गुजरात में यूसीसी की तैयारी, समिति द्वारा मसौदा तैयार करने का कार्य शुरू
गुजरात में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में भी इसे लागू करने की तैयारी की जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस संबंध में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना देसाई करेंगी। समिति को 45 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है, जिसके आधार पर राज्य सरकार आगे की कार्रवाई करेगी।
गृह मंत्री हर्ष संघवी ने जानकारी देते हुए बताया कि समिति में सीएल मीना (सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी), आरसी कोडेकर (अधिवक्ता), दक्षेश ठाकर (पूर्व कुलपति) और गीता श्रॉफ (सामाजिक कार्यकर्ता) शामिल हैं। यह समिति न केवल मसौदा तैयार करेगी बल्कि यूसीसी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत शोध भी करेगी।
गुजरात की सरकार का यह निर्णय राज्य में नागरिक मामलों को एक समान रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यूसीसी का मुख्य उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी प्रावधानों को लागू करना है, जिससे सभी धर्मों एवं समुदायों के लोगों को समान अधिकार प्राप्त हो सकें।
यूसीसी का उद्देश्य और सामाजिक प्रभाव
समान नागरिक संहिता का उद्देश्य है, विभिन्न धर्मों और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोगों के लिए एक समान कानून का निर्माण करना। यह विशेष रूप से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति के मामलों में महत्वपूर्ण है। वर्तमान में भारत में विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून हैं, जो कभी-कभी विवादों का कारण बनते हैं।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बताया कि यूसीसी को लागू करने से न केवल कानून की एकरूपता बढ़ेगी, बल्कि यह समाज में समानता को भी बढ़ावा देगा। इससे विभिन्न समुदायों के बीच विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।
यूसीसी के मसौदे पर चर्चा करते हुए हर्ष संघवी ने कहा, “हमें सभी के हितों का ध्यान रखते हुए एक ऐसा कानून बनाना होगा, जो सभी नागरिकों के लिए न्यायपूर्ण और समान हो।” उन्होंने बताया कि समिति को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी समुदायों की चिंताओं और मुद्दों को ध्यान में रखा जाए।
समिति के कार्य और समय अवधि
गुजरात सरकार ने समिति को 45 दिनों का समय दिया है, जिसके दौरान उसे विभिन्न मुद्दों का अध्ययन करना होगा और एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इस रिपोर्ट में यूसीसी के विभिन्न पहलुओं, उसके कार्यान्वयन की प्रक्रिया और संभावित चुनौतियों का समाधान शामिल होगा।
समिति के अध्यक्ष रंजना देसाई का अनुभव इस कार्य में महत्वपूर्ण रहेगा। उन्होंने पहले भी कई संवैधानिक मुद्दों पर निर्णय दिए हैं और उनकी अध्यक्षता में समिति की दिशा और स्वरूप की उम्मीद की जा रही है।
गुजरात की इस पहल के बाद माना जा रहा है कि अन्य राज्यों में भी समान नागरिक संहिता को लेकर विचार विमर्श शुरू होगा।
समाज में यूसीसी का स्वागत और विरोध
जबकि कई लोग यूसीसी के पक्ष में हैं और इसे समाज में समानता का एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं, वहीं कुछ समूहों का कहना है कि इससे धार्मिक स्वतंत्रता पर खतरा हो सकता है। उन्होंने यह चिंता जताई है कि इस कानून के लागू होने के बाद धार्मिक मान्यताओं में हस्तक्षेप हो सकता है, जो संविधान में प्रदत्त स्वतंत्रता के खिलाफ है।
इसके अलावा, कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का मत है कि इस कानून को लागू करने से पहले विभिन्न समुदायों के विचारों को शामिल करना आवश्यक है। उन्हें लगता है कि बिना किसी संवाद के यूसीसी लागू करना विवादों को जन्म दे सकता है।
इस विषय पर चर्चा करते हुए गीता श्रॉफ ने कहा, “हमें सभी समुदायों की सुरक्षाओं का ध्यान रखना होगा और इस कानून को लागू करने में सहमति बनाना होगा। यह बेहद आवश्यक है कि किसी भी कानून को लागू करने से पहले समाज में उस पर व्यापक चर्चा हो।”
अंतिम विचार
गुजरात का यह कदम न केवल राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है। समान नागरिक संहिता को लागू करने से भारत में एक कानूनी व्यवस्था स्थापित होगी जो सभी नागरिकों को समान अवसर और अधिकार प्रदान करेगी।
गुजरात की सरकार की इस पहल का क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखने के लिए सभी की निगाहें इस समिति की रिपोर्ट पर होंगी।

