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Thursday, January 22, 2026

लालू यादव के करीबी विधायक आलोक मेहता के 16 ठिकानों पर ईडी का छापा, जांच में सामने आए गंभीर आरोप

इंडियालालू यादव के करीबी विधायक आलोक मेहता के 16 ठिकानों पर ईडी का छापा, जांच में सामने आए गंभीर आरोप

बिहार: मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के करीबी सहयोगी और राजद विधायक आलोक मेहता के 16 ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापेमारी की है। इस छापेमारी का उद्देश्य आलोक मेहता के खिलाफ बैंक लोन से संबंधित गड़बड़ियों की जांच करना है। ईडी की टीम ने पटना, समस्तीपुर, दिल्ली और उत्तर प्रदेश सहित कई स्थानों पर एक साथ छापे मारे। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब बिहार की सियासत में हलचल जारी है।

किसके खिलाफ कार्रवाई हुई?

ईडी द्वारा की गई छापेमारी मुख्य रूप से आलोक मेहता के ऊपर आरोपों की पृष्ठभूमि में की गई है। आलोक मेहता ने बैंक लोन से जुड़े मामलों में कथित गड़बड़ियों की बात सामने आई है। इस छापे में ईडी ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से मिली जानकारी के आधार पर कार्रवाई की, जिसमें आलोक मेहता की वित्तीय गतिविधियों की जांच की जा रही है।

क्या आरोप हैं?

आलोक मेहता पर आरोप है कि उन्होंने बैंकों से लिए गए लोन का दुरुपयोग किया है। उनके खिलाफ जांच में पता चला है कि उन्होंने कुछ वित्तीय मामलों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ की हैं। ईडी की कार्रवाई इस बात को दर्शाती है कि वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ सरकार कितनी गंभीर है। आलोक मेहता के करीबी सहयोगी और परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ की जा सकती है।

कहाँ-कहाँ पर की गई कार्रवाई?

ईडी की छापेमारी की गई स्थानों में आलोक मेहता के आवास और कार्यालय शामिल हैं। पटना में उनके आवास के अलावा, समस्तीपुर और दिल्ली के कई ठिकानों पर भी छापे मारे गए हैं। इस दौरान ईडी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए हैं, जिनसे उनकी वित्तीय गतिविधियों की जानकारी प्राप्त हो सकेगी।

कब की गई कार्रवाई?

यह छापेमारी 10 जनवरी 2025 को सुबह के समय की गई। ईडी की अलग-अलग टीमों ने एक साथ कार्यवाही करते हुए सभी ठिकानों पर पहुंचकर जांच शुरू की। जाँच की यह गति आलोक मेहता के खिलाफ चल रही कई मामलों की गरिमा को दर्शाती है।

क्यों हुई यह छापेमारी?

इस छापेमारी का मुख्य उद्देश्य आलोक मेहता की वित्तीय गतिविधियों का पता लगाना और यह सुनिश्चित करना है कि क्या उन्होंने बैंक लोन के दुरुपयोग में कोई भूमिका निभाई है। ईडी इस मामले में गंभीरता से आगे बढ़ते हुए सभी संभावित सबूतों को इकट्ठा करना चाहती है।

यह सब कैसे हुआ?

ईडी ने अपनी जाँच के दौरान बैंकों के डेटा और अन्य वित्तीय रिपोर्टों का अध्ययन किया, जिससे उन्हें आलोक मेहता के खिलाफ ठोस सबूत मिले। इसके बाद, उन्हें सबूतों के आधार पर छापेमारी करने का निर्णय लिया गया।

आगे की क्या योजना है?

ईडी द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद आलोक मेहता को उन्हें प्राप्त आरोपों का सामना करना होगा। उनके खिलाफ की गई छापेमारी के बाद, संभावित रूप से उनकी सम्पत्ति की भी जांच की जा सकती है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो आलोक मेहता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

क्या है सियासी माहौल?

बिहार की राजनीति में यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ पहले से ही कई आरोप चल रहे हैं। इस प्रकार की कार्रवाई सियासी हलचल को बढ़ा सकती है और इसमें अन्य नेताओं का नाम भी जुड़ सकता है। राजद पार्टी के अन्य सदस्य भी इस घटना के बाद संभावित रूप से अपने कदम आगे बढ़ाने को मजबूर हो सकते हैं।

यदि आप इस मामले से संबंधित अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप[न्यूज18](https://www.news18.com) और[टाइम्स ऑफ़ इंडिया](https://www.timesofindia.indiatimes.com) पर भी देख सकते हैं।

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