नई दिल्ली: शेयर बाजार में एक बार फिर से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की दिलचस्पी बढ़ गई है। इस हफ्ते एफपीआई ने भारतीय शेयरों में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। इस महीने में पहली बार एफपीआई का शुद्ध निवेश सकारात्मक रहा है, जो पिछले महीनों की तुलना में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
क्या, कब, कहां, क्यों और कैसे?
इस हफ्ते, 28 अप्रैल से 2 मई के बीच, एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में 10,073 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि विदेशी निवेशकों की रुचि भारतीय इक्विटी में पुनः जागृत हुई है। इसके साथ ही, अप्रैल 2025 में एफपीआई का शुद्ध निवेश 4,223 करोड़ रुपये रहा, जो कि कई महीनों के बाद पहली बार सकारात्मक रहा है। पिछले तीन महीनों में, एफपीआई ने लगातार भारतीय बाजार से निकासी की थी, लेकिन अब एक नया रुख अपनाया है।
इस बदलाव का मुख्य कारण भारत में आर्थिक स्थिति में सुधार और वैश्विक बाजारों में स्थिरता लौटने की संभावनाएं हैं। भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव की स्थिति ने निवेशकों के मूड को प्रभावित किया है, फिर भी एफपीआई ने आवश्यक रूप से निवेश जारी रखा है।
बाजार की स्थिति
शुक्रवार को, बीएसई सेंसेक्स 30 शेयरों वाला इंडेक्स 259.75 अंक (0.32%) की वृद्धि के साथ 80,501.99 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 935.69 अंक (1.16%) की वृद्धि के साथ 81,177.93 पर पहुंच गया था। एनएसई निफ्टी ने भी 12.50 अंक (0.05%) की मामूली वृद्धि के साथ 24,346.70 पर बंद किया। हालांकि, एफपीआई प्रवाह के बावजूद, भारतीय बाजार में तनाव की स्थितियों ने निवेशकों का मनोबल प्रभावित किया है।
आर्थिक संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में एफपीआई की बिकवाली के बाद अब सकारात्मक संकेतों ने बाजार में नए उत्साह का संचार किया है। अजय बग्गा, एक प्रमुख बाजार विशेषज्ञ ने कहा, “अच्छे वैश्विक संकेतों के चलते बाजार में तेजी आने के आसार हैं।” इसमें अधिक समर्थन की आवश्यकता है ताकि भारतीय इक्विटी बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
क्यों है ये बदलाव महत्वपूर्ण?
इस समय एफपीआई का सकारात्मक प्रवाह आने वाले महीनों में भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। यह दर्शाता है कि विदेशी निवेशक भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति फिर से भरोसा जगाने लगे हैं। हालांकि, बाजार की धारणा को बेहतर बनाने के लिए हमें अन्य मुद्दों का समाधान करना होगा, जैसे कि सीमा तनाव और वैश्विक आर्थिक स्थिरता।
भारतीय शेयर बाजार में एफपीआई के इस हफ्ते के प्रभावशाली निवेश ने यह साबित कर दिया है कि आर्थिक परिदृश्य में सुधार हो रहा है। हालांकि, सीमा तनाव जैसे मुद्दों के समाधान की आवश्यकता है ताकि निवेशकों का मूड सकारात्मक बना रहे। भारतीय बाजार का भविष्य अब इन संकेतों पर निर्भर करता है कि कैसे ये चुनौतियाँ सामना की जाती हैं।
इस प्रकार, इस हफ्ते एफपीआई के निवेश ने भारतीय शेयर बाजार में नई जान फूँका है। यदि यह प्रवाह निरंतर बना रहता है, तो भारतीय बाजार नई ऊँचाईयों को छू सकता है।
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