकिल काम है.
भारत के अक्सर इलाक़े पृष प्रधान हैं और जिस पार्टी को मर्द वोट करते हैं उसी पार्टी को औरतें भी वोट करती हैं.
ऐसा देखना तक़रीबन नामुमकिन है कि मियां किसी को वोट करे और बीवी किसी और को.
दरअसल उत्तर प्रदेश मनें भाजपा की जीत का एक कारण ओपॉज़िशन का बिखड़ाओ भी है क्यूंकी भाजपा के एक गठबंधन के मुकाबले में ओपॉज़िशन के कई गठबंधन चुनाव के मैदान मे थे.

