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Wednesday, January 21, 2026

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान को मिली शिकस्त: भारत की कूटनीति का राज़

इंडियासंयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान को मिली शिकस्त: भारत की कूटनीति का राज़

UNSC की बैठक में पाकिस्तान की दलीलें नाकाम: भारत को मिला समर्थन

कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बंद बैठक में पाकिस्तान को भारी निराशा का सामना करना पड़ा है। इस बैठक में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि पाकिस्तान की स्थिति अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इतनी कमजोर हो गई है कि कोई भी देश उसकी बातों को गंभीरता से नहीं लेता। यूएनएससी की बैठक में पाकिस्तान द्वारा उठाए गए मुद्दों का भारत पर कोई असर नहीं पड़ा। यह एक ऐसा घटना घटित हुई है जो बताती है कि पाकिस्तान की कूटनीतिक चालें अब प्रभावहीन हो चुकी हैं।

पहलगाम में हुए हालिया आतंकवादी हमले की पृष्ठभूमि में पाकिस्तान ने इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की थी। इस बैठक में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने के लिए कई दलीलें पेश कीं। लेकिन अकबरुद्दीन ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की यह कोशिशें न केवल विफल रहीं, बल्कि उनका मजाक भी बन गया।

पाकिस्तान का दम भरना और भारत की कूटनीति

सैयद अकबरुद्दीन ने बताया कि पाकिस्तान ने 60 वर्षों में पहली बार इस तरह के एजेंडे को पेश करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का यह प्रयास केवल एक दिखावा था और इसका परिणाम यह है कि सुरक्षा परिषद ने उसके मुद्दों को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की कूटनीतिक चालें अब सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी छवि को सुधारने तक ही सीमित रह गई हैं, न कि गंभीर वार्ता के लिए।

पाकिस्तान का असली उद्देश्य

अकबरुद्दीन ने कहा, “पाकिस्तान हमेशा से अंतरराष्ट्रीय मंचों का उपयोग अपने देश की छवि को सुधारने के लिए करता आया है। अब तक उसकी यह रणनीति विफल हो चुकी है। सुरक्षा परिषद में उसकी सभी कोशिशें व्यर्थ गईं और उसे कोई समर्थन नहीं मिला।” उन्होंने कहा कि यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि आज की दुनिया में पाकिस्तान को एक गंभीर और भरोसेमंद देश नहीं माना जाता है।

आगे उन्होंने बताया कि, “जो होना था, वही हुआ। मुझे पहले से पता था कि पाकिस्तान को कोई समर्थन नहीं मिलेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की यह कोशिश एक प्रचार के लिए थी, न कि किसी गंभीर संवाद या समाधान के लिए।

पाकिस्तान का चीन से सहयोग

अकबरुद्दीन ने पहलगाम आतंकवादी हमले की जांच में पाकिस्तान की मांग का चीन द्वारा समर्थन किए जाने पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “यह एक ऐसा खेल है जिसे पाकिस्तान नियमित रूप से खेलता है। यह एक ऐसा खेल है जिसमें वह लड़खड़ाता है।” उन्होंने बताया कि चीन ने पाकिस्तान का साथ दिया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बाकी दुनिया भी उसकी स्थिति को स्वीकार करेगी।

इससे पहले, यह साफ हो चुका था कि पाकिस्तान की विदेश नीति अब केवल चीन पर निर्भर हो गई है। जबकि बाकी देश पाकिस्तान की वास्तविकता को समझ चुके हैं और वहां की कूटनीति को गंभीरता से नहीं लेते

अंतरराष्ट्रीय स्थिति की जटिलता

अकबरुद्दीन ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति एक जटिल प्रक्रिया है। “सुरक्षा परिषद के काम करने के तरीके में कई चरण होते हैं। सबसे पहले प्रस्ताव आता है, फिर अध्यक्षीय बयान, प्रेस बयान और अंत में सुरक्षा परिषद के प्रमुख प्रेस से मौखिक रूप से कुछ कहते हैं। लेकिन इस बैठक के बाद इनमें से कोई भी बातें नहीं हुईं।”

यह बात इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान की कोशिशें बिना किसी समर्थन के समाप्त हो गई हैं।

पाकिस्तान की कूटनीतिक विफलता के संकेत

आज की स्थिति में, जहां पूरी दुनिया पाकिस्तान को गंभीरता से नहीं ले रही है, यह स्पष्ट है कि उसकी कई कोशिशें न केवल विफल हो गई हैं, बल्कि उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विश्वसनीयता भी खो दी है। उनके पास कोई ठोस कारण नहीं है जिससे वे विश्व समुदाय का समर्थन प्राप्त कर सकें।

पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ा झटका है, खासकर जब उसने 15 देशों के साथ मिलकर इस मुद्दे पर काम किया था। लेकिन उन्हें यह पता चला कि उनकी सभी कोशिशें व्यर्थ गईं।

सुरक्षा परिषद की अनदेखी

सैयद अकबरुद्दीन ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान के मुद्दे को स्वीकार नहीं किया है। इसका मतलब यह है कि पाकिस्तान की सभी योजनाएँ, जिनमें वह भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना चाहता था, पूरी तरह विफल हो गई हैं।

पैगाम है कि पाकिस्तान को यह समझना होगा कि उनकी कूटनीति अब प्रभावी नहीं रह गई है और उन्हें अपनी वास्तविकता को समझने की आवश्यकता है।

इसके साथ ही, भारतीय कूटनीति ने एक और बार स्पष्ट कर दिया है कि वह इन चालों का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर पाकिस्तान की स्थिति

अकबरुद्दीन की ये टिप्पणियाँ एक महत्वपूर्ण संकेत देती हैं कि पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में क्या स्थिति है। भारत की कूटनीति मजबूत होती जा रही है, और सुरक्षा परिषद में इसका स्वीकार्यता बढ़ रहा है।

जैसा कि यह मामला स्पष्ट है, भारत की कूटनीति का प्रभाव और सफलता अब केवल एक मुद्दा नहीं बल्कि एक संभावित क्षेत्रीय शक्ति के रूप में उभरा है।

यह देखना बाकी है कि पाकिस्तान अपनी इस असफलता से क्या सीखता है और आगे की रणनीति क्या होगी, लेकिन वर्तमान में उनकी स्थिति बहुत कमजोर नजर आ रही है।

 

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