Tuesday, March 24, 2026

एनएचआरसी के कार्यक्रम में आठ देशों के 33 प्रतिनिधि हुए शामिल

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मानवाधिकारों की रक्षा और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए छह दिवसीय आईटीईसी कार्यक्रम का आयोजन

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने विदेश मंत्रालय के सहयोग से दक्षिणी गोलार्ध के आठ विकासशील देशों के राष्ट्रीय मानवाधिकार निकायों की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से छह दिवसीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम 11 से 16 नवंबर, 2024 तक राजधानी दिल्ली में आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में मालदीव, मंगोलिया, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, श्रीलंका, थाईलैंड और जॉर्डन के मानवाधिकार निकायों के 33 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इन प्रतिनिधियों में मानवाधिकार क्षेत्र के विशेषज्ञ, प्रशासनिक अधिकारी और नीति-निर्माता शामिल थे, जिन्होंने कार्यक्रम में विविध विषयों पर अपनी समझ और अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम के प्रमुख सत्र और चर्चाएं

कार्यक्रम में मानवाधिकार से संबंधित विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव, सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रयास, डिजिटल युग में मानवाधिकार संरक्षण, और आपदा प्रबंधन के दौरान मानवाधिकारों की भूमिका जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि विभिन्न सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद मानवाधिकारों की रक्षा कैसे की जा सकती है। प्रतिभागियों ने अपने-अपने देशों में अपनाई गई सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया और यह जानने का प्रयास किया कि क्षेत्रीय और वैश्विक सहयोग से इन प्रयासों को और अधिक प्रभावी कैसे बनाया जा सकता है।

संस्कृति और धरोहर का समावेश

कार्यक्रम के अंतिम दिन, प्रतिभागियों को आगरा के ताजमहल की सांस्कृतिक यात्रा कराई गई। इस यात्रा का उद्देश्य प्रतिभागियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविधता से परिचित कराना था। एनएचआरसी ने बताया कि इस यात्रा ने प्रतिभागियों के बीच भारत के बहुआयामी सांस्कृतिक पहलुओं और मानवाधिकारों के प्रति देश की गहरी प्रतिबद्धता को समझने में मदद की।
प्रतिभागियों ने भारतीय संस्कृति, आपसी सम्मान और साझा मूल्यों की प्रशंसा की।

एनएचआरसी की व्यापक रणनीति का हिस्सा

एनएचआरसी ने एक विज्ञप्ति में बताया कि यह कार्यक्रम मानवाधिकारों के संरक्षण और उन्हें बढ़ावा देने की उसकी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इस पहल का उद्देश्य वैश्विक दक्षिण में न्याय, समानता और मानवीय गरिमा को मजबूत करना है। साथ ही, इस तरह के कार्यक्रम भारत और अन्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।

उद्घाटन सत्र और समापन टिप्पणी

कार्यक्रम की शुरुआत एनएचआरसी की कार्यवाहक अध्यक्ष विजया भारती सयानी के उद्घाटन भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने मानवाधिकारों की सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया। वहीं, एनएचआरसी के महासचिव भरत लाल ने अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में भारत की विविधता, मानवाधिकारों के प्रति सम्मान और जीवनशैली के रूप में अहिंसा की भूमिका पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के समापन सत्र में प्रतिभागियों ने यह माना कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम न केवल अनुभव साझा करने का मंच प्रदान करते हैं, बल्कि मानवाधिकारों की दिशा में वैश्विक स्तर पर एकजुटता बढ़ाने में भी सहायक होते हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहभागिता का एक कदम

एनएचआरसी ने बताया कि यह कार्यक्रम भारत और वैश्विक दक्षिण के बीच एक मजबूत संवाद स्थापित करने और वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों की स्थिति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
प्रतिभागियों ने इस कार्यक्रम को सीखने और विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक उत्कृष्ट मंच बताया।

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