Monday, March 23, 2026

संभल में 150 साल पुरानी तीन मंजिला बावड़ी की खोज; चार कमरों और सुरंग का हुआ खुलासा

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संभल जिले के चंदौसी स्थित लक्ष्मणगंज मोहल्ले में बांके बिहारी मंदिर के निकट एक बेहद पुरानी बावड़ी की खोज की गई है। यह बावड़ी लगभग 150 साल पुरानी बताई जा रही है और इसमें चार कमरे और एक सुरंग मिलने से क्षेत्र में हलचल मची हुई है। अब इस बावड़ी की खुदाई के काम में प्रशासन के अधिकारी सक्रिय हो गए हैं।

खुदाई का काम रविवार को शुरू हुआ, जब प्रशासन और नगर पालिका की टीम ने वहां पहुंचकर इस खोदाई को आगे बढ़ाया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस बावड़ी का निर्माण बिलारी के राजा के नाना के समय में हुआ था, और यह स्थानीय ऐतिहासिक महत्व की प्रतीक है। डीएम राजेंद्र पैंसिया और एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने खुदाई स्थल का दौरा करते हुए इस बावड़ी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

खुदाई में मिली बावड़ी के ऐतिहासिक तथ्यों की पड़ताल

खुदाई के दौरान अधिकारियों ने बताया कि बावड़ी की संरचना बेहद अद्भुत है। तीन मंजिलें होने के साथ ही दो मंजिलें संगमरमर की बनी हैं और एक मंजिल ईंटों से निर्मित है। इस बावड़ी में कूप भी हैं और चार कमरों के साथ सुरंग जैसी संरचना भी देखने को मिली है। इसके साथ ही, डीएम ने स्थानीय पुरातत्व निदेशालय से सर्वे कराने का प्रस्ताव दिया है ताकि इस बावड़ी के ऐतिहासिक महत्व का सही मूल्यांकन किया जा सके।

खुदाई की प्रक्रिया और स्थानीय प्रशासन की भूमिका

खुदाई का कार्य प्रशासन द्वारा आयोजित किया गया था। खुदाई के लिए आवश्यक टीमों को तैनात किया गया था। डीएम ने कहा कि समुचित जांच के बाद यदि जरूरत पड़ी तो पुरातत्व विभाग को भी इस बावड़ी की जांच के लिए बुलाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर और बावड़ी के जीर्णोद्धार का कार्य किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को वहां पूजा-अर्चना करने का अवसर मिल सके।

उल्लेखनीय है कि इस बावड़ी की जानकारी वर्ष 2023 में दी गई थी, जब इस क्षेत्र में एक पुरातात्विक खुदाई की गई थी। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस बावड़ी में धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों पहलू जुड़े हुए हैं। इसके साथ ही, यह भी उम्मीद की जा रही है कि इस ऐतिहासिक स्थल की खोज से स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

खुदाई के दौरान जुटी भीड़ और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

खुदाई के स्थल पर स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई है। लोग इस बावड़ी और उसके भीतर मिली संरचनाओं को देखकर आश्चर्यचकित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह बावड़ी उनकी सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी क्षेत्र में बांके बिहारी मंदिर की खोज के बाद अब इस बावड़ी के मिलने से यहां धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में वृद्धि की संभावना बनती है।

स्थानीय निवासी कौशल किशोर ने बताया कि उन्होंने पहले ही मामले को संज्ञान में लेते हुए डीएम को पत्र लिखा था, जिसमें बावड़ी के बारे में जानकारी दी गई थी। इस पत्र के बाद प्रशासन ने खुदाई का कार्य शुरू किया।

बावड़ी की खंडहरनुमा स्थिति और उसका संरक्षण

खुदाई के दौरान मिले बावड़ी की खंडहरनुमा स्थिति ने स्थानीय प्रशासन को चिंतित किया है। डीएम ने बताया कि इस बावड़ी के संरक्षण के लिए अतिक्रमण को हटाने और जीर्णोद्धार की योजना बनाई जाएगी। इस बावड़ी का ऐतिहासिक महत्व केवल इसके निर्माण से ही नहीं, बल्कि इसे देखने आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

भविष्य की योजना और संभावित पुरातात्विक अध्ययन

अधिकारी ने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हुआ, तो पुरातात्विक अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों को बुलाने की योजना बनाई जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि इस बावड़ी के ऐतिहासिक महत्व को सही तरीके से संजोया जा सके। यह कदम न केवल स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देगा बल्कि भारतीय संस्कृति के प्रति भी जागरूकता फैलाएगा।

इस बावड़ी की खोज से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू है कि यह क्षेत्र धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से बहुत समृद्ध है। पिछले कुछ वर्षों में, संभल ज़िले में इस तरह की कई पुरातात्विक खोजें की गई हैं, जो कि यहां की ऐतिहासिक धरोहर को उजागर करने में सहायक सिद्ध हो रही हैं।

अंत में, संभल के इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण की आवश्यकता

संभल के इस ऐतिहासिक स्थल की खोज ने न केवल स्थानीय लोगों में उत्साह का संचार किया है, बल्कि यह भारतीय इतिहास के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक माध्यम भी बन सकता है। स्थानीय प्रशासन के प्रयासों के चलते, यह संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही इस बावड़ी का उचित संरक्षण किया जाएगा। इससे न केवल इसे देखने वाले श्रद्धालुओं को लाभ होगा, बल्कि यह भारतीय संस्कृति के लिए एक महत्वपूर्ण धरोहर के रूप में स्थापित होगा।

 

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