दिल्ली में यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ इंडिया के दफ्तर पर कार्रवाई से प्रेस की आज़ादी पर गंभीर सवाल
दिल्ली में यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ इंडिया (United News of India) के कार्यालय को सील किए जाने की घटना पर पत्रकार संगठनों और विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इसे प्रेस की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक मूल्यों और विधिक प्रक्रिया के लिहाज़ से चिंताजनक बताया जा रहा है।
यह कार्रवाई Delhi High Court (Delhi High Court) दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश के बाद की गई, जिसमें रफ़ी मार्ग स्थित बहुमूल्य सरकारी संपत्ति के विवाद में केंद्र सरकार के पक्ष में फैसला दिया गया। शुक्रवार रात पुलिस और केंद्रीय बलों ने तेज़ी से कार्रवाई करते हुए परिसर को अपने कब्जे में ले लिया। इस दौरान पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की और झड़प की भी खबरें सामने आईं।
बल प्रयोग और प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (Editors Guild of India) ने अपने बयान में कहा कि अदालत के आदेश का पालन आवश्यक है, लेकिन जिस तरीके से इसे लागू किया गया वह चिंताजनक है। संगठन के अनुसार बिना पर्याप्त पूर्व सूचना और तय प्रक्रिया का पालन किए अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया गया।
बयान में कहा गया कि अदालत का विस्तृत आदेश सार्वजनिक होने से पहले ही सैकड़ों पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवान यूएनआई कार्यालय पहुंच गए और ड्यूटी पर मौजूद पत्रकारों, जिनमें महिला कर्मचारी भी शामिल थीं, को जबरन बाहर निकाल दिया गया।

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (Communist Party of India) ने इस कार्रवाई की निंदा की, जबकि M. A. Baby, जो Communist Party of India (Marxist) के महासचिव हैं, ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि बिना पूर्व सूचना और कर्मचारियों को अपना सामान समेटने का समय दिए इस तरह की कार्रवाई अस्वीकार्य है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Randeep Surjewala ने इस घटना को मीडिया पर दबाव के व्यापक पैटर्न से जोड़ते हुए NDTV और BBC जैसे संस्थानों के खिलाफ हुई कार्रवाई का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में भारत की रैंकिंग लगातार गिर रही है।
पत्रकार संगठनों की मांगें
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (Press Club of India) ने पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की।
इसी तरह इंडियन वूमेन्स प्रेस कॉर्प्स (Indian Women’s Press Corps) ने महिला पत्रकारों की सुरक्षा और गरिमा को लेकर चिंता जताई और कहा कि इस तरह की घटनाएं न केवल संस्थान की साख को प्रभावित करती हैं बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता को भी कमजोर करती हैं।
दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (Delhi Union of Journalists) ने भी पुलिस की कार्रवाई को कठोर शब्दों में आलोचना करते हुए इसे अलोकतांत्रिक और अनुचित बताया।
संपत्ति विवाद और संस्थान का भविष्य
यूएनआई का रफ़ी मार्ग स्थित कार्यालय लंबे समय से एक महत्वपूर्ण और बहुमूल्य संपत्ति माना जाता रहा है, जिस पर विभिन्न संस्थाओं की नज़र रही है। सरकार द्वारा लीज़ रद्द किए जाने के बाद अब इस समाचार एजेंसी के भविष्य और इससे जुड़े कर्मचारियों के रोजगार को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।

पत्रकार यूनियनों ने प्रबंधन से अपील की है कि वह अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करे, संस्थान को चालू रखे और पत्रकारों व अन्य कर्मचारियों को उनका बकाया समय पर दिया जाए।

