Monday, March 30, 2026

मौलाना अरशद मदनी ने कहा हिजाब भारत की परंपरा में है और पर्दा शर्म-हया का प्रतीक है

Share

मौलाना मदनी ने कहा कि हमारे देश का माहौल ऐसा है कि यहां की परंपरा और सभ्यता में ही पर्दा है। यह कोई धार्मिक मामला नहीं, बल्कि कपड़े पहनना ही हिजाब है, न जाने इसको बिला वजह इतना क्यों तूल दिया जा रहा है।

जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के लिए वोट डालने के बाद कर्नाटक के हिजाब विवाद को लेकर एक अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि हमारे देश की परंपरा और सभ्यता में पर्दा पहले से मौजूद है और कहा कि कपड़े तो सभी पहनते हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई धार्मिक मामला नहीं बल्कि कपड़े पहनने से जुड़ा है।

मौलाना मदनी ने कहा कि हर इंसान किसी न किसी रूप में पर्दा करता है और कपड़े पहनता है। यह हिजाब ही तो है। पर्दा सभी के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमारे देश का माहौल ऐसा है कि यहां की परंपरा और सभ्यता में ही पर्दा है। यह कोई धार्मिक मामला नहीं, बल्कि कपड़े पहनना ही हिजाब है, न जाने इसको बिला वजह इतना क्यों तूल दिया जा रहा है।

उन्होंने हिजाब को तन ढकने का ज़रिया बताते हुए कहा कि हिजाब सभी औरतों और लड़कियों के लिए ज़रूरि है। जब मीडिया ने उनसे सवाल क्या कि हिजाब कितना ज़रूरि है तो उन्होंने काफ़ी सहजता से जवाब दिया कि जिसके अंदर जितनी शर्म और हया होगी, उसके लिए उतना ही पर्दा ज़रूरि होगा। अगर शर्म-हया नहीं तो पर्दा भी ज़रूरि नहीं है।

अपने मत का प्रयोग करने के बाद उन्होंने वोट को अमन, शांति और भाईचारे क लिए ज़रूरि क़रार दिया और सभी से मत के अधिकार का प्रयोग करने की अपील भी की।

Read more

Local News