Friday, March 13, 2026

हरियाणा के मूल निवासियों को निजी क्षेत्र में आरक्षण पर 11 फरवरी को सुनवाई

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उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के अधिसूचना पर रोक लगा दी, जिसमें हरियाणा के मूल निवासियों के लिए निजी क्षेत्र में प्रति माह 30,000 से कम की वेतन वाली नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का प्रावधान किया गया.

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय हरियाणा में राज्य के मूल निवासियों को निजी क्षेत्र की कंपनियों की नौकरी में 75 फ़ीसदी आरक्षण संबंधी प्रावधान वैधता के सवाल पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा.

न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को संबंधित पक्षों की राय जानने के बाद शुक्रवार के लिए इस मामले को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया.

मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 04 फरवरी को राज्य सरकार के शीघ्र सुनवाई के अनुरोध को स्वीकार कर लिया था.

राज्य सरकार द्वारा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका आज (7 फरवरी) सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई थी, लेकिन संबंधित पक्षों की सहमति के बाद इसे शुक्रवार के लिए टाल दिया गया.

उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की आरक्षण लागू करने संबंधी अधिसूचना पर गत गुरुवार को रोक लगा दी थी.

उच्च न्यायालय के इस फैसले को राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत में अगले दिन शुक्रवार को चुनौती दी थी.

विशेष उल्लेख के दौरान राज्य सरकार ने इस मामले में शीघ्र सुनवाई करने का अनुरोध किया था.

उच्च न्यायालय ने 03 फरवरी को राज्य सरकार के गत 15 जनवरी 2022 को जारी उस अधिसूचना पर रोक लगा दी थी, जिसमें राज्य के मूल स्थानीय निवासियों के लिए निजी क्षेत्र एवं ट्रस्ट आदि की कंपनियों में प्रति माह 30,000 से कम की वेतन वाली नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का प्रावधान किया गया है.

आरक्षण के प्रावधान के खिलाफ रेवाड़ी, फरीदाबाद, गुरुग्राम की विभिन्न औद्योगिक एसोसिएशनों के अलावा कई अन्य ने सरकार कि इस अधिसूचना के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था.

याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय के समक्ष विभिन्न दलीलों के साथ कहा था कि आरक्षण दिया जाना संविधान के खिलाफ है.

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