14.1 C
Delhi
Wednesday, January 21, 2026

हिन्दू मुस्लिम विवाद: कितना धार्मिक कितना राजनीतिक [भाग -1]

इंडियाहिन्दू मुस्लिम विवाद: कितना धार्मिक कितना राजनीतिक

हम इस सीरीज़ के माध्यम से यह कोशिश करना चाहते हैं कि हिंदू और मुस्लिम वर्गों के बीच नफरत कम हो। आप से निवेदन है कि अगर आप को हमारी यह मुहिम पसन्द आये तो इस लेख को शेयर करें… और कल इसका दूसरा भाग पढ़ें।

आप देख रहे हैं कि देश में कितनी नफ़रतें फैलाई जा रही हैं और धर्म के नाम पर तनाव फैला कर राजनितिक लाभ उठाया जा रहा है। ऐसी परिस्थिति में हमारा और आप का कर्तव्य है कि हिन्दू मुस्लिम तनाव पैदा कर के राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करने वालों को नाकाम बनायें और वह सच सब के सामने पेश करें जिस से दोनों वर्गों के बीच की दूरियां कम हों। मैं सोशल मीडिया के ज़रिये देश के लोगों को क़रीब लाने के लिए एक छोटा सा प्रयास कर रहा हूँ और हिन्दुओं व मुसलमानों को बताना चाहता हूँ कि हम सब एक ही ईश्वर के मानने वाले हैं और हमारे पूर्वज एक ही थे।

मैं इस तरफ़ भी लोगों को ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ कि धर्म इंसानों के कल्याण के लिए आया था लेकिन अब धर्म को इंसानों की जान लेने या उनको प्रताड़ित करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेष कर हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच बहुत नफ़रत फैलाई जा रही है, जबकि इन दोनों का रिश्ता एक ही महापुरुष से जा कर मिलता है।

आज से शुरू होने वाले इस कालम के द्वारा मैं भारत वर्ष के नागरिकों को यह बताने की कोशिश करूंगा कि हिन्दू और मुस्लिम समुदायों में कितनी निकटता है

मैं अपनी बात मनुष्य शब्द से शुरू करता हूँ। आप ने क्या कभी सोचा कि यह ‘मनुष्य’ शब्द आया कहाँ से ? कहा जाता है कि मनुष्य शब्द मनु और शिष्य शब्द से मिल कर बना है तो फिर हम को सोचना होगा कि मनु कौन थे और उनके शिष्य कौन थे? इस शब्द की उत्तपत्ति कैसे हुई उसको जानने के लिए हम को जल प्रलय का क़िस्सा पढ़ना पड़ेगा ।

भारतीय धर्म ग्रंथों के अनुसार हज़ारों वर्ष पहले इस संसार में भयानक समुंद्री तूफ़ान आया था, जिसके कारण पूरी धरती डूब रही थी, इस बात की पूरी सम्भावना थी कि धरती से सभी जीव-जंतु ख़त्म हो जायेंगे। ऐसी चिंताजनक परिस्थिति में हमारे पूर्वज मनु जी ने समस्त प्राणियों को बचाने के लिये एक बहुत विशाल नाव बनाई और उसमें अपने शिष्यों और हर प्रजाति के जीव-जंतुओं के एक एक जोड़े को लेकर नाव में बैठ गये, और जब काफ़ी दिनों बाद धरती से पानी उतरा तो मनु जी के शिष्यों ने फिर से दुनिया को आबाद किया तो समस्त नागरिकों को मनुष्य प्रजाति का नाम मिला क्योंकि यह दुनिया मनु जी के शिष्यों ने आबाद की थी ।

ख़ास बात यह है कि जल प्रलय का यह क़िस्सा सिर्फ हिंदुओं के धर्म ग्रंथों में लिखा हो ऐसा नहीं है यही क़िस्सा मुसलमानों, ईसाईयों और यहूदी वर्ग के लोगों के धर्म ग्रंथों में भी लिखा हुआ है, बस फर्क़ केवल इतना है कि विशाल नाव बना कर समस्त प्रजातियों को बचाने वाले उस महान व्यक्ति को भारतीय भाषाओं में ऋषि मनु कहा गया है जब कि अंग्रेज़ी में नोहा और अरबी भाषा में उन्हें नूह कहा गया है।

इतिहासकारों का मानना है कि यह तीनों नाम एक ही महापुरष के हैं, इतिहासकारों का यह भी मानना है कि भारत के लोग उस महान पुरुष को प्राचीन युग में महान नूह ही कहते थे मगर समय के साथ यह नाम सिर्फ मनु हो गया। फ़्रान्स के शोधकर्ता Abbe J.A. Dubois ने (जिनको कर्नाटक के लोग डड्डा स्वामी भी कहते हैं) अपनी किताब हिंदू मैनर्स कस्टम्स एंड सेरिमोनीज़ में लिखा है कि “एक मशहूर व्यक्ति जिनसे हिंदू बहुत श्रद्धा रखते हैं और जिन को वह महानोव के नाम से जानते हैं जो (जो एक विशाल नाव बना कर तूफ़ान की) तबाही से बच निकले थे उस (नाव) में सात ऋषि भी सवार थे। महानोव दो शब्दों की संधि से बना है, महा का अर्थ विशाल और नोवो का मतलब बिना किसी सन्देह के नूह ही है।”

मुस्लिम धर्म गुरु मौलाना शम्स नवेद उस्मानी ने भी अपनी किताब ‘अगर अब भी हम न जागे’ में यह बात लिखी है कि हज़रत नूह और ऋषि मनु एक ही व्यक्ति के नाम थे।

वेब दुनिया में प्रकाशित एक लेख में अनिरुद्ध जोशी शतायु ने भी लिखा है “राजा मनु को ही हजरत नूह माना जाता हैं। नूह ही यहूदी, ईसाई और इस्लाम के पैगंबर हैं। इस पर शोध भी हुए हैं। जल प्रलय की ऐतिहासिक घटना संसार की सभी सभ्‍यताओं में पाई जाती है। बदलती भाषा और लम्बे कालखंड के चलते इस घटना में कोई खास रद्दोबदल नहीं हुआ है। मनु की यह कहानी यहूदी, ईसाई और इस्लाम में ‘हजरत नूह की नौका’ नाम से वर्णित की जाती है।“

नाम और क़िस्से में इतना कम अंतर होना क्या इस बात की दलील नहीं है कि हम सब के पूर्वज एक ही थे? ध्यान रहे कि भारत के इतिहास में जिस को जल प्रलय कहा गया उसे मुसलमान तूफ़ाने नूह कहते हैं और अंग्रज़ी में इसको Deluge कहते हैं तो फिर सोचिए कि आज मनु के एक शिष्य के वंशज मनु के दूसरे शिष्य के वंशज को को प्रताड़ित करने को अपना धर्म क्यों समझ रहे हैं ? क्यों हम एक दूसरे से नफ़रत कर रहे हैं? क्या हम सब वही नहीं हैं जिनको मनु जी का वंशज होने की वजह से मनुष्य कहा गया?

मैं इस सीरीज़ के माध्यम से यही कोशिश करना चाहता हूँ कि हिंदू और मुस्लिम वर्गों के बीच नफरत कम हो। मैं आप से भी सहयोग की अपेक्षा करता हूँ और आप से निवेदन करता हूँ कि अगर आप को मेरी यह मुहिम पसन्द आये तो मेरे आलेख को फ़ारवर्ड करें… और कल दूसरा भाग पढ़ें।

Check out our other content

Check out other tags:

Most Popular Articles