केरल में मानसून के आगमन की संभावित तिथि को लेकर आई नई जानकारी
इन दिनों भारत के उत्तर भाग में गर्मी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। राजधानी दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत में लोग भीषण गर्मी से जूझ रहे हैं। ऐसे में, लोग बेसब्री से मानसून का इंतजार कर रहे हैं। मौसम विभाग ने इस संदर्भ में एक नया अपडेट जारी किया है। इसके अंतर्गत, मौसम विज्ञान विभाग का कहना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार केरल में अपने तय समय से पहले पहुँच सकता है।
कौन, क्या, कहाँ, कब, क्यों और कैसे?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले 4-5 दिनों में केरल में दस्तक दे सकता है। यह आमतौर पर 1 जून के आसपास आता है, लेकिन इस बार यह 27 मई तक पहुँचने की संभावना है। अगर यह समय से पहले पहुँचता है, तो यह 2009 के बाद से सबसे जल्दी मानसून होगा, जब यह 23 मई को आया था।
आईएमडी ने बताया कि इस बार मानसून के आगमन के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं, और इस अनुमान के अनुसार केरल में अगले दिनों में भारी बारिश की उम्मीद जताई जा रही है। इस रिपोर्ट के अनुसार, यदि वातावरण में कोई अनपेक्षित परिवर्तन न हो, तो मानसून पूर्वानुमान के अनुसार निर्धारित समय से पहले ही केरल पहुँचने वाला है।
मानसून का महत्व
मानसून भारतीय कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। लगभग 42.3 प्रतिशत आबादी की आजीविका कृषि पर निर्भर करती है, और यह देश के सकल घरेलू उत्पाद में 18.2 प्रतिशत का योगदान करता है। इसके अलावा, यह देश के जलाशयों को पुनर्जीवित करने के लिए भी आवश्यक है, जिससे पीने के पानी और बिजली उत्पादन को पर्याप्त जल प्राप्त होता है।
अल नीनो का प्रभाव
हालांकि, जब हम मानसून की बात करते हैं, तो इस साल अल नीनो की स्थिति का असर इस पर पड़ने की संभावना नहीं है। आईएमडी ने पहले ही यह स्पष्ट किया है कि 2025 के मानसून सीजन में सामान्य से अधिक वर्षा होने की उम्मीद है। अल नीनो के कारण भारत में सामान्य से कम वर्षा होने का खतरा होता है, लेकिन इस बार ऐसा कोई संकेत नहीं है।
पिछले साल की तुलना
पिछले साल, 30 मई को दक्षिणी राज्य में मानसून ने दस्तक दी थी। पिछले वर्षों में, मानसून के आगमन की तिथियाँ अलग-अलग रही हैं, जैसे कि 2023 में 8 जून, 2022 में 29 मई, और 2021 में 3 जून को केरल में पहुँचने का समय था। इसके अनुसार, यदि इस बार मानसून निर्धारित समय से पहले पहुँचता है, तो यह किसानों और कृषि उत्पादन के दृष्टिकोण से एक सकारात्मक संकेत होगा।
मौसम विज्ञान विभाग का अनुमान
आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, 50 वर्ष के औसत 87 सेमी वर्षा के 96 प्रतिशत से 104 प्रतिशत के बीच वर्षा को ‘सामान्य’ माना जाता है। इसके अलावा, दीर्घावधि औसत के 90 प्रतिशत से कम वर्षा को ‘कम’ माना जाता है। दूसरी ओर, 90 प्रतिशत से 95 प्रतिशत के बीच वर्षा को ‘सामान्य से कम’ और 105 प्रतिशत से 110 प्रतिशत के बीच ‘सामान्य से अधिक’ कहा जाता है।
सामान्य के मुकाबले अधिक वर्षा का होना न केवल कृषि के लिए लाभकारी होता है, बल्कि यह जलाशयों को पुनर्जीवित करने और जल संकट को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कृषि और जल संकट के संदर्भ में
जलवायु परिवर्तन और जल संकट की स्थितियों में, मानसून की वर्षा एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। सही समय पर और उचित मात्रा में वर्षा न केवल कृषि क्षेत्र को समृद्ध बनाती है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट को नियंत्रित करने में भी मदद करती है।
इस संबंध में और जानकारी के लिए आप[यहाँ](https://www.imd.gov.in/) पर जा सकते हैं। इसके अलावा, कृषि के महत्व को समझने के लिए[कृषि मंत्रालय की वेबसाइट](http://agricoop.nic.in) पर जा सकते हैं।
भारत के लिए आगामी मानसून का महत्व
इस बार का मानसून भारत के लिए कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। किसानों की अपेक्षाएँ, जल संकट की स्थिति और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के संदर्भ में, समय पर और पर्याप्त मानसून बारिश आवश्यक है। इसके अलावा, मानसून का आगमन ना केवल हमारी कृषि प्रणाली को मजबूती देगा बल्कि देश के आर्थिक विकास में भी सहायक होगा।
इस प्रकार, मौसम विभाग की जानकारी और संभावित मानसून की तिथियाँ इस बार हमें एक आशा देती हैं। अगर सब कुछ ठीक रहता है, तो केरल में जल्द ही इंतजार खत्म होगा और लोग बारिश की पहली बूंदों का स्वागत करेंगे। इस बीच, आइए सभी मिलकर मौसम के इस परिवर्तन का स्वागत करें।[Source: IMD](https://www.imd.gov.in)[Source: Agriculture Ministry](http://agricoop.nic.in)
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