भारत में पिछले तीन वर्षों में (2021 से 2023) वन और वृक्ष आवरण में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। भारत राज्य वन रिपोर्ट (ISFR) 2023 के अनुसार, देश का कुल वन और वृक्ष आवरण 1,445 वर्ग किमी बढ़कर अब 25.17 प्रतिशत हो गया है, जो भारत के भौगोलिक क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मध्य प्रदेश ने इस क्षेत्र में सबसे बड़ी प्रगति की है।
क्या है वन आवरण?
वन आवरण उस सभी भूमि को संदर्भित करता है, जिस पर वृक्षों की छांव की घनता 10 प्रतिशत से अधिक हो और यह एक हेक्टेयर या उससे अधिक क्षेत्र में फैला हो। यह प्राकृतिक वन या मानव निर्मित बागों और शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में वृक्षों के टुकड़ों को शामिल करता है। इसके विपरीत, वृक्ष आवरण उन वृक्षों के टुकड़ों और एकल वृक्षों को संदर्भित करता है जो आरक्षित वन क्षेत्र (RFA) के बाहर एक हेक्टेयर से कम क्षेत्र में होते हैं।
कौन सा राज्य बना सबसे आगे?
रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य प्रदेश देश में कुल वन और वृक्ष आवरण में सबसे आगे रहा है। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश और महाराष्ट्र का स्थान है। छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान ने भी वन और वृक्ष आवरण में बड़ी वृद्धि दर्ज की है। विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम ने 242 वर्ग किमी में वृक्ष आवरण की वृद्धि की है, जो ISFR 2021 में रिपोर्ट किए गए कुछ गिरावटों को स्वीकार करने में मददगार साबित हुआ है।
किस वजह से बढ़ा वृक्ष आवरण?
इस वृद्धि का कारण कई हो सकते हैं, जिसमें सरकार की वन संरक्षण नीतियाँ भी शामिल हैं। पिछले कुछ वर्षों में वृक्षारोपण कार्यक्रमों में बढ़ोतरी हुई है, जो पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए किए गए हैं। भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) के अनुसार, ये प्रयास न केवल वन आवरण में वृद्धि का कारण बने हैं, बल्कि इसने बायोडायवर्सिटी को भी संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वन और वृक्ष आवरण की आवश्यकताएँ
वन और वृक्ष आवरण न केवल पर्यावरण के लिए आवश्यक हैं, बल्कि यह मानव जीवन के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। ये जलवायु संतुलन, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने, और उचित पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा, ये मानव जीवन के लिए ऑक्सीजन स्रोत के रूप में कार्य करते हैं और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हैं।
कैसे हुआ आंकड़ों का संकलन?
ये आंकड़े भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) द्वारा संकलित किए गए हैं, जो हर दो साल में वन आवरण के संबंधित डेटा को अद्यतन करता है। इन आंकड़ों में, उपग्रह चित्रण, भूमि उपयोग के परिवर्तन, और वन प्रबंधन कार्यक्रमों का भी समावेश किया गया है।
रिपोर्ट के आंकड़े
2021 में भारत का कुल वन आवरण 7,13,789 वर्ग किमी था, जो अब बढ़कर 7,15,343 वर्ग किमी हो गया है। इसके साथ ही, वृक्ष आवरण में भी 1,289 वर्ग किमी का इजाफा हुआ है, जो अब देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 3.41 प्रतिशत है। कुल मिलाकर, वन और वृक्ष आवरण मिलाकर 8,27,357 वर्ग किमी यानी 25.17 प्रतिशत भारत के भौगोलिक क्षेत्र को कवर करते हैं।
क्या है आगे की योजना?
आगामी वर्षों में, भारत सरकार ने वन संरक्षण और वृक्षारोपण के लिए कई योजनाओं की घोषणा की है। इसके अंतर्गत, स्थानीय समुदायों को वन प्रबंधन में भागीदारी देने पर जोर दिया जाएगा, जिससे न केवल वृक्षारोपण की गति बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों की जीविका में भी सुधार होगा।
अवधारणाएँ और फायदे
उच्च वृक्ष आवरण का लाभ केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन, बायोडायवर्सिटी, और स्थानीय समुदायों की आर्थिक स्थिति को भी बेहतर करने में सहायक हो सकता है। इसलिए यह आवश्यक है कि हर नागरिक इन प्रयासों में सक्रिय भागीदारी करे और अपने आसपास के वातावरण की देखभाल करें।

