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Wednesday, January 21, 2026

भारत में मुसलमानों का आगमन और इस्लाम का प्रसार

इंडियाभारत में मुसलमानों का आगमन और इस्लाम का प्रसार

मुसलमानों के खिलाफ बोलने वाले आम तौर पर यह प्रचार करते हैं कि इस्लाम भारत में गौरी और गजनवी के आक्रमणों के दौरान आया, जबकि सच्चाई यह है कि मुस्लिम व्यापारियों, विद्वानों और आम मुसलमानों द्वारा आया।

हिन्दू मुस्लिम एकता स्थापित करने की कोशिशों के तहत अब मैं एक बहुत ही अहम विषय पर आ गया हूँ। इस भाग में मैं भारत में मुसलमानों के आगमन और इस्लाम फैलने के बारे में बात करूंगा। आप ने सुना होगा कि कुछ दिन पहले मुंबई की एक सभा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संचालक मोहन भागवत ने कहा कि भारत में इस्लाम आक्रमणकारियों के साथ आया था । जबकि उनका यह कहना बिलकुल ग़लत और निराधार है। मुसलमानों के ख़िलाफ़ बोलने वाले लोग यही प्रोपेगंडा करते हैं कि इस्लाम ग़ौरी और ग़ज़नवी के हमलों के दौरान भारत में आया जबकि सच तो यह है कि मुसलमान सौदागर, उलेमा और आम मुस्लिम भारत में हिजरत के पहले वर्ष में ही आना शुरू हो गए थे।

भारत से मसाले व रत्न ख़रीद कर अरब देशों में बेचने वाले अनेक व्यापारी गुजरात और केरल की बंदरगाहों पर नौका द्वारा सदियों से आया करते थे और जब अरब में इस्लाम का उदय हुआ तो अरब व्यपारियों ने इस्लाम ग्रहण क्या और भारत आने का सिलसिला जारी रखा। कभी कभी मौसम ख़राब होने के कारण अरब के व्यापारियों को महीनों भारत में रुकना पड़ता था जिसके कारण उनको नमाज़ पढ़ने के लिए मस्जिद की ज़रूरत पड़ती थी तो उस समय के भारतीय शासकों ने उनको मस्जिद के निर्माण की अनुमति दी। इसी कारण भारत की धरती पर उस समय पहली मस्जिद बनी जबकि अरब के बहुत से इलाक़ों में भी मस्जिद नहीं थी।

गुजरात के भाव नगर के घोघा नामक गाँव में 1400 वर्ष पुरानी एक ऐसी मस्जिद अभी तक मौजूद है जिसका रुख काबे की ओर नहीं बल्कि यरूशलम में बनी मस्जिद अक़्सा की ओर है, जिस की तरफ़ शुरू के दिनों में मुसलमान अपना मुंह करके नमाज़ पढ़ा करते थे मगर हिजरत के दूसरे वर्ष में जब काबा की ओर मुंह करके नमाज़ पढ़ने का आदेश आया तो मस्जिदों का रुख मक्का की ओर होने लगा। भाव नगर की प्राचीनतम मस्जिद का रुख़ यरुशलम की तरफ होने की वजह से यह अंदाज़ा लगाना आसान है कि यह मस्जिद 622 ई (पैग़म्बर साहिब के जीवन काल में ही) बन कर तैयार हो गई थी।यह मस्जिद इतनी छोटी है की इस में केवल 25 लोग नमाज़ पढ़ सकते हैं।

इस मस्जिद के अलावा केरल के त्रिशूर ज़िले के कोडंगलूर ताल्लुक़ा में 1400 वर्ष पुरानी एक अन्य मस्जिद स्थित है जिस को चेरामन की जामा मस्जिद कहा जाता है। इसके बारे में बी बी सी की 13.10.15 को प्रसारित एक रिपोर्ट में कहा गया कि वह पैगंबर साहिब के जीवन काल में बनने वाली भारत की पहली मस्जिद थी, जिसके लिए ज़मीन वहां के राजा चेरामन पेरुमल ने दी थी। कुछ अन्य स्रोतों को कहना है कि चेरामन की जामा मस्जिद 629 ई में पैगंबर हज़रत मोहम्मद के एक सहाबी (मित्र) हज़रत मालिक बिन दीनार के भारत में आने के बाद राजा चेरामन पेरुमल द्वारा दी गई ज़मीन पर बनी थी। इस तरह भारत के तटीय क्षेत्रों में बनने वाली यह दूसरी मस्जिद थी।

वैसे पैगंबर हज़रत मोहम्मद से मिलने के लिए कई भारतीय सन्यासियों के मदीना जाने की बात भी कई एतिहासिक क़िस्सों में लिखी गई है। इन्हीं में से एक बाबा रतन सेन का नाम बहुत मशहूर है। वह शक़ उल क़मर (चाँद के विभाजित होने की चमत्कारिक घटना) के बाद मदीना गए थे और पैगंबर साहिब से उस समय मिले थे जब पैगंबर साहिब और उनके साथी मदीना शहर को मुस्लिम विरोधी ताक़तों के हमले से बचाने के लिए जंग ए ख़ंदक़ (खाई खोद कर किया जाने वाल सुरक्षात्मक युद्ध) लड़ रहे थे। कहा जाता है कि पैगंबर साहिब ने उनको दीर्घायु होने का आशीर्वाद दिया था, जिस के कारण बाबा रतन सेन लगभग 600 वर्ष तक ज़िंदा रहे, उनका मक़बरा पंजाब के भटिंडा शहर के मोहल्ला हाजी रतन नगर में आज भी स्थित है। वैसे कुछ मान्यताओं के अनुसार बाब रतन सेन की समाधी अमरोहा ज़िले के धन्नौरा गाँव में स्थित है। इस्लामी जगत में उनको बाबा रतन उल हिंदी के नाम से जाना और पहचाना जाता है।

उधर भारत के अन्य राज्यों में अनेकानेक मुस्लिम धर्मगुरु और व्यापारी भी लगातार आ रहे थे। उस समय किसी देश में शांति पूर्वक आने पर न तो कोई प्रतिबंध था न किसी को वीज़ा पासपोर्ट दिखाने की ज़रूरत पड़ती थी और न ही किसी शरणार्थी से उसका धर्म पूछा जाता था । इस लिए कोई भी इंसान कहीं भी अपना घर बना सकता था। चूँकि भारत से मुस्लिम देश की सीमायें मिलती थीं इसलिए अनेक लोग भारत में आते रहते थे। ऐसे ही सर्वप्रथम आने वालों में हज़रत अली की बेटी हज़रत रुक़ैय्या बिन्ते अली शामिल थीं। हज़रत अली की इन बेटी को ‘बीबी पाक दामन’ के नाम से जाना और पहचाना जाता है। हज़रत रुक़ैय्या बिन्ते अली और उनके साथ आने वाली अन्य महिलाओं की दरगाह पाकिस्तान के शहर लाहौर में स्थित हैं (जो 1947 से पहले तक अखंड भारत का हिस्सा था)। अगले भाग में बीबी पाक दामन और भारत को हमेशा के लिए अपना घर बनाने वाले अन्य मुसलमानों के बारे में बात करूँगा। (जारी)

1 – पहला भाग

2 – दूसरा भाग

3 – तीसरा भाग

4 – चौथा भाग

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