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Thursday, January 22, 2026

एनएचआरसी बिहार में शराब त्रासदी की जांच के लिए अपनी टीम नियुक्त करेगा

इंडियाएनएचआरसी बिहार में शराब त्रासदी की जांच के लिए अपनी टीम नियुक्त करेगा

सुशील मोदी ने कहा ज़हरीली शराब से दलितों और गरीबों की मौत पर मांझी, माले ने सत्ता के लिए साध ली चुप्पी

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने ज़हरीली शराब त्रासदी से बिहार के अन्य जिलों में हुई मौतों के मद्देनजर मौके पर जांच के लिए शनिवार को अपने एक सदस्य के नेतृत्व में अपनी टीम को प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त करने का फैसला किया.

आयोग ने कहा कि यह जानना चिंतित है कि इन पीड़ितों को कहां और किस तरह का चिकित्सा उपचार दिया जा रहा है. आयोग ने कहा कि इनमें से ज्यादातर गरीब परिवारों से है और निजी अस्पतालों में महंगा उपचार नहीं करा सकते है. इसलिए राज्य सरकार के लिए जरुरी है कि जहां कहीं भी उपलब्ध हो वह इन लोगों को संभावित बेहतर चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराए.

आयोग ने कहा कि वह राज्य सरकार द्वारा दी गई राहत और पुनर्वास के बारे में और राज्य भर में अवैध शराब बनाने वाले हॉट स्पॉट को खत्म करने के लिए किए गए या किए जाने वाले उपायों के बारे में जानना चाहता है.

एनएचआरसी ने कहा कि इस मामले में एक और स्वतः संज्ञान लेते हुए आयोग ने 15 दिसंबर को पहले की मीडिया रिपोर्टों का स्वत: संज्ञान लेते हुए सारण जिले में ज़हरीली शराब त्रासदी में कई मौतों का आरोप लगाते हुए अपने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के माध्यम से कई लोगों और परिवारों को प्रभावित करने वाली घटना में चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए बिहार सरकार से पूछा था.

ज़हरीली शराब से दलितों-गरीबों की मौत पर चुप्पी?

उधर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि बिहार के तीन जिले में ज़हरीली शराब पीने से 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और उनमें अधिकतर दलित, गरीब, आदिवासी और पिछड़े समाज के लोग हैं लेकिन श्री जीतन राम मांझी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी (भाकपा माले) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) जैसे दलों ने सत्ता में बने रहने के लिए गहरी चुप्पी साध ली है.

श्री मोदी ने शनिवार को सारण जिला में ज़हरीली शराब कांड में मृतकों के परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना देने के बाद बयान जारी कर कहा कि इस कांड में मरने वाले अधिकांश लोग दलित, गरीब, आदिवासी और पिछड़े समाज के हैं लेकिन श्री जीतन राम मांझी, भाकपा माले और माकपा जैसे दलों ने सत्ता में बने रहने के लिए गहरी चुप्पी साध ली है. उन्होंने कहा कि लगता है कि ज़हरीली शराब ने इनकी आत्मा को भी मार डाला है.

भाजपा सांसद ने कहा कि जो श्री जीतन राम मांझी शराबबंदी के विरुद्ध रोज बयान देते थे और कहते थे कि पाव भर शराब पीने में कोई बुराई नहीं, वे भी ज़हरीली शराब से मरने वालों के परिवार को सांत्वना देने तक नहीं गए. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ज़हरीली शराब से मरने वालों के प्रति संवेदना प्रकट करना तो दूर, उनके परिवारों के प्रति भी कठोरता दिखायी.

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