दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अभी जेल में ही रहना होगा। दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली आबकारी घोटाला मामले में ट्रायल कोर्ट से मिली जमानत पर रोक लगा दी है।
मुख्य बिंदु:
- हाई कोर्ट का आदेश: जस्टिस सुधीर कुमार जैन की वेकेशन बेंच ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का आदेश सही नहीं था और उसे सभी दस्तावेजों पर गौर करना चाहिए था।
- मनी लांड्रिंग एक्ट की धारा 45: हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने मनी लांड्रिंग एक्ट की धारा 45 की दो शर्तों का पालन नहीं किया है और ईडी को दलीलें रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश: हाई कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट की ओर से अंतरिम जमानत चुनाव प्रचार के लिए दी गई थी, इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए नहीं माना जा सकता।
ईडी की दलीलें:
- ट्रायल कोर्ट का आदेश गलत: सुनवाई के दौरान ईडी ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का पूरा आदेश ही गलत है, और ट्रायल कोर्ट ने ईडी की दलीलों और साक्ष्यों पर बिल्कुल गौर नहीं किया।
- धारा 45 का उल्लंघन: ईडी ने कहा कि ट्रायल कोर्ट में उसे जमानत का विरोध करने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया, जिससे मनी लांड्रिंग कानून की धारा 45 का उल्लंघन हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट की स्थिति:
- अंतरिम रोक: सुप्रीम कोर्ट ने 24 जून को हाई कोर्ट के ट्रायल कोर्ट के जमानत आदेश पर अंतरिम रोक लगाने के आदेश के खिलाफ केजरीवाल की याचिका पर 26 जून तक सुनवाई टाल दी थी।
इस फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल को फिलहाल जेल में ही रहना होगा और उन्हें आगे की कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ेगा।

