मुख्यमंत्री फडणवीस ने राहुल गांधी के आरोपों को किया खारिज, दी सलाह
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के द्वारा मतदाता सूची में गड़बड़ी के लगाए गए आरोपों का सख्त प्रतिवाद किया है। फडणवीस ने राहुल गांधी को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें पहले अपने पार्टी के विधायकों से बात करनी चाहिए, तब जाकर सार्वजनिक आरोप लगाना चाहिए। इस मुद्दे पर फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक हिंदी कहावत का इस्तेमाल करते हुए कटाक्ष किया, जिसमें उन्होंने कहा, ‘झूठ बोले कौवा काटे, काले कौवे से डरियो।’
राहुल गांधी ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी हुई है। उन्होंने इसे ‘मतदान की चोरी’ का मामला बताया और कहा कि यह कोई छोटी तकनीकी गलती नहीं है। राहुल का कहना था कि नागपुर दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में सिर्फ पांच महीने में मतदाताओं की संख्या में 8% की वृद्धि हुई है, जबकि कुछ बूथों पर तो यह वृद्धि 20-50% तक पहुँची है।
क्या है राहुल गांधी का आरोप?
राहुल गांधी ने यह भी बताया कि कई बूथों पर बूथ लेवल अधिकारियों ने अनजान लोगों को वोट डालते देखा है। इस मामले में उन्होंने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परंतु सीएम फडणवीस ने इसे सिरे से खारिज किया है।
फडणवीस ने कहा, “राहुल गांधी, महाराष्ट्र में मिली शर्मनाक हार की चुभन अब शायद और बढ़ रही है। लेकिन कब तक बिना सोचे-समझे तीर चलाते रहेंगे?” उन्होंने यह भी बताया कि 25 से अधिक विधानसभा सीटों पर 8% से अधिक मतदाता बढ़ोतरी हुई है, किन्तु इनमें से कई जगह कांग्रेस या उसकी सहयोगी पार्टियों को जीत मिली।
चुनावी राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का खेल
भाजपा के विधान परिषद सदस्य प्रसाद लाड ने भी राहुल गांधी के आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि यह हार की हताशा का नतीजा है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस और राहुल गांधी सत्ता में लौट नहीं पा रहे हैं, और अगर लौटते भी हैं तो संभाल नहीं पाते। उनके पास जनता के सामने रखने लायक कोई मुद्दा ही नहीं है।”
लाड ने यह भी कहा कि भाजपा एक कैडर-बेस्ड पार्टी है जिसमें प्रत्येक बूथ स्तर पर अधिकारी नियुक्त होते हैं, जिनका काम मतदाता पंजीकरण बढ़ाना होता है। उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों को परस्पर विरोधाभासी बताते हुए कहा कि “कहीं 50% बढ़ोतरी कहते हैं, कहीं 25%। उन्हें पहले अपनी बात स्पष्ट करनी चाहिए।”
राज्य निर्वाचन आयोग का जवाब
महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन कार्यालय ने भी इस मामले में राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है। आयोग ने कहा है कि जैसे कि भारत के चुनाव आयोग ने पहले ही सूचित किया है, मतदाता सूची सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ साझा की जाती है। आगामी 2024 के आम चुनावों के लिए सभी 288 विधानसभा क्षेत्रों की मसौदा और अंतिम मतदाता सूची की प्रतियां कांग्रेस समेत सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को प्रदान की गई हैं।
कांग्रेस की आंतरिक संवादहीनता का उजागर होना
सीएम फडणवीस ने आगे कहा कि अगर राहुल गांधी ने ट्वीट करने से पहले असलम शेख, विकास ठाकरे, या नितिन राऊत से बात कर ली होती, तो कांग्रेस की आंतरिक संवादहीनता इस तरह उजागर नहीं होती। इस तरह के आरोपों से न केवल राहुल गांधी की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कांग्रेस अपनी समस्याओं का समाधान खोजने में असमर्थ है।
भविष्य में राजनीतिक संवाद का महत्व
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला आगे भी जारी रहने की संभावना है, लेकिन दोनों दलों को यह समझना होगा कि ऐसे मुद्दों को सुलझाने के लिए संवाद और तथ्यात्मक जानकारी का होना आवश्यक है। बिना सच्चाई के आरोप लगाना और निराधार बयान देना केवल राजनीतिक स्थिति को और जटिल बनाएगा।
इस प्रकार के विवाद राष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा हैं, लेकिन नागरिकों को इससे सही जानकारी मिलनी चाहिए ताकि वे सही तरीके से अपने मत का प्रयोग कर सकें। एक स्वस्थ लोकतंत्र में, सभी राजनीतिक दलों को अपनी जिम्मेदारी और आचार संहिता का पालन करना चाहिए ताकि उनकी विश्वसनीयता बनी रहे।
इस संदर्भ में, India Today और Hindustan Times जैसी विश्वसनीय समाचार वेबसाइटों से जानकारी प्राप्त करना उपयोगी रहेगा।
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