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Wednesday, January 21, 2026

कंगना रनौत की भारत की स्वतंत्रता टिप्पणी पर राजनीतिक दलों और सिविल सोसाइटी की कड़ी प्रतिक्रिया

इंडियाकंगना रनौत की भारत की स्वतंत्रता टिप्पणी पर राजनीतिक दलों और सिविल सोसाइटी की कड़ी प्रतिक्रिया

सिविल सोसाइटी और बड़े-बड़े राजनीतिक दल कंगना रनौत को गिरफ्तार करने और उनका पद्म पुरस्कार रद्द करने की मांग भी की जा रही है.

विवादास्पद टिप्पणी करने के लिए जानी जाने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने ब्रिटिश राज के खिलाफ भारत के स्वतंत्रता संग्राम पर अपने विचारों को लेकर फिर से विवाद खड़ा कर दिया है.

34 वर्षीय पद्म श्री पुरस्कार विजेता ने एक टीवी चैनल के साथ अपने एक इंटरव्यू में कहा कि 1947 में भारत को स्वतंत्रता नहीं मिली थी, बल्कि वह ‘भीख’ थी और देश को वास्तविक स्वतंत्रता 2014 में मिली जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आई.

इस कमेंट पर पार्टियों और सिविल सोसाइटी के लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.

कुछ लोगों ने उनकी क्वीन ऑफ झांसी (झांसी की रानी) फिल्म का भी मजाक मज़ाक़ उड़ाया है, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था.

कंगना रनौत के इस बयान की बीजेपी समेत राजनीतिक दलों ने कड़ी निंदा की है.

भारतीय जनता पार्टी के सांसद वरुण गांधी ने ट्वीट कर कहा है कि यह एक राष्ट्रविरोधी टिप्पणी है और इसे इसी संदर्भ में लिया जाना चाहिए.

कांग्रेस ने शुक्रवार को मांग की है कि केंद्र को रनौत से पद्मश्री वापस लेना चाहिए क्योंकि उन्होंने देश के स्वतंत्रता आंदोलन का अपमान किया है.

महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महा विकास अघाड़ी सरकार में सहयोगी शिवसेना ने कहा कि कंगना के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाना चाहिए.

महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा है कि, “देश की आज़ादी की लड़ाई पर कंगना रनौत की टिप्पणी पूरी तरह से गलत है. किसी को भी स्वतंत्रता आंदोलन पर नकारात्मक टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है.”

महिला कांग्रेस ने उसके खिलाफ़ चुरू थाने में मामला दर्ज कराया है.

महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रेहाना रियाज़ ने शुक्रवार को चुरू स्थित कांग्रेस कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन में बताया कि महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष निर्मला सिंघल ने अभिनेत्री कंगना के खिलाफ़ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है.

प्रदेश अध्यक्ष रेहाना रियाज़ ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि भारत हजारों लोगों के बलिदान के बाद 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था.

सिविल सोसाइटी “आजादी का अमृत महोत्सव” के अर्थ पर भी सवाल उठा रही है, जो भारत सरकार के ज़रिए प्रगतिशील भारत के 75 साल और भारत के लोगों के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और उपलब्धियों पर जश्न मनाने की पहल थी.

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