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Wednesday, January 21, 2026

एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए भारतीय छात्र यूक्रेन क्यों जाते हैं? यूक्रेन में मेडिकल की पढाई में कितना खर्चा होता है?

इंडियाएमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए भारतीय छात्र यूक्रेन क्यों जाते हैं? यूक्रेन में मेडिकल की पढाई में कितना खर्चा होता है?

एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए भारतीय छात्र यूक्रेन क्यों जाते हैं? लेकिन ऐसा वहां क्या पढ़ाया जाता है जो भारत में नहीं हो पाता? युक्रेन में चिकित्सा का अध्ययन करने में कितना खर्च आता है?

भारत से हज़ारों छात्र हर साल मेडिकल की पढाई करने के लिए यूक्रेन, अमेरिका, कनाडा औसट्रेलिया और दूसरे देश जाते हैं. इनमें से काफ़ी तादाद में भारतीय छात्र यूक्रेन भी जाते हैं. लेकिन ऐसा वहां क्या पढ़ाया जाता है जो भारत में नहीं हो पाता? या इसकी वजह क्या है? चलिए जानते हैं कि इंडियन स्टूडेंट्स MBBS की पढ़ाई करने के लिए यूक्रेन क्यों जाते हैं.

अगर भारत में चलने वाले प्राइवेट MBBS कॉलेजों की बात करें तो पूरे कोर्स की लगभग 1 करोड़ रुपए से ज़्यादा फीस लगती.

भारत में एमबीबीएस की सीटें

आप सोच रहे हैं कि भारत में एमबीबीएस की कितनी सीटें हैं, तो भारत में कुल 1,18,316 सीटें हैं जिनमें से लगभग 40% सीटें प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के पास हैं.

जो मैरिट में आते हैं और आरक्षण के दायरे में आते हैं उन्हें ही एडमिशन मिलता है. अब तो पूरे देश में मेडिकल की पढाई करने में सरकार 73% आरक्षण देती है. ऐसे में सामान्य वर्ग के छात्र विदेश नहीं जाएंगे तो क्या करेंगे?

आपको लगता होगा कि विदेश में मेडिकल की पढाई बहुत महंगी होती है लेकिन ऐसा नहीं है, यूक्रेन में मेडिकल की पढाई सबसे सस्ती है. वहां सिर्फ 20 लाख रुपए में 5 साल के अंदर MBBS कम्प्लीट हो जाता है और यहां भारत में 1 करोड़ से ज़्यादा फीस लगती है. मध्यप्रदेश से हर साल 700 के लगभग छात्र MBBS के लिए यूक्रेन जाते हैं.

पिछले साल हुई NEET की परीक्षा में 16 लाख 19 हज़ार छात्रों ने परीक्षा दी थी, जिसमे सरकारी कॉलेजों में पढाई करने के लिए सिर्फ 77 हज़ार का चयन हुआ. सरकारी कॉलेज में मेडिकल की पढाई का खर्च महज़ 4 से 5 लाख रुपए है जबकि प्राइवेट में 1 करोड़ और यूक्रेन में 20 लाख.

अमेरिका में एमबीबीएस की शिक्षा सबसे महंगी

लेकिन इसी कोर्स की पढाई के बारे में अमेरिका की बात करें तो यहाँ 8 करोड़ रुपए में एमबीबीएस की पढ़ाई मुकम्मल होती है, वहीं कजाकिस्तान में सिर्फ 25 लाख लगते हैं जबकि ब्रिटेन में 4 करोड़, कनाडा में 4 करोड़, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड में 4 करोड़ फीस लगती है. इसी लिए छात्र यूक्रेन की तरफ भागते हैं और पैसे वाले लोग आमतौर पर अमेरिका में जाकर मेडिकल की पढाई करते है, जिनका भौकाल ही अलग होता है.

भारत में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए इस महंगाई को देखते हुए विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई करना ही अच्छा और आसान विकल्प माना जाता है. हालांकि, कोर्स करने के बाद जैसे ही आप भारत वापस आ जाते हैं, तो आपको एमसीआई स्क्रीनिंग टेस्ट या एफएमजीई के लिए बैठना होता है.

यूक्रेन में मेडिकल की पढाई सबसे सस्ती

अगर आप अमेरीका, यूके, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूज़ीलैंड से एमबीबीएस का कोर्स करके आते हैं, तो आपको FMGE वगैरा नहीं करना होता है ,लेकिन जैसा कि आपको बताया गया इन पांच देशों से मेडिकल कोर्स करने की लागत सामान्य रूप से ₹4 करोड़ से अधिक है, यूएसए, यूके, कनाडा के मामले में अवधि 8-9 वर्ष होगी क्योंकि आपको 4 में से पहले प्री-मेडिकल कोर्स करने की ज़रूरत होती है. प्री-मेडिकल कोर्स पूरा करने के बाद आपको फिर से अड्मिशन टेस्ट में बैठना होता है. इस लिए बहुत कम ही छात्र ऐसे मिलते हैं जो इन देशों के लिए कोशिश करते हैं. इसलिए यूक्रेन जैसे देश ही इस मामले में सबसे सस्ता और आसान होता है जहां ना तो रहना महंगा है न पढ़ना.

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