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Thursday, January 22, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने बिलक़ीस बानो की पुनर्विचार याचिका कर दी खारिज

इंडियासुप्रीम कोर्ट ने बिलक़ीस बानो की पुनर्विचार याचिका कर दी खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने बिलक़ीस बानो की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें सामूहिक बलात्कार के 11 दोषियों की सज़ा माफ करने की याचिका पर पुनर्विचार का अनुरोध किया गया था

उच्चतम न्यायालय ने बिल्कीस बानो की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें सामूहिक बलात्कार मामले के 11 दोषियों की सज़ा माफ करने की याचिका पर गुजरात सरकार से विचार करने के लिए कहने संबंधी शीर्ष अदालत के आदेश की समीक्षा का अनुरोध किया गया था.

बिलक़ीस बानो 2002 में गुजरात दंगों के दौरान सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई थीं और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी गई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को बिलक़ीस बानो की तरफ से दायर एक याचिका को खारिज कर दिया. इसमें उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से मांग की थी कि वह अपने उस आदेश की समीक्षा करे, जिसके तहत उसने गुजरात सरकार को 1992 की नीति के तहत दोषियों को छूट देने पर विचार के लिए कहा था.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की काफ़ी आलोचना भी होने लगी है। जैसे बोलत हिंदुस्तान की निगार परवीन ने अपने ट्विटर हैन्डल पर लिखा है कि:

“मिलॉर्ड ने बिलकिस बानो की याचिका खारिज कर दी और उम्मीद ही क्या थी ? जो एक महिला को न्याय नहीं दे सकते वो दुनिया में क्या मुँह दिखाएंगे किस मुँह से अपने न्याय की तारीफ करेंगे कभी तो किसी ना किसी से आँखे मिलाओगे सर किरण के बाद बिलकिस…वाह मिलॉर्ड वाह गजब है आपका अन्याय!

 

गौरतलब है कि साल 2002 के गोधरा दंगों के दौरान बिलक़ीस के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उनके परिवार के सदस्यों की हत्या करने के मामले में 11 दोषियों को उम्रकैद की सज़ा हुई थी. हालांकि, गुजरात सरकार ने दोषियों को रिहा 15 साल जेल की सज़ा काटने के बाद रिहा कर दिया.

गुजरात सरकार का कहना है कि उसने अपनी सज़ा माफी नीति के अनुरूप 11 दोषियों को छूट दी है. इन दोषियों को इसी साल 15 अगस्त को जेल से रिहा किया गया. दोषियों को गोधरा उप-जेल में 15 साल से अधिक की सज़ा काटने के बाद छोड़ा गया है.

दोषियों की इसी रिहाई को चुनौती देते हुए समय से पहले रिहाई को चुनौती देते हुए बिलक़ीस बानो ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है. इसमें 13 मई के आदेश पर दोबारा विचार करने की मांग की गई है.

इसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि गैंगरेप के दोषियों की रिहाई में 1992 में बने नियम लागू होंगे. इसी आधार पर 11 दोषियों की रिहाई हुई थी. वहीं बिलक़ीस बानो के वकील ने लिस्टिंग के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के समक्ष मामले का उल्लेख किया था.

सुप्रीम कोर्ट के 13 मई का आदेश

बता दें कि 13 मई को सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि सज़ा 2008 में मिली, इसलिए रिहाई के लिए 2014 में गुजरात में बने कठोर नियम लागू नहीं होंगे.

1992 के नियम ही लागू होंगे जिसके तहत  गुजरात सरकार ने 14 साल की सज़ा काट चुके लोगों को रिहा किया था. अब बिलक़ीस बानो 13 मई के आदेश पर पुनर्विचार की मांग कर रही हैं. उनका कहना है कि जब मुकदमा महाराष्ट्र में चला, तो नियम भी वहां के लागू होंगे गुजरात के नहीं.

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