भाजपा नेता अश्वनी कुमार उपाध्याय ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष ‘विशेष उल्लेख’ के तहत प्रत्याशियों के आपराधिक रिकॉर्ड सार्वजनिक करने वाली याचिका दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है.
नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों के आपराधिक रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं करने पर संबंधित राजनीतिक दलों की मान्यता रद्द करने की मांग संबंधी एक जनहित याचिका पर शीघ्र सुनवाई के लिए मंगलवार को सहमत हो गया.
याचिकाकर्ता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता एवं वकील अश्वनी कुमार उपाध्याय ने आज मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष ‘विशेष उल्लेख’ के तहत से शीघ्र सुनवाई की मांग की, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया.
उम्मीदवारों के अपराधिक रिकॉर्ड मामले पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट सहमत https://t.co/IPRcAl0Eba
— Ashwini Upadhyay (@AshwiniUpadhyay) January 18, 2022
श्री उपाध्याय ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने का हवाला देते हुए सोमवार को दायर की गई अपनी याचिका को ‘तत्काल सुनवाई योग्य’ बताते हुए शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाई थी.
याचिकाकर्ता ने बताया, “याचिका में उच्चतम न्यायालय से गुहार लगाई गई है कि न्यायालय निर्वाचन आयोग को यह निर्देश दे कि वह समाजवादी पार्टी (सपा) समेत उन राजनीतिक दलों के पंजीकरण रद्द कर दे, जो चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों के आपराधिक इतिहास का खुलासा नहीं करते हैं.”
श्री उपाध्याय ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कैराना निर्वाचन क्षेत्र से सपा ने नाहिद हसन को चुनावी मैदान में उतारने घोषणा की है.
उनका आरोप है कि हसन एक गैंगस्टर है लेकिन सपा ने इस उम्मीदवार के आपराधिक रिकॉर्ड को समाचार पत्र, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया में प्रकाशित-प्रसारित नहीं किया, और न ही उसके चयन की वजह बतायी है.
याचिकाकर्ता का कहना है कि उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में जानकारी नहीं देना उच्चतम न्यायालय के फरवरी 2020 के फैसले के खिलाफ है.
श्री उपाध्याय का कहना है कि अपने फैसले में शीर्ष न्यायालय ने कहा था कि उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करते वक्त राजनीतिक दलों के लिए संबंधित व्यक्ति का अपराधिक रिकॉर्ड सार्वजनिक करना अनिवार्य है.
