बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक हुई, जो 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद आयोजित की गई थी। इस बैठक में मेघालय से असम के लिए नए कॉरिडोर को मंजूरी दी गई। पिछले सप्ताह मंत्रिमंडल की कोई बैठक नहीं हुई थी, जबकि सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) ने 23 अप्रैल को बैठक में हमले की निंदा की थी।
पहलगाम हमले के बाद मंत्रिमंडल की बैठक का महत्व
भारत में सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़ी स्थिति को देखते हुए, इस बैठक का महत्व अत्यधिक है। इस बैठक में केवल मेघालय से असम के लिए नए कॉरिडोर को मंजूरी नहीं दी गई, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया गया कि देश की सुरक्षा प्राथमिकता नंबर एक है। पहलगाम में हुए हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी, जिसमें पाकिस्तान का हाथ होने की बात सामने आई।
क्या, कहाँ, कब, क्यों और कैसे?
इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के साथ अन्य मंत्रियों ने भी भाग लिया। बैठक का उद्देश्य देश की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा करना और आवश्यक निर्णय लेना था। प्रधानमंत्री ने सुरक्षा मुद्दों पर जोर दिया और सेना को स्पष्ट निर्देश दिए कि पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
बैठक के दौरान, सीसीएस की अगली बैठक में आर या पार का निर्णय लेने का संकेत दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि यह बैठक इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण होगी कि कौन सी कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रमुख फैसले और सुरक्षा पर ध्यान
बैठक के दौरान यह भी चर्चा हुई कि सुरक्षा संबंधी मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान पर सेना की कार्रवाई कभी भी की जा सकती है। इसके लिए प्रधानमंत्री ने सेना को सभी विकल्पों पर विचार करने के लिए कहा है, जिसमें कराची बंदरगाह का संपर्क काटना और पीओके में सीधा हमला करना शामिल है।
कूटनीतिक रणनीति
इस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की योजना बनाई है। भारत ने पहले ही पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंधों को कम करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कड़ी में, भारत ने पाकिस्तान के सैन्य अताशे को निष्कासित किया और सिंधु जल संधि को निलंबित किया, जिसका प्रभाव क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान ने भारत की कार्रवाइयों का जवाब देने की कोशिश की है। इशाक डार ने कहा है कि सिंधु जल 24 करोड़ लोगों के जीवन का सवाल है, और उन्होंने भारत की कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की। इस संदर्भ में, भारत द्वारा पाकिस्तान के यूट्यूब चैनलों से संबंधित सामग्री पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय भी सामने आया है।
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