Tuesday, March 31, 2026

खरपतवारनाशी ग्लाइफोसेट पर पूर्ण रोक होनी चाहिए: स्वदेशी जागरण मंच

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स्वदेशी जागरण मंच ने याचिका सौंपी जिसमे कहा गया है कि ग्लाइफोसेट प्राणघातक कैंसर के प्रमुख कारणों में एक कारण है इसलिए इसको पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए.

नयी दिल्ली: स्वदेशी जागरण मंच ने खरपतवारनाशी रसायन ग्लाइफोसेट पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को एक याचिका सौंपी है.

मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक डा. अश्विनी महाजन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमण्डल शनिवार को श्री तोमर से मिला और उन्हें ग्लाइफोसेट रोक की मांग करने वाली याचिका सौंपी.

इस याचिका पर देश भर से दो लाख एक हजार 609 लोगों ने हस्ताक्षर किये हैं.

याचिका में कहा गया है कि ग्लाइफोसेट प्राणघातक कैंसर के प्रमुख कारणों में एक है इसलिए इसको पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए.

डॉ. महाजन ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को ध्यानपूर्वक सुना और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया.

याचिका में कहा गया है कि इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने भी ग्लाइफोसेट को कैंसर का कारण घोषित किया है.

याचिका पर हस्ताक्षर अभियान लगभग ढ़ाई साल पहले शुरू किया था.

डाॅ. महाजन ने कहा कि ग्लाइफोसेट के दुष्परिणामों से सरकार परिचित है और इसका प्रयोग सीमित मामलों में करने की अनुमति है लेकिन इन प्रावधानों का कोई अर्थ नहीं रह गया है और आम जनता का स्वास्थ्य, किसान हित, खेतिहर श्रमिक और पर्यावरण प्रभावित हो रहे है.

उन्होंने कहा कि ग्लाइफोसेट का पूरे देश में, विशेषकर गुजरात में कपास और सोया की खेती में बहुत इस्तेमाल हो रहा है.

हालांकि केरल, पश्चिम बंगाल, पंजाब, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने ग्लाइफोसेट के प्रयोग पर रोक लगाई है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी वर्षों के अध्ययन के बाद ग्लाइफोसेट को मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया है और कैंसर का कारण माना है.

याचिका में कहा गया है कि ग्लाइफोसेट निर्मित करने वाली कंपनियों के खिलाफ लाखों मामले अदालतों में चल रहे है.

मंच ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत जैविक खेती के मुख्य केंद्र के रूप में उभर रहा है और इस रसायन का प्रयोग इस रास्ते में एक प्रमुख बाधा हो सकता है , इसलिए सरकार को इसे प्रतिबंधित कर देना चाहिए.

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