लखनऊ: रेंट एग्रीमेंट की रजिस्ट्री होगी अनिवार्य, कानूनी रूप से मान्य होंगे शर्तें
उत्तर प्रदेश सरकार ने किरायेदारी और संपत्ति के सुरक्षा संबंधी कानूनों को सुदृढ़ करने हेतु एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब राज्य में सभी रेंट एग्रीमेंट की रजिस्ट्री करना अनिवार्य होगा। यह नई नीति किरायेदारों और मकान मालिकों के बीच विवादों को कम करने के उद्देश्य से लागू की जा रही है। रजिस्टर्ड एग्रीमेंट पर लिखी गई शर्तें अब कानूनी रूप से मान्य होंगी, जिसका मतलब है कि कोर्ट में दावे केवल रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के आधार पर ही किए जा सकेंगे।
क्या है रेंट एग्रीमेंट रजिस्ट्री का महत्व?
इसका मुख्य उद्देश्य है सरकारी तंत्र के माध्यम से संपत्ति की सुरक्षा को बढ़ावा देना और किरायेदारी से जुड़े विवादों को नियंत्रित करना। रेंट एग्रीमेंट की रजिस्ट्री से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी शर्तें, जो कि अनुबंध में लिखी गई हैं, उन्हें कानूनी मान्यता मिलेगी। स्टाम्प एवं पंजीकरण मंत्री रवीन्द्र जायसवाल के अनुसार, इससे न केवल किरायेदारों बल्कि मकान मालिकों का भी हित सुरक्षित रहेगा। इससे विवादों का समाधान कानूनी रूप से आसान होगा और सभी पार्टियां अपनी जिम्मेदारियों और अधिकारों को स्पष्ट रूप से समझ सकेंगी।
कब और कैसे होगी यह प्रक्रिया?
इस नई नीति के तहत, एक वर्ष से अधिक के रेंट एग्रीमेंट पर स्टाम्प शुल्क निर्धारित किया जाएगा, जिसमें न्यूनतम 500 रुपये से लेकर अधिकतम 20,000 रुपये तक का चार्ज होगा। इस शुल्क को सामान्य रखने की कोशिश की जाएगी ताकि यह प्रक्रिया सभी के लिए सुलभ हो सके। यह प्रस्ताव जल्द ही राज्य सरकार की कैबिनेट में पेश किया जाएगा।
मकान मालिकों और किरायेदारों दोनों के लिए फायदेमंद
रविंद्र जायसवाल ने यह भी कहा कि रेंट एग्रीमेंट की रजिस्ट्री होने से वर्तमान में किरायेदारी से जुड़े विवादों में कमी आएगी। इसमें प्रत्येक पक्ष के हित को ध्यान में रखते हुए कानून का पालन किया जाएगा। रजिस्टर्ड एग्रीमेंट की मदद से भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद को सुलझाने में आसानी होगी।
कानूनी दस्तावेज बनना है जरूरी
एक बार रेंट एग्रीमेंट पंजीकृत हो जाने पर, उसमें लिखी गई सभी शर्तें कानूनी मान्यता प्राप्त होंगी। इससे अदालत में चलने वाले मामलों में भी स्पष्टता आएगी। इस प्रकार की नीति अन्य राज्यों में भी अपनाई जा रही है, जहाँ रेंट एग्रीमेंट को एक कानूनी दस्तावेज माना जाने लगा है।
रेंट एग्रीमेंट के लिए पंजीकरण का महत्व
रेंट एग्रीमेंट की रजिस्ट्री से ना केवल मकान मालिक बल्कि किरायेदारों को भी सुरक्षा मिलेगी। दोनों पक्षों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे रजिस्टर्ड दस्तावेज को ही मान्यता दें। इससे रेंट एग्रीमेंट को एक कानूनी आधार पर स्थापित किया जा सकेगा, जो कि भविष्य में विवादों से निपटने में सहायक रहेगा।
मौजूदा स्थिति में क्या होगा?
वर्तमान में, बहुत से किरायेदार और मकान मालिक बिना रेंट एग्रीमेंट के ही अनुबंध करते हैं, जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है। इस नई नीति से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी एग्रीमेंट कानूनी रूप से सुरक्षित हों। इसके अलावा, इससे सरकारी रेकॉर्ड में भी सही जानकारी दर्ज होगी, जो संपत्ति के दावों के सही निपटान में सहायक होगी।
क्षेत्रीय खासियत और मुख्य बातें
यह निर्णय विशेष रूप से उन क्षेत्रों में अधिक महत्व रखता है जहाँ किरायेदारी की समस्या बहुत अधिक है। गांवों और छोटे शहरों में भी यह प्रक्रिया लागू की जाएगी, जिससे कि पूरे राज्य में एक समान कानून लागू हो सके। इस पहल को लेकर स्थानीय प्रशासन को भी जागरूक किया जाएगा ताकि वे रजिस्ट्री प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बना सकें।
इस रिपोर्ट के अनुसार, अब रेंट एग्रीमेंट की रजिस्ट्री से जुड़े सभी नियम और शर्तें जल्द ही लागू की जाएंगी। रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के लाभ के साथ-साथ, यह सुनिश्चित करेगा कि सभी कागजात और शर्तें क्रम में हों।
अधिक जानने के लिए पढ़ें:
-[रेंट एग्रीमेंट से जुड़ी जानकारी](https://www.hudis.gov.in/)
-[किरायेदार अधिकार और कानून](https://www.india.gov.in/)
इस नई नीति का असर उत्तर प्रदेश की संपत्ति और किरायेदारी बाजार पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा। अब समय आ गया है कि सभी पक्ष इस नए बदलाव को अपनाएँ और कानूनी सुरक्षा का लाभ उठाएँ।

