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Thursday, January 22, 2026

दंतेवाड़ा में माओवादी खतरे का बड़ा झटका: महिला नक्सली ढेर, आत्मसमर्पण की नई लहर

इंडियादंतेवाड़ा में माओवादी खतरे का बड़ा झटका: महिला नक्सली ढेर, आत्मसमर्पण की नई लहर

दंतेवाड़ा-बीजापुर बॉर्डर पर नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई

दंतेवाड़ा और बीजापुर के सीमावर्ती इलाके में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में एक महिला नक्सली को मार गिराया गया है। यह मुठभेड़ 31 मार्च 2025 को हुई, जब सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया था। इस मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने महिला नक्सली का शव बरामद किया, साथ ही एक इंसास राइफल भी मिली। सुरक्षाबलों ने इस अंतरिम कार्रवाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे से पहले की एक महत्वपूर्ण सफलता के तौर पर देखा है।

किसने, क्या, कहाँ, कब, क्यों और कैसे? 

मुठभेड़ में, दंतेवाड़ा के एसपी गौरव रॉय ने पुष्टि की कि यह मुठभेड़ सुबह नौ बजे हुई थी। सुरक्षा बलों ने माओवादी विरोधी अभियान के तहत इस कार्रवाई को अंजाम दिया। इस मुठभेड़ के समय सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच कई घंटों तक फायरिंग का आदान-प्रदान होता रहा। इस दौरान पुलिस ने महिला नक्सली का शव, इंसास राइफल, गोला-बारूद और अन्य दैनिक उपयोग की वस्त्रें बरामद की। विशेष रूप से, यह मुठभेड़ सुरक्षा बलों द्वारा नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे एक अभियान का हिस्सा था, जो कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे से पहले की गई थी।

इससे पहले, 30 मार्च 2025 को बीजापुर जिले में 50 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। इनमें से कई पर 68 लाख रुपये का इनाम था। यह आत्मसमर्पण छोटा भी नहीं है, क्योंकि इससे सुरक्षा बलों के नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को बल मिलता है।

पुलिस और नक्सलियों के बीच क्या हुआ?

दंतेवाड़ा-बीजापुर सीमा पर हुई मुठभेड़ में स्थिति इस प्रकार रही कि सुरक्षाबलों ने एक महिला नक्सली के शव को बरामद किया, जो नक्सलियों के प्रति सक्रियता दिखाने की कोशिश कर रहे थे। यह मुठभेड़ नक्सलियों के विरुद्ध चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन का एक हिस्सा थी। इस मुठभेड़ में एक इंसास राइफल और गोला बारूद भी बरामद हुआ।

सुरक्षा बलों ने बताया कि यह मुठभेड़ उन माओवादियों के खिलाफ हैं, जो अपने कार्यों को जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, इस मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों ने अपने अभियान को और तेज कर दिया है।

बस्तर क्षेत्र में आत्मसमर्पण का बड़ा आंकड़ा

इससे पहले, बीजापुर जिले में एक बड़ा आत्मसमर्पण हुआ था, जिसमें 50 नक्सलियों ने पुलिस और सीआरपीएफ के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इनमें से कई नक्सलियों पर बड़े पुरस्कार थे। जो लोग आत्मसमर्पण करने आए, उनमें से 14 पर कुल 68 लाख रुपये का इनाम था।

अधिकारी ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों का पुनर्वास किया जाएगा, जो कि सरकार की नीति के अनुसार होगा। इन नक्सलियों का आत्मसमर्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छत्तीसगढ़ दौरे से कुछ घंटे पहले हुआ था, जो विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखने वाले हैं।

सरकार की नीति और माओवादी गतिविधियाँ

छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में नक्सलवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। इसके तहत विभिन्न प्रकार के अभियान चलाए गए हैं, जिसमें सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ों के माध्यम से नक्सलियों का सफाया करने की कोशिश की है। हाल ही में, सुरक्षा बलों ने बताया कि 2024 में बस्तर क्षेत्र में कुल 792 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था, जिनमें से 134 मुठभेड़ों में मारे गए।

इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि नक्सलियों के खिलाफ अभियान में सुरक्षा बलों को सफलता मिल रही है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस साल दंतेवाड़ा में अलग-अलग मुठभेड़ों में 134 नक्सलियों को मारा गया है, और इनमें से 118 बस्तर संभाग में समाप्त हुए हैं।

नक्सली गतिविधियों की रोकथाम के उपाय

सरकार और सुरक्षा बलों द्वारा उठाए गए कदमों के परिणामस्वरूप, अब नक्सलियों की गतिविधियों में कमी आई है। यह स्थिति दर्शाती है कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई में लोग अब अपनी आवाज उठाने लगे हैं।

महिला नक्सली की मुठभेड़ और 50 नक्सलियों के आत्मसमर्पण ने नक्सलवाद के खिलाफ जारी इस अभियान को आगे बढ़ाया है।

जैसा कि[दैनिक भास्कर]की रिपोर्ट में बताया गया है, यह मुठभेड़ और आत्मसमर्पण सुरक्षा बलों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। इस संदर्भ में और अधिक जानकारी के लिए आप[यहाँ क्लिक करें](https://www.bhaskar.com).

सुरक्षा बलों की मजबूती और जनता की जागरूकता

इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि सुरक्षा बल न केवल माओवादियों के खिलाफ सफल हो रहे हैं, बल्कि जनता भी इस मुद्दे पर जागरूक हो रही है। नक्सलवाद के मुद्दे पर अधिक जानकारी के लिए, कृपया[आधिकारिक वेबसाइट](http://www.chhattisgarh.gov.in) पर जाएं।

यह नक्सल विरोधी अभियान न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि नक्सलवाद का अंत संभव है, जब हम सभी मिलकर इसके खिलाफ खड़े होते हैं।

 

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