Saturday, March 21, 2026

वक्फ संशोधन विधेयक: जेपीसी अध्यक्ष ने विपक्ष के रवैये पर उठाए सवाल, असहमति नोट का किया जिक्र

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संसदीय समिति की बैठक में आज एक महत्वपूर्ण विकास हुआ, जहाँ वक्फ संशोधन विधेयक पर 428 पन्नों की रिपोर्ट को लेकर विभिन्न पक्षों के दृष्टिकोण पर चर्चा की गई। जेपीसी अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने विपक्ष पर एक विशेष एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया और कहा कि इस रिपोर्ट में 281 पन्नों पर असहमति नोट पेश किया गया है।

क्या है मामला?

संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने आज अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करने की योजना बनाई है, जहाँ वक्फ (संशोधन) विधेयक पर चर्चा की जाएगी। जेपीसी अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा कि विपक्ष ने इस विधेयक को लेकर जिस तरह से अपनी बात रखी है, वो स्पष्ट रूप से एक एजेंडे का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी पक्षकारों की राय पर विचार करने के बाद ही यह रिपोर्ट तैयार की गई थी।

कौन है इसमें शामिल?

जेपीसी की बैठकों में विभिन्न हितधारकों जैसे कि वक्फ बोर्ड, अल्पसंख्यक आयोग और इस्लामी विद्वानों को भी शामिल किया गया था। यह सब इस बात की पुष्टि करता है कि समिति ने सभी पक्षों की बातों पर ध्यान दिया और फिर अंतिम रिपोर्ट तैयार की।

कब की है यह रिपोर्ट?

यह रिपोर्ट 30 जनवरी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपी गई थी। इससे पहले यह विधेयक 8 अगस्त, 2024 को पेश किया गया था।

क्यों है विवादित?

विपक्ष ने इस विधेयक को असंवैधानिक करार दिया और आरोप लगाया कि यह वक्फ बोर्डों को नुकसान पहुंचाएगा। विपक्ष ने इस बात पर चिंता जताई है कि यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो इससे वक्फ संपत्तियों का नियंत्रण सरकार के हाथ में चले जाएगा, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय को गंभीर नुकसान होगा।

कैसे हुई चर्चा?

जेपीसी अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने बताया कि उन्होंने सभी बिंदुओं पर विचार किया और सभी संशोधनों को बहुमत के आधार पर स्वीकार किया गया। हालांकि, विपक्ष ने 281 पन्नों पर असहमति जताते हुए नोट प्रस्तुत किया है। अब सांसदों को रिपोर्ट पेश किए जाने पर इन सभी असहमतियों का जिक्र किया जाएगा।

जेपीसी अध्यक्ष का बयान

जेपीसी अध्यक्ष ने यह भी कहा कि विपक्ष का आरोप कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों को छीनने वाला है, पूरी तरह से गलत है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद ही यह रिपोर्ट तैयार की गई है और इसमें सभी के दृष्टिकोण को ध्यान में रखा गया है।

अंततः क्या होगा?

अब देखना यह होगा कि जब यह रिपोर्ट संसद में पेश की जाएगी, तो विपक्ष का क्या रुख होगा और क्या इसे पारित किया जाएगा या नहीं। जेपीसी अध्यक्ष ने कहा कि जब स्पीकर उचित समय देंगे, तब इसे सदन में पेश किया जाएगा।

दक्षिण एशिया में वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। इसके अंतर्गत कई धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखना आवश्यक है।

उम्मीद है कि यह संशोधन विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में एक नई दिशा प्रदान करेगा और इससे संबंधित समस्याओं का समाधान होगा।

अधिक जानकारी के लिए देखें:
1.[संविधान और अल्पसंख्यक अधिकार](https://www.legalserviceindia.com/legal/article-1449-constitution-and-minority-rights.html)
2.[वक्फ संपत्तियों के मुद्दे पर विशेषज्ञ की राय](https://www.thehindu.com/news/national/wakf-properties-issue-expert-opinion/article50439667.ece)

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