कानपुर में भीषण आग: क्या हुआ, कब और कहाँ?
कानपुर के चमनगंज थाना क्षेत्र के प्रेमनगर इलाके में रविवार रात लगभग 9:30 बजे एक छह मंजिला इमारत के भूतल पर स्थित जूते बनाने वाले कारखाने में भीषण आग लग गई। आग इतनी भयंकर थी कि इसकी लपटें आसमान में ऊँची उठने लगीं और आसपास के क्षेत्र में अफरातफरी मच गई। स्थानीय निवासियों ने देखा कि इमारत के अंदर जूता कारोबारी दानिश, उसकी पत्नी नाजनीन और तीन बेटियां फंसी हुई हैं। आग लगने के बाद जब लोगों ने उनकी मदद के लिए आवाज दी, तो वह सब कुछ छोड़कर बाहर जाने की कोशिश कर रहे थे।
इस अद्भुत घटना में तीन विस्फोट भी हुए, जो आग के फैलने का कारण बने। कई स्थानीय लोग और दमकलकर्मी घटनास्थल पर पहुँचे, लेकिन आग ने इतना विकराल रूप ले लिया था कि स्थिति को संभालना बहुत मुश्किल हो गया था। दमकल की 35 गाड़ियाँ और एसडीआरएफ की टीमें आग पर काबू पाने के लिए लगाई गईं, लेकिन आग पर काबू पाना आसान नहीं था।
आग लगने का कारण और स्थिति की गंभीरता
इस आग लगने का मुख्य कारण कारखाने में रखे केमिकल के ड्रम थे, जो जूतों को चिपकाने के लिए उपयोग किए जाते थे। जब आग भूतल से फैलना शुरू हुई, तो ये केमिकल भीषण विस्फोट का कारण बने। इस घटना ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया, और रात के समय स्थानीय लोग घरों से बाहर निकल आए।
रात करीब 12:30 बजे, जब दमकलकर्मी और एसडीआरएफ की टीम पूरी ताकत से आग बुझाने में जुटी थी, उसी समय एक रहस्यमय तरीके से आग फिर से भड़क उठी। इससे बचाव कर्मियों को खुद की सुरक्षा के लिए भागने पर मजबूर होना पड़ा। आग में फंसे लोगों को बचाने के लिए लगातार प्रयास किए गए, लेकिन स्थिति बहुत गंभीर हो गई थी।
कानपुर अग्निकांड के दौरान, स्थानीय महापौर प्रमिला पांडेय और पुलिस प्रशासन के उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
परिवार की त्रासदी
इस अग्निकांड में जूता कारोबारी दानिश, उसकी पत्नी नाजनीन और उनकी तीन बेटियों की जान चली गई। दानिश का एक रिशतेदार, मिस्ताहुल हक इसरत इराकी ने बताया कि दानिश ने अपने पिता अकील को फोन किया था और सहायता की गुहार लगाई थी। लेकिन आग लगने के कुछ समय बाद ही दानिश का फोन बंद हो गया।
अकील ने बताया कि दानिश उस समय एक बार नीचे आया था, लेकिन अपने परिवार को बचाने के प्रयास में वह फिर से इमारत की ऊँचाई की ओर भागा। यह एक बैचेन करने वाला अनुभव था, क्योंकि उन्होंने समस्या का सामना करने के लिए अपने बेटे को पूरी कोशिश करते देखा।
खबरों के अनुसार, दमकल के कर्मियों ने सुबह तक आग पर काबू पा लिया, लेकिन तब तक बहुत कुछ खो चुका था। स्थानीय लोगों ने बताया कि इमारत में दरारें आ गई हैं और कई लोग अब भी डर के साये में जी रहे हैं।
सुरक्षा की कमी उजागर करती घटना
यह घटना न केवल कानपुर, बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है। आग बुझाने की प्रणाली और सुरक्षा उपायों की कमी ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को और भी भयानक बना दिया। स्थानीय प्राधिकारियों को अब यह संज्ञान लेना होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऐसे कारखानों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। हादसे के बाद, अग्निशामक इसकी वजह और सुरक्षा मानकों की कमी का पता लगाने में जुटे हुए हैं।
क्या हम अब भी सुरक्षा उपायों की अनदेखी करेंगे? यह सवाल पूरे शहर में हर किसी के मन में है।
इस भीषण अग्निकांड के बाद, कानपुर के निवासियों की चिंता हर तरफ फैल गई है। उन्हें अपने परिवारों की सुरक्षा की चिंता है और सरकार से उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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