13.1 C
Delhi
Thursday, January 22, 2026

भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त नवीन चावला का निधन, राजनीति में छोडी एक अमिट छाप

इंडियाभारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त नवीन चावला का निधन, राजनीति में छोडी एक अमिट छाप

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त नवीन चावला का निधन शनिवार को हुआ, जो कि 79 वर्ष के थे। उन्हें मस्तिष्क सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन की सूचना पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने दी। चावला की कमी भारतीय चुनाव प्रणाली में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगी, जहां उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।

कौन, क्या, कहाँ, कब, क्यों और कैसे?

भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) नवीन चावला ने भारतीय चुनाव आयोग के संचालन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे 2005 से 2009 तक चुनाव आयुक्त रहे और फिर 2009 से 2010 तक मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्य किया। उनकी उपलब्धियों और विवादों का एक पूरा इतिहास है। चुनाव आयोग के एक पदाधिकारी के अनुसार, चावला का निधन अपोलो अस्पताल में हुआ, जहाँ उन्हें हाल ही में मस्तिष्क सर्जरी के लिए भर्ती कराया गया था।

उनके निधन की पुष्टि एसवाई कुरैशी ने की, जिन्होंने कहा कि वह चावला से करीब 10 दिन पहले मिले थे। उस समय चावला ने उन्हें अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में बताया था और कहा था कि वह सर्जरी के बाद ठीक हो जाएंगे।

चावला का कार्यकाल विवादों से भरा रहा, जैसे कि तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए आरोप जिसमें कहा गया कि उन्होंने चुनाव संबंधी कार्य में भेदभाव किया। इस विवाद ने उन्हें राष्ट्रपति द्वारा उनके पद से हटाने की सिफारिश करने पर मजबूर किया।

चावला का योगदान और विरासत

चावला को राजनीति में उनके कार्यकाल के लिए जाना जाता है, जहाँ उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे चुनाव आयोग में अपनी सख्त नीतियों और कार्यशैली के लिए प्रसिद्ध थे। उनके कार्यकाल के दौरान, चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को बढ़ावा मिला और उन्होंने मतदाता जागरूकता अभियानों पर जोर दिया।

चावला का निधन भारत के लिए एक बड़ा नुकसान है, क्योंकि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान चुनाव आयोग को एक नई दिशा देने का प्रयास किया। उनके निधन पर एसवाई कुरैशी ने अपने एक ट्वीट में कहा कि, “भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त नवीन चावला के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। उनकी आत्मा को शांति मिले।”

 

नवीन चावला का योगदान चुनावी प्रणाली में याद किया जाएगा। उनके निधन से न केवल उनके परिवार और मित्र बल्कि पूरे राजनीतिक जगत को गहरा दुख हुआ है। भारतीय लोकतंत्र को उनकी कार्यशैली और दृष्टिकोण से प्रेरणा मिली है।

चावला ने अपने करियर में कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनकी निष्ठा और प्रतिबद्धता ने उन्हें एक आदर्श प्रशासक बनाया, जो कि आज के युग में बहुत मायने रखता है।

विवाद और चर्चा

चावला के कार्यकाल को लेकर कुछ विवाद रहे हैं। 2006 में, एन गोपालस्वामी ने चावला पर आरोप लगाया कि उन्होंने चुनावों के संचालन में भेदभाव किया। इस मामले ने तब राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा जोड़ी थी। हालांकि, चावला ने हमेशा अपने काम को निष्पक्षता से करने की कोशिश की।

कुछ लोग इस विवाद को उनकी कार्यशैली और निर्णय लेने की क्षमता पर एक दाग मानते हैं, लेकिन यह भी सच है कि उन्होंने भारतीय चुनाव प्रणाली को मजबूत करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया।

समुदाय और परिवार का दुःख

नवीन चावला का निधन उनके परिवार, मित्रों, और राजनीतिक समुदाय के लिए एक बड़ी क्षति है। उनके उत्तराधिकारी और साथी भी इस दुखद घटना को लेकर भावुक हैं। उनकी कमी भारतीय राजनीति और चुनावों में लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

समापन शब्द

चावला का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी सोच, दृष्टिकोण और कार्यशैली ने उन्हें एक सशक्त नेता और प्रशासक बनाया। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। भारत के लोकतंत्र में उनकी भूमिका को भुलाया नहीं जा सकेगा।

Check out our other content

Check out other tags:

Most Popular Articles