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Thursday, January 22, 2026

मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की संपत्ति का खुलासा: दो फ्लैट, करोड़ों की एफडी और अन्य संपत्तियों की रिपोर्ट

इंडियामुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की संपत्ति का खुलासा: दो फ्लैट, करोड़ों की एफडी और अन्य संपत्तियों की रिपोर्ट

नई पारदर्शिता में स्वागतम: सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक की जजों की संपत्तियों की जानकारी

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जजों की संपत्ति का ब्यौरा अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया है। इस पहल का उद्देश्य न्यायपालिका में पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। जानकारी के अनुसार, देश के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना के पास कुल 55.75 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) है। इसके अलावा, उनके पास दक्षिणी दिल्ली में स्थित एक तीन बेडरूम का डीडीए फ्लैट और कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज में एक चार बेडरूम का फ्लैट है, जिसकी कुल क्षेत्रफल 2,446 वर्ग फीट है।

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संपत्ति का यह खुलासा उन नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो न्यायपालिका की पारदर्शिता और ईमानदारी पर विश्वास करते हैं। इस पहल का उद्देश्य न्यायाधीशों के आर्थिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी देना है, ताकि आम नागरिक न्यायपालिका की कार्यप्रणाली में विश्वास रख सकें।

जस्टिस बीआर गवई की संपत्ति का लेखा-जोखा

आगामी 14 मई को देश के अगले मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेने जा रहे जस्टिस बीआर गवई के पास भी अपने धन-दौलत का एक विस्तृत ब्योरा है। उनके पास बैंक खातों में 19.63 लाख रुपये नकद, महाराष्ट्र के अमरावती में एक पुश्तैनी मकान, मुंबई के बांद्रा में एक अपार्टमेंट, और दिल्ली की डिफेंस कॉलोनी में एक और अपार्टमेंट है। इस तरह, न्यायपालिका में संपत्ति की पारदर्शिता बढ़ाने का यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

जस्टिस गवई के पास कुल 5.25 लाख रुपये के सोने के आभूषण हैं, जबकि उनकी पत्नी के पास 29.70 लाख रुपये के आभूषण हैं। इसके अलावा, उनके पास नकद 61,320 रुपये भी हैं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि न्यायपालिका के शीर्ष पदों पर बैठे व्यक्तियों के पास आर्थिक संपत्तियों का ध्यान रखना कितना आवश्यक है।

सीजेआई संजीव खन्ना के पास संपत्तियों की विविधता

सीजेआई संजीव खन्ना, जो 13 मई को रिटायर हो रहे हैं, के पास और भी संपत्तियां हैं। उनके पास गुरुग्राम में चार बेडरूम के फ्लैट में 56 फीसदी हिस्सेदारी है और हिमाचल प्रदेश के डलहौजी में भी उनकी संपत्तियां हैं। इसके अलावा, उनका पीपीएफ में 1.06 करोड़ रुपये का निवेश है, जीपीएफ में 1,77,89,000 रुपये, और सालाना 29,625 रुपये की मनी बैक पॉलिसी भी है। उनके पास 250 ग्राम सोना, 2 किलो चांदी और एक मारुति स्विफ्ट कार भी है।

इस प्रकार, जस्टिस खन्ना की संपत्तियों का यह ब्योरा दर्शाता है कि न्यायाधीशों को अपनी संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक करना कितना आवश्यक है। इससे आम लोगों का न्यायपालिका पर विश्वास बढ़ता है।

सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों की संपत्तियां

सुप्रीम कोर्ट के 33 में से अब तक 21 जजों ने अपनी संपत्ति का खुलासा किया है। इनमें जस्टिस सूर्यकांत, जो नवंबर में चीफ जस्टिस का पद संभालेंगे, उनके पास चंडीगढ़ में एक घर, पंचकूला में 13 एकड़ कृषि भूमि और गुरुग्राम में अन्य संपत्तियां हैं। उनके पास करीब 4.11 करोड़ रुपये की एफडी और 100 ग्राम सोने के आभूषण हैं।

जस्टिस अभय एस ओक के पास भी महाराष्ट्र के ठाणे में एक फ्लैट और कृषि भूमि है, जिनकी कुल संपत्ति 21 लाख रुपये की एफडी और 9.10 लाख रुपये की बचत की रकम है। ये आंकड़े न केवल न्यायपालिका की पारदर्शिता को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट करते हैं कि न्यायधिकारियों को अपनी वित्तीय जानकारी साझा करने से कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

बाहरी स्रोतों के अनुसार, जस्टिस विक्रमनाथ के पास 120 करोड़ रुपये का निवेश है, जो उनकी वित्तीय स्थिति को और भी मजबूत बनाता है। उन्होंने अपने आयकर रिटर्न की भी जानकारी साझा की है, जिससे उनकी आर्थिकी की सच्चाई का पता चलता है।

न्यायपालिका में पारदर्शिता का महत्व

यह स्पष्ट है कि न्यायपालिका में पारदर्शिता को बढ़ावा देने से न्यायपालिका की विश्वसनीयता में वृद्धि होती है। न्यायाधीशों की संपत्तियों का खुलासा न केवल नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि न्यायपालिका की समग्र कार्यप्रणाली में सुधार लाने में भी सहायक है।

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध संपत्तियों का यह ब्यौरा पत्रकारिता के लिए भी एक नया दृष्टिकोण प्रदान करता है। इससे यह भी पता चलता है कि न्यायपालिका कैसे अपनी ईमानदारी और पारदर्शिता को बनाए रख सकती है।

जजों की संपत्ति का खुलासा सभी न्यायाधीशों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करता है कि वे अपनी संपत्तियों को सार्वजनिक करने में पीछे न हटें। इससे न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी, और इससे आम नागरिकों का न्यायपालिका पर विश्वास बना रहेगा।

आर्थिक आस्थाओं का यह खुलासा हमारे समाज में न्यायपालिका के प्रति विश्वास को और मजबूत करेगा और इससे नागरिकों को यह महसूस होगा कि न्यायपालिका अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शी है।

 

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