लंदन में यूक्रेन के संकट को खत्म करने के लिए अहम बैठक, राजनयिकों का ध्यान शांति पर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन: हाल ही में, रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रयासों में तेजी आई है। बुधवार को, लंदन में ब्रिटेन, अमेरिका, यूरोप के अन्य देशों के साथ-साथ यूक्रेन के राजनयिक और रक्षा प्रमुख एक महत्वपूर्ण बैठक करने के लिए एकत्रित होंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य युद्ध विराम के संभावित तरीकों पर चर्चा करना और भविष्य में दीर्घकालिक शांति को सुनिश्चित करना है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब पिछले कई वर्षों से चल रहा यह संघर्ष दोनों देशों के लिए गंभीर समस्याएँ उत्पन्न कर रहा है।
बैठक की तिथि और स्थान
बैठक 23 अप्रैल, 2025 को लंदन में आयोजित की जाएगी। इसमें प्रमुख देश जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, और अन्य यूरोपीय देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस बैठक में विदेश मंत्रियों और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की उपस्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे शांति समझौते के लिए आवश्यक कदम उठाने का प्रयास कर रहे हैं।
संघर्ष का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष की शुरुआत 2014 में हुई थी, जब रूस ने यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद से दोनों देशों में लगातार युद्ध की स्थिति बनी हुई है। यह संघर्ष न केवल क्षेत्रीय स्तर पर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी खासी चिंता का विषय बन गया है। इस समय दोनो देशों के लिए शांति की आवश्यकता अधिकतम हो गई है।
बैठक के उद्देश्य
बैठक के दौरान, युद्ध विराम के संभावित स्वरूपों पर विचार किया जाएगा। ब्रिटिश रक्षा सचिव जॉन हीली ने कहा कि इस बैठक में यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि कैसे युद्ध विराम को लागू किया जा सकता है और दीर्घकालिक शांति कैसे सुनिश्चित की जा सकती है। इसके अलावा, दोनों देशों के दृष्टिकोण को समझने और वार्ता की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विचार-विमर्श किया जाएगा।
बैठक में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल कीथ केलॉग भी उपस्थित रहेंगे। इनकी उपस्थिति से यह स्पष्ट हो रहा है कि अमेरिका इस मुद्दे को सुलझाने में गंभीर है।
ऐतिहासिक महत्व
इस बैठक का ऐतिहासिक महत्व है क्योंकि यह पिछले तीन वर्षों में चल रहे निरंतर संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी हो सकती है। ब्रिटेन ने कहा है कि यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण है, और सभी राजनयिक प्रयासों को एकजुट करना होगा।
यूक्रेन का दृष्टिकोण
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि उनकी सरकार केवल बिना शर्त या आंशिक युद्धविराम पर चर्चा करने के लिए तैयार है। यदि युद्ध विराम होता है, तो वे किसी भी प्रारूप में बातचीत के लिए भी तत्पर होंगे।
रूस का संभावित रुख
हालांकि, रूस, जैसा कि उनके विदेश मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा है, युद्ध में लाभ हासिल करने की चेष्टा में लगातर है। पश्चिमी विश्लेषकों का मानना है कि रूस शांति वार्ता को समाप्त करने की जल्दी में नहीं है। रूस द्वारा अधिक यूक्रेनी भूमि पर कब्जा करने की योजना उनके रणनीतिक उद्देश्यों में शामिल हो सकती है।
पार्श्ववर्ती घटनाएँ
हाल ही में, सऊदी अरब में रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडलों ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ अलग-अलग वार्ताएं की हैं। हालांकि, रूस ने अमेरिका के प्रस्ताव को खारिज करते हुए उससे संबंधित शर्तों को स्वीकारने से इंकार कर दिया।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि पेरिस वार्ता में शामिल होने वाले विदेश मंत्री मार्को रुबियो शेड्यूल मामले के कारण बैठक में नहीं आ पाएंगे। ब्रिटेन ने भी ये स्पष्ट किया है कि रूस द्वारा पड़ोसी पर आक्रमण के बाद से जो स्थिति उत्पन्न हुई है, उसे देखते हुए सभी को तत्पर रहना होगा।
सुरक्षा और संभावनाएँ
बैठक के परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि क्या सभी पक्ष आपसी सहमति पर पहुंच पाते हैं। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी पक्षों को एकजुट होकर काम करना होगा।
संबंधित जानकारी के लिए आप अमर उजाला की वेबसाइट पर जा सकते हैं[यहाँ](https://www.amarujala.com) और इसी के साथ अध्ययन करें[यहाँ](https://www.worldnews.com)।
यह बैठक न केवल रूस और यूक्रेन के ही लिए, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। सभी पक्षों को इस वार्ता में गंभीरता और सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ना होगा। इसलिए, सभी की नजरें इस बैठक पर टिकी हुई हैं कि क्या वास्तव में युद्ध विराम का कोई ठोस परिणाम निकलता है या नहीं।
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