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Thursday, January 22, 2026

चंडीगढ़ में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई भिड़ंत, कौमी इंसाफ मोर्चा ने उठाई बंदी सिखों की रिहाई की आवाज

इंडियाचंडीगढ़ में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई भिड़ंत, कौमी इंसाफ मोर्चा ने उठाई बंदी सिखों की रिहाई की आवाज

चंडीगढ़ में भड़के बवाल: पुलिस से भिड़े कौमी इंसाफ मोर्चा के प्रदर्शनकारी, लाठियों और तलवारों का हुआ इस्तेमाल

चंडीगढ़/मोहाली: चंडीगढ़ में मंगलवार को कौमी इंसाफ मोर्चा के प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई भिड़ंत ने शहर में तनाव का माहौल पैदा कर दिया। यह घटना उस समय हुई जब प्रदर्शनकारी सीएम आवास की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे, जबकि पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए लाठियां चलाई। इस टकराव में कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

क्या हुआ, क्यों हुआ, और किसके बीच हुआ?

इस घटना का मुख्य कारण कौमी इंसाफ मोर्चा का प्रदर्शन था, जिसमें वे उन बंदी सिखों की रिहाई की मांग कर रहे थे, जो अपनी सजा पूरी करने के बाद भी जेलों में बंद हैं। प्रदर्शनकारी चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर 7 जनवरी से धरना दे रहे थे और मंगलवार को उनका ऐलान था कि वे सीएम भगवंत मान के आवास का घेराव करेंगे। चंडीगढ़ पुलिस ने इस प्रदर्शन को देखते हुए पहले से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी थी।

यह घटना उस समय भड़की जब प्रदर्शनकारी मोहाली के वाईपीएस चौक पर सुबह से इकट्ठा होना शुरू हुए। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेड्स लगाए थे, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को चकमा देते हुए हाईवे पर पहुंचकर धरना देने का निर्णय लिया।

केंद्र का क्या कहना है?

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस स्थिति में चंडीगढ़ पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को किसी भी तरह से सीएम आवास की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पूरी कोशिश की। लेकिन प्रदर्शनकारी पुलिस की नजरों से बचते हुए सड़क पर धरना देने लगे, जिसके कारण वहां की ट्रैफिक व्यवस्था बाधित हो गई।

भीड़ में शामिल निहंगों ने किया पुलिस पर हमला

इस प्रदर्शन के दौरान निहंगों का एक समूह भी प्रदर्शन में शामिल हो गया, जिन्होंने पुलिस पर तलवारों और कृपाणों से हमला किया। इस हमले में पुलिस इंस्पेक्टर जयवीर राणा और एक एएसआई घायल हो गए। सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। घटना स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, लेकिन हालात काबू से बाहर हो गए।

पुलिस की प्रतिक्रिया:

पुलिस ने स्थिति पर काबू पाने के लिए अपनी कार्रवाई तेज कर दी। कई प्रदर्शनकारियों को मौके से हिरासत में लिया गया। इसके साथ ही, घायलों को जीएमएसएच-16 में भर्ती कराया गया।

सीएम आवास की ओर बढ़ने वाले प्रदर्शनकारियों ने उठाई और भी मांगें

कौमी इंसाफ मोर्चा ने केवल बंदी सिखों की रिहाई की नहीं, बल्कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों में कड़ी कार्रवाई की भी मांग की। मोर्चा के सदस्यों का कहना है कि यह प्रदर्शन केवल सिखों के अधिकारों की रक्षा के लिए किया गया है।

पुलिस की तैयारी और रणनीति

पुलिस ने पहले से ही तैयारी कर रखी थी, जिसमें पांच लेयर सुरक्षा लगाई गई थी, जिससे प्रदर्शनकारी चंडीगढ़ में प्रवेश न कर सकें। लेकिन प्रदर्शनकारियों ने रणनीति बदली और धरनास्थल के पीछे से निकले।

बंदियों की रिहाई पर राजनीतिक चर्चा

जेलों में बंदी सिखों की रिहाई का मुद्दा एक ऐसा विषय है जो लंबे समय से चल रहा है। इसे लेकर राजनीतिक दलों में भी चर्चा हो रही है। कई संगठनों ने इसके समर्थन में आवाज उठाई है। कौमी इंसाफ मोर्चा के कार्यकर्ता इसे एक महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हैं।

धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से स्थिति

इस घटना ने धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी सवाल उठाए हैं। सिख समुदाय में इस तरह के प्रदर्शनों को अक्सर धार्मिक भावनाओं से जोड़ा जाता है, जो कई बार हिंसक रूप ले लेती हैं।

संकट की इस घड़ी में

चंडीगढ़ में प्रदर्शनकारी और पुलिस के बीच का यह टकराव एक नया मोड़ ले चुका है। इसके पीछे बंदी सिखों के मुद्दे की गंभीरता को उजागर करता है। इसे लेकर सरकार को कदम उठाने की आवश्यकता है।

चंडीगढ़ के सीएम आवास के पास हुई यह घटना राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है और इससे यह स्पष्ट होता है कि स्थिति कितनी संवेदनशील है। ऐसी घटनाएं न केवल कानून व्यवस्था को चुनौती देती हैं, बल्कि समाज में भी तनाव पैदा करती हैं।

समाप्ति की दिशा में कदम

चंडीगढ़ में इस घटना के बाद, प्रशासन को अब अपने कदम उठाने की आवश्यकता होगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। प्रदर्शनकारियों की मांगों का उचित समाधान निकालना जरूरी है।

 

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