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Thursday, January 22, 2026

मोहाली अदालत ने पादरी बजिंदर सिंह को दिया उम्रकैद की सजा, पीड़िता हुई बेहोश

इंडियामोहाली अदालत ने पादरी बजिंदर सिंह को दिया उम्रकैद की सजा, पीड़िता हुई बेहोश

बजिंदर सिंह को मिली सजा: दुष्कर्म मामले की सुनवाई में पीड़िता का दिल दहला देने वाला अनुभव

पंजाब के मोहाली जिले के जीरकपुर में एक महिला के साथ दुष्कर्म करने के मामले में पादरी बजिंदर सिंह को आज ताउम्र कैद की सजा सुनाई गई। मोहाली की अदालत ने इस फैसले के बाद पादरी को हिरासत में ले लिया है, और वह अब पटियाला जेल में बंद है। मामला तब सामने आया था जब पीड़िता ने पादरी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले को सुनकर पीड़िता बेहोश हो गई, जिससे यह साफ है कि यह मामला उसके लिए कितना गंभीर है।

इस केस में कुल सात आरोपी थे, जिनमें से अदालत ने पांच को बरी कर दिया, जबकि एक आरोपी सुच्चा सिंह की ट्रायल के दौरान मौत हो गई। बजिंदर सिंह, जो एक आध्यात्मिक नेता हैं और जिनके अनुयायी उन्हें ‘पापा जी’ कहकर बुलाते हैं, पर यह आरोप लगाया गया था कि उन्होंने महिला के साथ दुष्कर्म किया। अदालत के फैसले के बाद, संबंधित वकील ने जानकारी दी कि उन्हें सजा की अवधि से संतोष है।

पादरी बजिंदर सिंह पर लगे आरोपों में सबसे चिंताजनक यह है कि वह एक समाज में प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में कार्यरत था। जब किसी ऐसे व्यक्ति से इस प्रकार का अपराध होता है, तो समाज में आस्था और विश्वास को गहरा झटका लगता है। इस मामले में अदालती प्रक्रिया के चलते पीड़िता ने कई बार मानसिक और भावनात्मक संकट का सामना किया। कोर्ट के फैसले ने न केवल पीड़िता को न्याय दिलाया, बल्कि अन्य पीड़ित महिलाओं के लिए भी एक मिसाल कायम की है।

क्या हुआ कोर्ट में: सजा सुनते ही पीड़िता बेहोश

जब अदालत ने फैसले की घोषणा की, तो पीड़िता बेहोश हो गई। थोड़ी देर बाद होश में आने पर उसने कहा कि उसे अदालत पर पूरा भरोसा था। यह कहते हुए उसने यह भी बताया कि उसे विश्वास था कि न्याय का पहिया अंततः चलेगा। उसके इस विश्वास ने यह साबित कर दिया कि अदालत के इस फैसले से अब अन्य पीड़ित महिलाओं को भी प्रेरणा मिलेगी कि वे भी अपने अधिकारों के लिए खड़ी हों।

इस मामले में बजिंदर सिंह की गिरफ्तारी तब हुई थी जब वह इंग्लैंड के बर्मिंघम में आयोजित एक सेमिनार में भाग लेने जा रहा था। उसे दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया। इसी क्रम में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें बजिंदर सिंह को पीड़िता के साथ झगड़ते हुए देखा गया। यह वीडियो 14 फरवरी का था, जो 16 मार्च को सोशल मीडिया पर तेजी से फैला।

पादरी बजिंदर सिंह का प्रभाव और केस का सामाजिक प्रभाव

पादरी बजिंदर सिंह एक ऐसे हस्ती थे जिनका क्षेत्र में बड़ा नाम था। उनके समर्थकों द्वारा उन्हें धार्मिक नेता माना जाता था। ऐसे में जब उनके खिलाफ इस तरह का मामला आता है, तो यह सिर्फ उनके लिए ही नहीं बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ा धक्का है। इस मामले ने यह साबित किया है कि कोई भी व्यक्ति, भले ही उसकी सामाजिक स्थिति कितनी भी मजबूत क्यों न हो, कानून के दायरे से बाहर नहीं है।

जैसा कि वकील अनिल सागर ने बताया, “जब इस तरह का अपराध किसी धार्मिक नेता से किया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी सजा मिलनी चाहिए।” उन्होंने बताया कि इस निर्णय से महिलाओं को यह संदेश मिलेगा कि उन्हें अपने हक के लिए आवाज उठानी चाहिए और जो गलत है उसके खिलाफ खड़े होना चाहिए।

मोहाली की अदालत में इस संवेदनशील केस की सुनवाई में समाज के कई कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया और न्याय की मांग की। अदालत के फैसले ने यह सुनिश्चित किया कि न्याय की प्रक्रिया में कोई अंतर नहीं आता और जो भी दोषी हो उसे सजा जरूर मिलेगी।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया और समाज का संदेश

इस फैसले के बाद, पंजाब पुलिस ने भी इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। पुलिस ने कहा कि यह केस ऐसे अभियुक्तों के लिए चेतावनी है जो समाज में अपनी स्थिति का दुरुपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा, अन्य महिलाओं को भी यह संदेश गया है कि वे अपने मामलों को लेकर चुप न रहें और अगर उन्हें किसी प्रकार का उत्पीड़न झेलना पड़े, तो उन्हें आवाज उठानी चाहिए।

इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत में महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा और न्याय का रास्ता कभी बंद नहीं होगा। आज के फैसले ने एक नया अध्याय शुरू किया है, जिसमें महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं और जो भी उनके साथ गलत हो रहा है, उसके खिलाफ खड़ा होना सीख रही हैं।

इसके साथ ही, इस घटना ने मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए भी एक ज़िम्मेदारी बढ़ाई है कि वे ऐसे मामलों को उजागर करें और समाज में जागरूकता फैलाएं। यह कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो न केवल दुष्कर्म बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों का सामना कर रहे हैं, बल्कि यह भी साबित करती है कि समाज में बदलाव लाने की दिशा में एकजुट होकर लड़ना जरूरी है।

अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: पादरी बजिंदर सिंह का मामला और बीबीसी हिंदी में रिपोर्ट

इस प्रकार, मोहाली की अदालत का यह फैसला न केवल कानून के लिए एक नई मिसाल प्रस्तुत करता है, बल्कि यह समाज को यह भी बताता है कि किसी भी अपराध के खिलाफ संघर्ष करना आवश्यक है।

 

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