Sunday, March 22, 2026

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: निशिकांत दुबे और मनोज तिवारी के खिलाफ FIR रद्द करने का आदेश बरकरार

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निशिकांत दुबे-मनोज तिवारी मामले में झारखंड उच्च न्यायालय का फैसला मान्य, सुप्रीम कोर्ट की पुष्टि

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए भाजपा सांसदों निशिकांत दुबे और मनोज तिवारी के खिलाफ प्राथमिकी रद्द करने के उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा है। यह फैसला उस याचिका पर आया है, जिसमें झारखंड सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी। यह प्राथमिकी 2022 में उस समय दर्ज की गई थी जब आरोप ये लगे थे कि दोनों सांसदों ने देवघर हवाई अड्डे से सूर्यास्त के बाद उड़ान भरने के लिए हवाई यातायात नियंत्रण पर दबाव डाला था।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति एएस ओका और जस्टिस मनमोहन शामिल थे, ने कहा कि राज्य सरकार को जांच के दौरान एकत्र की गई सामग्री को चार सप्ताह के भीतर नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के अधिकृत अधिकारी को भेजने की अनुमति दी गई है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि डीजीसीए का सक्षम प्राधिकारी यह तय करेगा कि क्या अधिनियम के तहत कोई शिकायत दर्ज करने की आवश्यकता है या नहीं।

इस फैसले से साफ होता है कि सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय को सही ठहराया है, जिसमें कहा गया था कि प्राथमिकी दर्ज करने से पहले लोकसभा सचिवालय से कोई पूर्व मंजूरी नहीं ली गई थी, जैसा कि विमानन (संशोधन) अधिनियम, 2020 में निर्धारित है।

स्थिति की संक्षिप्त जानकारी

इस महत्वपूर्ण मामले में, झारखंड उच्च न्यायालय ने 13 मार्च, 2023 को अपने आदेश में कहा था कि सांसदों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द किया जाए। उच्च न्यायालय का यह निर्णय उस समय आया था जब यह आरोप लगा था कि दोनों सांसदों ने देवघर हवाई अड्डे पर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करते हुए अपने विमान को उड़ान भरने की अनुमति देने के लिए दबाव डाला।

न्यायालय ने यह भी कहा था कि राज्य सरकार की याचिका पर फैसला सुनाते समय उच्च न्यायालय ने ध्यान दिया था कि विमानन नियमों के अंतर्गत पूर्व मंजूरी आवश्यक थी। अब, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अपनी मुहर लगाते हुए झारखंड सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है।

कोर्ट के फैसले की पृष्ठभूमि

सुप्रीम कोर्ट ने 18 दिसंबर 2024 को झारखंड उच्च न्यायालय के फैसले पर विचार करते समय अपना निर्णय सुरक्षित रखा था। यह मामला देवघर के कुंडा थाने में दुबे और तिवारी सहित नौ लोगों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से संबंधित था। अधिकारियों के अनुसार, यह घटनाक्रम तब हुआ जब दोनों सांसदों ने यह सुनिश्चित करने के लिए एटीसी कर्मियों पर दबाव डाला था कि उनका निजी विमान निर्धारित समय के बाद भी उड़ान भर सके।

अब यह मामला नागर विमानन महानिदेशालय के पास जाएगा, जहां यह तय किया जाएगा कि क्या शिकायत दर्ज करने की आवश्यकता है या नहीं। यह एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह संकेत करता है कि जांच अभी खत्म नहीं हुई है और यदि आवश्यक हुआ तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।

विश्लेषण और प्रभाव

उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया है कि वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाए। यह एक महत्वपूर्ण उदाहरण है कि कैसे संविधान और कानून के प्रति निष्ठा बनाए रखने की आवश्यकता है। इसके साथ ही, यह भी दर्शाता है कि राजनीतिक दबाव के बावजूद न्यायालय हमेशा निष्पक्ष रूप से अपना काम करेगा।

भाजपा सांसदों के खिलाफ इस तरह के आरोपों के बाद, उनके लिए राजनीतिक स्थिति बचाना मुश्किल हो सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया गया है। इससे उनकी सार्वजनिक छवि पर भी असर पड़ सकता है और आगामी चुनावों में यह एक मुद्दा बन सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से न केवल झारखंड सरकार को झटका लगा है, बल्कि यह अन्य राज्यों के लिए भी एक संदेश है कि वे राजनीतिक दबाव में आने के बजाय विधि-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सही प्रक्रिया का पालन करें।

 

इससे पहले भी कई मामलों में राजनीतिक हस्तियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जहां उनके द्वारा किए गए अभियोगों पर उच्च न्यायालयों ने संज्ञान लिया है। यह ध्यान रखना आवश्यक होगा कि भविष्य में इस प्रकार के मामलों में न्यायालय किस तरह की कार्रवाई करेगा और क्या नई नीतियों का निर्माण होगा।

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