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Thursday, January 22, 2026

बिहार में महागठबंधन का बड़ा प्रदर्शन: बीपीएससी परीक्षा रद्द करने की उठी मांग

इंडियाबिहार में महागठबंधन का बड़ा प्रदर्शन: बीपीएससी परीक्षा रद्द करने की उठी मांग

बिहार में महागठबंधन का अनोखा प्रदर्शन, ट्रेनें रोकी गईं और सड़कें जाम हुईं

बिहार में महागठबंधन के नेताओं द्वारा आयोजित एक बड़ा प्रदर्शन बीपीएससी की 70वीं प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर चल रहा है। प्रदर्शनकारी राजद और वाम दल के नेता हैं, जिन्होंने दरभंगा, आरा और समस्तीपुर में ट्रेनें रोकी हैं और सड़कें जाम कर दी हैं। इस विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य न केवल परीक्षा को रद्द कराना है, बल्कि छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग करना है।

लेखक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह प्रदर्शन बिहार में राजनीतिक और सामाजिक असंतोष का एक बड़ा उदाहरण है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, नीतीश सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है और आयोग की परीक्षाओं में धांधली हो रही है।

प्रदर्शन का कारण, स्थान और समय

प्रदर्शन की शुरुआत बिहार के कई प्रमुख स्थानों पर हुई है, जैसे कि दरभंगा, आरा और समस्तीपुर। प्रदर्शनकारी सुबह से ही सड़कें और रेलवे ट्रैक जाम कर रहे हैं। छात्रों और नेताओं ने मिलकर नीतीश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी आवाज को उठाया है। इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण बीपीएससी की 70वीं प्रारंभिक परीक्षा है, जिसे छात्रों और विपक्षी नेताओं के अनुसार, निराधार तरीके से संचालित किया गया है।

प्रदर्शन में भाग लेते हुए, आइसा के जिला सचिव सुनील कुमार सिंह ने बताया कि पटना में पुलिस द्वारा छात्रों पर की गई लाठीचार्ज की घटना के बाद यह आंदोलन बढ़ा है। उन्होंने कहा कि छात्रों पर बर्बरता की गई, जिनकी मांग है कि सरकार इस परीक्षा को तुरंत रद्द करे और नई परीक्षा की घोषणा करे।

प्रशांत किशोर का सख्त बयान

प्रशांत किशोर, जो जनसुराज के सूत्रधार हैं, ने भी इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने पटना में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि नीतीश सरकार ने आधे से ज्यादा पदों को पहले ही बेच दिया है, जिससे छात्रों के हितों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने यह चेतावनी दी कि अगर पुलिस ने छात्रों पर फिर से लाठियां चलाईं, तो वह मानवाधिकार आयोग और अदालत में जाकर इसकी शिकायत करेंगे।

प्रशांत किशोर ने पटना के सिटी एसपी को भी चेतावनी दी है, जिसमें उन्होंने कहा कि पुलिस बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न करें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बीपीएससी को चलाने वाले अधिकारियों का चरित्र ठीक नहीं है, तो उनकी जांच की जानी चाहिए।

समस्तीपुर में बवाल और यातायात प्रभावित

समस्तीपुर में, छात्र संगठनों ने ओवर ब्रिज के पास समस्तीपुर-पटना मार्ग को जाम कर दिया। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यात्रियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे नीतीश सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और उनकी मांग है कि बीपीएससी परीक्षा को रद्द किया जाए।

इस बीच, दरभंगा में प्रदर्शनकारियों ने रेलवे ट्रैक को भी जाम कर दिया और दिल्ली जाने वाली बिहार सम्पर्क क्रांति सुपर फास्ट ट्रेन को रोक दिया। यह प्रदर्शन नीतीश सरकार के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश देता है कि छात्र और नेता एकजुट हैं और वे अपनी मांगों को लेकर गंभीर हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति

इस पूरे घटनाक्रम पर अब तक बिहार सरकार की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों के नेता लगातार कार्यवाही की मांग कर रहे हैं और राज्य के उच्च अधिकारियों से समय पर कार्रवाई की उम्मीद रख रहे हैं।

प्रदर्शन के दौरान, कई छात्र घायल भी हुए हैं, जिससे स्थिति और तानाबाना जटिल हो गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मसले को कैसे सुलझाने की कोशिश करती है और क्या वह छात्र समुदाय की मांगों पर ध्यान देगी या नहीं।

बिहार में छात्रों का विरोध प्रदर्शन: एक नया राजनीतिक मोड़

बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में यह आंदोलन न केवल छात्रों की समस्याओं को उजागर करता है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे राजनीतिक दल भी छात्रों के हितों के साथ खड़े हो रहे हैं। यह संभव है कि आने वाले चुनावों में इस आंदोलन का असर देखने को मिले, क्योंकि युवा मतदाता हमेशा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस प्रदर्शन के दौरान महागठबंधन के नेताओं की एकजुटता यह दर्शाती है कि बिहार की राजनीति में कितनी जटिलताएं हैं और युवाओं की आवाज़ सुनने के लिए राजनीतिक दल किस हद तक तैयार हैं। इस समय, छात्रों को अपने अधिकारों के लिए एकजुट होने और अपनी आवाज को उठाने की आवश्यकता है।

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