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Thursday, January 22, 2026

नक्सलवाद के ठिकाने पर तिरंगा, कर्रेगुट्टा में सुरक्षाबलों का ऐतिहासिक ऑपरेशन

इंडियानक्सलवाद के ठिकाने पर तिरंगा, कर्रेगुट्टा में सुरक्षाबलों का ऐतिहासिक ऑपरेशन

छत्तीसगढ़-तेलंगाना की सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर इस समय एक महत्वपूर्ण घटना घटित हो रही है। नक्सलियों का यह गढ़ अब सुरक्षाबलों के अधिकार में आ चुका है, जहां तिरंगा शान से लहरा रहा है। इस ऑपरेशन का नाम कर्रेगुट्टा है और यह देश के सबसे बड़े उग्रवाद रोधी अभियानों में से एक माना जा रहा है। करीब 24,000 सुरक्षाकर्मियों ने इस ऑपरेशन में भाग लिया है, जो कि अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

क्या हो रहा है?

कर्रेगुट्टा के पहाड़ी क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ यह ऑपरेशन 21 अप्रैल 2023 से शुरू हुआ था। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में फैले इस क्षेत्र में, करीब 800 वर्ग किलोमीटर का इलाका नक्सलियों के लिए सुरक्षा का कारण बना हुआ था। लेकिन अब यह क्षेत्र पूरी तरह से सुरक्षाबलों के नियंत्रण में है। इस अभियान के दौरान नक्सलियों के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी की खुफिया सूचनाएं भी मिली थीं, जिनमें हिडमा, बरसा देवी और दामोदर शामिल थे।

यह ऑपरेशन क्यों महत्वपूर्ण है?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही घोषणा की थी कि 31 मार्च 2026 तक देश में नक्सलवाद का खत्म होना तय है। ऐसे में ऑपरेशन कर्रेगुट्टा की अहमियत बढ़ जाती है, क्योंकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि नक्सलियों से बातचीत नहीं की जाएगी। इस ऑपरेशन ने न केवल नक्सलियों के गढ़ को ढहा दिया है, बल्कि उन पर एक महत्त्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक दबाव भी बनाया है।

कौन शामिल है?

इस ऑपरेशन में डीआरजी, बस्तर फाइटर्स, एसटीएफ, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षाबलों की यूनिट शामिल हैं। इन सभी के साथ-साथ हेलीकॉप्टर और ड्रोन यूनिट का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि ऑपरेशन की निगरानी की जा सके। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और सीआरपीएफ के डीजी जीपी सिंह इस ऑपरेशन की मॉनीटरिंग कर रहे हैं।

यह ऑपरेशन कैसे किया गया?

इस ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने विशेष रणनीतियों के तहत कार्रवाई की। सैनिकों को हेलीकॉप्टर द्वारा आवश्यक हथियार और अन्य सामान भेजा गया। नक्सलियों के ठिकाने को पहचानने के लिए खुफिया जानकारी का सहारा लिया गया। इसके लिए ड्रोन और हेलीकॉप्टर का उपयोग कर लगातार निगरानी की गई।

यहां क्या हुआ?

कर्रेगुट्टा पहाड़ी क्षेत्र राकेश से लेकर तेलंगाना के मुलुगु जिले तक फैला हुआ है। यह इलाके हमेशा से नक्सलियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना रहा है। लेकिन हाल ही में सुरक्षाबलों की सफलताओं की वजह से यह क्षेत्र नक्सलियों के लिए अब जाना मुश्किल बन गया है।

नक्सलियों के खिलाफ देश की कार्रवाई

छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के निर्माण के बाद से नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आई है। जब से जनवरी 2024 तक, 350 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए हैं। इसमें से अधिकतर घटनाएं बस्तर क्षेत्र में हुई हैं। इसके अलावा, इस वर्ष 144 नक्सलियों को निशाना बनाया गया है और 300 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को 50,000 रुपये की आर्थिक मदद और सरकार की नीति के तहत पुनर्वास का आश्वासन भी दिया गया है।

जैसा कि भारत सरकार का लक्ष्य है कि नक्सलवाद का पूरी तरह से खात्मा किया जाए, यह ऑपरेशन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे में ऑपरेशन कर्रेगुट्टा केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि देश की सामूहिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

इस ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी के लिए देखें:[दैनिक भास्कर](https://www.bhaskar.com/) और[द हिन्दू](https://www.thehindu.com/).

 

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