सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की तीन जजों की नियुक्ति की सिफारिश
गुवाहाटी और कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश समेत तीन नए जजों के सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति की सिफारिश की गई है। इस निर्णय से सुप्रीम कोर्ट में जजों के तीन रिक्त पदों को भरने में मदद मिलेगी। कॉलेजियम ने सोमवार को यह सिफारिश की, जिसमें कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एनवी अंजारिया, गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश विजय बिश्नोई, और बंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए एस चंदुरकर का नाम शामिल है।
इस सिफारिश का आह्वान प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता में कार्यरत पांच सदस्यीय कॉलेजियम द्वारा किया गया। इसमें शामिल अन्य सदस्यों में पूर्व प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति अभय एस ओका, और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय शामिल हैं। कॉलेजियम का यह निर्णय न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की 9 जून को होने वाली सेवानिवृत्ति के बाद किया गया है, जो कि सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत जजों की संख्या कम होने के चलते महत्वपूर्ण है।
कॉलेजियम प्रणाली और उसके कार्यप्रणाली
कॉलेजियम प्रणाली का गठन 1993 में सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय के बाद हुआ था। इस प्रणाली के तहत सर्वोच्च न्यायालय के पांच शीर्ष न्यायाधीश न्यायाधीशों की नियुक्ति, स्थानांतरण और पदोन्नति के लिए सिफारिश करते हैं। सरकार इन सिफारिशों को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है। यदि सरकार सिफारिशों को लौटा देती है, तो कॉलेजियम आमतौर पर पुनः सिफारिश करती है, और ऐसे मामलों में सरकार अक्सर सिफारिशों को मान लेती है।
इस समय, सुप्रीम कोर्ट में जजों की अधिकतम स्वीकृत संख्या 34 है, जबकि वर्तमान में इसमें केवल 31 न्यायाधीश ही कार्यरत हैं। इससे न्याय प्रणाली में कार्यभार और देर का संकट उत्पन्न हो सकता है, जो न्याय के त्वरित वितरण के लिए चुनौतीपूर्ण है।
न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना का कॉलेजियम में शामिल होना
जैसे ही न्यायमूर्ति अभय एस ओका की सेवानिवृत्ति हुई, न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना को देश की पांचवीं सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश होने के नाते कॉलेजियम में शामिल किया गया। इससे कॉलेजियम की संरचना में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। न्यायमूर्ति नागरत्ना 29 अक्टूबर, 2027 तक इस पद पर रहेंगे, और इससे सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों में और विविधता देखने को मिलेगी।
जैसा कि स्थिति है, कॉलेजियम में अब प्रधान न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी, और न्यायमूर्ति नागरत्ना शामिल हैं।
क्या हैं अपेक्षाएँ?
इस निर्णय के बाद से, कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई अपेक्षाएँ की जा रही हैं। न्यायपालिका की शक्ति और प्रभावशीलता में वृद्धि के लिए ये नियुक्तियाँ महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। वैसे, न्यायपालिका की कार्यप्रणाली के दक्षता में सुधार लाने के लिए ये नियुक्तियाँ अत्यधिक आवश्यक हैं।
इस प्रकार की नियुक्तियों से न्यायपालिका की स्वतंत्रता और स्वायत्तता में वृद्धि हो सकती है, जो कि लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू है।
सुप्रीम कोर्ट की ये सिफारिशें निश्चित रूप से न्याय के वितरण में सुधार लाने में सहायक साबित होंगी और इस सिस्टम में नए उभार लाएंगी। न्यायपालिका में नई प्रतिभाओं की आवक हमेशा से स्वागत योग्य रही है।
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