कोर्ट ने तहव्वुर राणा को 6 जून 2025 तक न्यायिक हिरासत में भेजा
26/11 मुंबई हमलों के कथित मास्टरमाइंड और आरोपी तहव्वुर राणा को आज पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे 6 जून 2025 तक न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्णय लिया है। राणा को हाल ही में अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया था, जहां उसकी लंबी कानूनी लड़ाई खत्म होने के बाद उसे भारत लाया गया। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर से देश के आतंकी मामलों में चर्चा का विषय बना दिया है।
तहव्वुर राणा का मामला: मुख्य तथ्य
कौन: तहव्वुर राणा, 26/11 मुंबई आतंकी हमलों का आरोपी।
क्या: पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया।
कब: आज यानी 26 अप्रैल 2025।
कहाँ: पटियाला हाउस कोर्ट, दिल्ली।
क्यों: अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया।
कैसे: एनआईए की विशेष टीम द्वारा लाया गया।
कोर्ट ने एनआईए को यह निर्देश भी दिया कि तहव्वुर राणा की हर 24 घंटे में मेडिकल जांच की जाए और उसे हर दूसरे दिन अपने वकील से मिलने की अनुमति दी जाए। राणा को एनआईए मुख्यालय के हाई-सिक्योरिटी सेल में रखा गया है, जहां उसकी 24 घंटे सीसीटीवी और सुरक्षा कर्मियों द्वारा निगरानी की जा रही है। एनआईए की पूछताछ में, राणा से उसके पाकिस्तानी हैंडलर, फंडिंग के स्रोत, और संभावित स्लीपर सेल नेटवर्क के बारे में सवाल पूछे जा रहे हैं। एनआईए को संदेह है कि राणा का पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से भी गहरा संबंध था।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
तहव्वुर राणा की पेशी के दौरान पटियाला हाउस कोर्ट के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सुनवाई के दौरान केवल एनआईए के अधिकारी और मामले से जुड़े अधिवक्ता ही कोर्टरूम में दाखिल हुए थे। मीडिया कर्मियों को कोर्टरूम से बाहर ही रखा गया था। दोपहर दो बजे के बाद, राणा को अदालत में पेश किया गया, जहां उसका चेहरा ढका हुआ था।
अमेरिका से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया
तहव्वुर राणा को अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है एनआईए की विशेष टीम ने। रिपोर्ट के अनुसार, इस टीम में शामिल अधिकारियों में झारखंड कैडर के आईपीएस आशीष बत्रा और छत्तीसगढ़ कैडर के आईपीएस अधिकारी प्रभात कुमार शामिल हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी, जिसे बाद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी स्वीकृत किया था।
तहव्वुर राणा का संदिग्ध इतिहास
26/11 मुंबई हमलों में करीब 174 लोगों की जान गई थी और 300 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह हमला पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा द्वारा अंजाम दिया गया था। राणा पर आरोप है कि उसने इस हमले की साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 2011 में भारतीय अदालत ने उसे दोषी ठहराया था, लेकिन उस समय वह अमेरिका में था।
आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों में संलिप्तता
तहव्वुर राणा एक पाकिस्तानी-कनाडाई नागरिक है, जो पहले पाकिस्तान सेना में डॉक्टर के रूप में कार्यरत था। 1990 के दशक में वह कनाडा चला गया और 2001 में कनाडाई नागरिकता हासिल की। शिकागो में बसने के बाद, उसने कई व्यवसाय शुरू किए, जिसमें इम्मीग्रेशन कंसल्टेंसी भी शामिल रही है। राणा पर लश्कर ए तैयबा के साथ संबंधों और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।
एनआईए की सक्रियता और जांच
जैसा कि निचले कोर्ट ने एनआईए को राणा की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए निर्देश दिया है, वही एनआईए इस मामले में सख्त खुराक लेकर चल रही है। एनआईए का मानना है कि यदि उन्हें पूछताछ के लिए और अधिक समय मिलेगा, तो इस मामले में बड़े खुलासे हो सकते हैं।
अब देखना यह है कि तहव्वुर राणा का मामला आगे किस दिशा में जाएगा और क्या राणा को न्यायिक जांच में उचित सजा मिलेगी या नहीं।
अस्वीकृति
हमने यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया है कि इस लेख और हमारे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दी गई जानकारी सटीक, प्रमाणित और विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त हो। यदि आपके पास कोई सुझाव या शिकायत हो, तो कृपया हमसे info@hamslive.com पर संपर्क करें।

