मुख्य आरोपी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया
महाराष्ट्र के बीड जिले में सरपंच संतोष देशमुख की हत्या से जुड़ी एक नई जानकारी सामने आई है। मुख्य आरोपी वाल्मिक कराड ने बीड अदालत में एक आवेदन दायर कर सभी आरोपों से बरी करने की मांग की है। यह हत्याकांड देशमुख को अगवा करने के बाद हुई थी, जब उन्होंने स्थानीय ऊर्जा कंपनी के खिलाफ जबरन वसूली की कोशिशों का विरोध किया था। इस मामले में कराड सहित कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
आवेदन के अनुसार, कराड का कहना है कि उसके खिलाफ कोई प्राथमिक सबूत नहीं है। यह अदालत में सुनवाई का एक महत्वपूर्ण मोड़ है, क्योंकि अभियोजन पक्ष ने भी बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि उनके पास सबूतों की कमी है। अदालत ने इस पर राज्य अपराध जांच विभाग (सीआईडी) से जवाब मांगा है और अब देखना यह है कि क्या अदालत आरोपी को बरी करने की अनुमति देती है या नहीं।
कब और कहां हुआ था हत्याकांड
सरपंच संतोष देशमुख की हत्या पिछले साल 9 दिसंबर को बीड जिले के मासाजोग गांव में हुई थी। उन्हें अगवा करने के बाद प्रताड़ित किया गया और अंत में उनकी हत्या कर दी गई। उनके खिलाफ यह कदम उस समय उठाया गया था, जब उन्होंने स्थानीय ऊर्जा कंपनी के खिलाफ जबरन वसूली में हस्तक्षेप किया था।
इस मामले में मुख्य आरोपी वाल्मिक कराड के अलावा, कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिन पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। सीआईडी ने पिछले महीने इस मामले में एक आरोपपत्र भी दाखिल किया, जिसमें 1,200 से ज्यादा पृष्ठ थे।
आरोपपत्र में क्या है खास?
सीआईडी ने हत्याकांड के संबंध में एक चार्जशीट पेश की है जिसमें कई सबूत और गवाहों के बयान शामिल हैं। सरकारी वकील उज्जवल निकम ने बताया कि कराड ने कुछ दस्तावेजों की मांग की थी, जिन्हें उन्होंने अदालत में पेश किया है। ये दस्तावेज मामले को बांधने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि अदालत के समक्ष एक वीडियो पेश किया गया है, जिसमें संतोष देशमुख की पिटाई को रिकॉर्ड किया गया है। यह वीडियो भी केस की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
आवेदन का असर और अगली सुनवाई
अदालत ने कराड के आवेदन को स्वीकार कर लिया है और सीआईडी को 24 अप्रैल तक इस पर अपना जवाब पेश करने के लिए कहा है। सरकारी वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि इस वीडियो को सार्वजनिक न किया जाए, क्योंकि इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।
इस मामले में अब सबकी निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां पता चलेगा कि क्या अदालत कराड को बरी करने का फैसला लेगी या उसे फिर से सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा।
आपराधिक संपत्ति की जांच
सिर्फ कराड ही नहीं, सीआईडी ने उसकी चल और अचल संपत्तियों को जब्त करने के लिए भी एक आवेदन दायर किया है। सरकारी वकील निकम ने बताया कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि प्रकरण में अन्य आरोपियों की संपत्तियों की भी जांच की जा सके।
इस तरह के मामलों में संपत्तियों की जब्ती अक्सर महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इससे आरोपियों के आर्थिक स्रोतों पर नकेल कसी जा सकती है और मामले की गंभीरता को बढ़ाया जा सकता है।
इस हत्याकांड से जुड़ी यह केस सुनने योग्य है, क्योंकि यह न केवल एक राजनीतिक हत्याकांड का मामला है, बल्कि यह स्थानीय प्रशासन और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाता है।
इसके बाद जब जनादेश के साथ यह मामला अदालत में जाएगा, तो यह निश्चित रूप से आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक दायरे में चर्चा का विषय रहेगा।
यह केस एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है और इससे जुड़े सभी घटनाक्रम पर नज़र रखी जा रही हैं।)
इस मामले की अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी, जिसमें हम फिर से अपडेट करेंगे।
अस्वीकृति
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