प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को योग और मिलेट्स (ज्वार-बाजार और अन्य मोटे अनाज) में एक समानता ढूंढा
“दोनों दुनिया भर में लोगों के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है और भारत की पहल पर दोनों को ही संयुक्त राष्ट्र में मान्यता मिली है।”
देशवासियों के नाम अपने मासिक रेडियो प्रसारण ‘प्रधानमंत्री मन की बात’ की 97वीं कड़ी में श्री मोदी देन कहा, ‘ अगर मैं आपसे पूंछू कि योग दिवस और हमारे विभिन्न तरह के मोटे अनाजों – मिलेट्स में क्या मेल है तो आप सोचेंगे ये भी क्या तुलना हुई ? अगर मैं कहूँ कि दोनों में काफी कुछ मेल है तो आप हैरान हो जाएंगे।
दरअसल संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष (2023), दोनों का ही निर्णय भारत के प्रस्ताव के बाद लिया है।
उन्होंने दोनों की समानता की व्याख्या का विस्तार करते हुए कहा , ‘ दूसरी बात ये कि योग भी स्वास्थ्य से जुड़ा है और मोटे अनाज भी सेहत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
तीसरी बात और महत्वपूर्ण है – दोनों ही अभियानो में जन-भागीदारी की वजह से क्रांति आ रही है।
श्री मोदी ने कहा कि जिस तरह लोगों ने व्यापक स्तर पर सक्रिय भागीदारी करके योग और फिटनेस (शरीर को चुस्त दुरुस्त रखने) को अपने जीवन का हिस्सा बनाया है उसी तरह ज्वार-बाजार को भी लोग बड़े पैमाने पर अपना रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बदलाव का बहुत बड़ा प्रभाव भी दिख रहा है। इससे एक तरफ वो छोटे किसान बहुत उत्साहित हैं जो पारंपरिक रूप से ज्वार बाजरा का उत्पादन करते थे। वो इस बात से बहुत खुश हैं कि दुनिया अब का महत्व समझने लगी है।
मोटे अनाजों के व्यावसायिक पक्ष का भी जिक्र किया और कहा कि किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और नए नए उद्यमी पौष्टिक तत्वों से भरपूर मोटे अनाजों को किसान के पास से बाजार तक पहुँचाने और उसे लोगों तक उपलब्ध कराने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

