13.1 C
Delhi
Thursday, January 22, 2026

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट के समय सीमा तय करने के आदेश पर उठाए सवाल; संविधान में नहीं है प्रावधान

इंडियाराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट के समय सीमा तय करने के आदेश पर उठाए सवाल; संविधान में नहीं है प्रावधान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उठाए महत्वपूर्ण सवाल

8 अप्रैल 2025 को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे लेकर कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में राज्यपालों और राष्ट्रपति को एक निश्चित समय सीमा में विधेयकों पर निर्णय लेने का आदेश दिया था। राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, और इस पर प्रश्न उठाते हुए यह पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट किस आधार पर यह निर्णय ले सकता है।

बता दें कि यह मामला तमिलनाडु सरकार बनाम राज्यपाल से संबंधित है, जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राज्यपाल के पास कोई वीटो पावर नहीं है। राष्ट्रपति के अनुसार, इस संबंध में स्पष्टीकरण की आवश्यकता है, क्योंकि राष्ट्रपति को विधेयक पर निर्णय लेने के लिए समय सीमा तय करना संविधान के अनुसार नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय और राष्ट्रपति के प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि राष्ट्रपति अपने विचार को पुनर्विचार के लिए राज्य विधानसभा के पास भेज सकते हैं। यदि विधानसभा विधेयक को फिर से पारित करती है, तो राष्ट्रपति को अंतिम निर्णय लेना होगा। इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 201 के तहत राष्ट्रपति के फैसले की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट की बातें सुनने के बाद कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं। इनमें प्रमुखतः यह शामिल हैं कि राज्यपाल के पास क्या विकल्प होते हैं, और क्या राज्यपाल निर्णय लेने में मंत्रिपरिषद की सलाह से बंधे होते हैं। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 361 और 143 को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

1. क्या राज्यपाल के समक्ष पेश विधेयक पर निर्णय लेने का कोई समय सीमा निर्धारित की जा सकती है?
2. क्या राज्यपाल द्वारा लिए गए फैसले की न्यायिक समीक्षा संभव है?
3. क्या राष्ट्रपति द्वारा लिए गए फैसले का न्यायिक समीक्षा हो सकता है?

यह प्रश्न न केवल कानून की व्याख्या के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि उन राजनीतिक परिप्रेक्ष्य को भी दिखाते हैं जिनमें सरकार और उच्च न्यायालय के बीच स्थान बांटने की जरूरत पड़ती है।

राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा उठाए गए 14 सवाल

राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट से कुल 14 सवाल पूछे हैं जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

1. राज्यपाल के समक्ष यदि कोई विधेयक पेश किया जाता है, तो अनुच्छेद 200 के तहत उनके पास क्या विकल्प हैं?
2. क्या राज्यपाल इन विकल्पों पर विचार करते समय मंत्रिपरिषद की सलाह से बंधे हैं?
3. क्या अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल द्वारा लिए गए निर्णय की न्यायिक समीक्षा हो सकती है?
4. क्या अनुच्छेद 361 राज्यपाल द्वारा अनुच्छेद 200 के तहत लिए गए निर्णय पर न्यायिक समीक्षा को रोक सकता है?
5. क्या अदालतें राज्यपाल द्वारा अनुच्छेद 200 के तहत लिए गए निर्णयों की समयसीमा निर्धारित कर सकती हैं, जबकि संविधान में इसकी कोई व्यवस्था नहीं है?

ये सवाल इस बात को उजागर करते हैं कि राष्ट्रपति को इस संबंध में उचित स्पष्टीकरण की आवश्यकता है, जिससे समुचित न्यायिक प्रक्रिया को सुनिश्चित किया जा सके।

महत्वपूर्ण कदम और आगे की कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने एक नया मोड़ ले लिया है, और राष्ट्रपति द्वारा उठाए गए यह प्रश्न न्यायिक प्रक्रिया के संचालन में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इससे न केवल संविधान की व्याख्या में स्पष्टता आएगी, बल्कि विधायी प्रक्रिया में भी सुधार होगा।

राष्ट्रपति द्वारा उठाए गए सवालों का उत्तर सर्वोच्च न्यायालय को देना होगा, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों में कोई भ्रम न रहे।

इसके अलावा, इस विषय पर और अधिक चर्चा की आवश्यकता है, जिससे बेहतर शासन और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

Livemint भी इस विषय पर विस्तृत जानकारी प्रदान कर रहा है, जहां आप इस पर और जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

इस विषय पर आगे की कार्रवाई का इंतज़ार रहेगा, और उम्मीद है कि सरकार और न्यायपालिका के बीच में संवाद बढ़ेगा, जिससे नागरिकों के प्रति बेहतर न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित हो सकेगी।

 

अस्वीकृति
हमने यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया है कि इस लेख और हमारे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दी गई जानकारी सटीक, प्रमाणित और विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त हो। यदि आपके पास कोई सुझाव या शिकायत हो, तो कृपया हमसे info@hamslive.com पर संपर्क करें।

Check out our other content

Check out other tags:

Most Popular Articles