मुंबई आतंकी हमलों के संदर्भ में अहम जानकारी: संदीप उन्नीकृष्णन के पिता ने व्यक्त की अपनी राय
26/11 के मुंबई आतंकी हमलों के दौरान बलिदान हुए राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के कमांडो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के पिता के. उन्नीकृष्णन ने हाल ही में तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण को भारत की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता करार दिया। उनके अनुसार, यह केवल एक शुरुआत है और इसमें कई परतें हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की सहमति के बाद ही राणा को वापस लाने का प्रयास किया जा रहा है।
कौन? क्या? कहाँ? कब? क्यों? और कैसे?
कौन? मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, जो 26/11 के हमलों के दौरान शहीद हुए। उनके पिता, के. उन्नीकृष्णन, जिन्होंने इस संदर्भ में अपने विचार साझा किए।
क्या? तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण को भारत की कूटनीतिक सफलता बताया गया।
कहाँ? यह सब मुंबई के संदर्भ में हो रहा है, जहां यह आतंकी हमला हुआ था।
कब? यह चर्चा उस समय की है जब मुकाबले के लिए तैयारी की जा रही है और राणा के प्रत्यर्पण की बात की जा रही है।
क्यों? राणा की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण से भारत सरकार को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में मजबूती मिलेगी।
कैसे? अमेरिका की सहमति से राणा को भारत लाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि उसे न्याय के समक्ष लाया जा सके।
संदीप उन्नीकृष्णन का बलिदान और उनके पिता का दृष्टिकोण
के. उन्नीकृष्णन ने आगे कहा, “संदीप पीड़ित नहीं थे; वह एक सुरक्षाकर्मी थे जिन्होंने अपने देश की रक्षा के लिए अपनी जान दी। असली पीड़ित वे लोग हैं जिन्होंने अपनी जान गंवाई।” उनका यह बयान स्पष्ट करता है कि उनके बेटे ने कैसे अपने कर्तव्य को निभाया और देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने यह भी कहा, “यदि संदीप ने ऐसा नहीं किया होता, तो वह कहीं और भी अपनी ड्यूटी निभाते।”
तहव्वुर राणा के मुद्दे पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया
आतंकी अजमल कसाब की पहचान करने वाली प्रमुख गवाह देविका नटवरलाल रोटावन ने भी इस मामले में अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने तहव्वुर राणा को मौत की सजा देने की मांग की है और कहा है कि इसे भारत सरकार की एक बड़ी जीत माना जाना चाहिए।
वे कहती हैं, “हाफिज सईद, दाऊद इब्राहिम और पाकिस्तान में मौजूद अन्य आतंकवादी मास्टरमाइंड भी भारत लाए जाने चाहिए और उन्हें फांसी दी जानी चाहिए।” यह बयान इस बात का संकेत है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा नेटवर्क है जिस पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।
भारत की कूटनीतिक सफलता और आगे की राह
भारत और अमेरिका के बीच सहयोग बढ़ाने के प्रयासों का यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। के. उन्नीकृष्णन ने कहा, “यह केवल एक कड़ी है। जब डेविड कोलमैन हेडली भारत में था, तब उसने … कॉल किए थे। सारे सबूत यहां मौजूद हैं।”
इस प्रकार, यह मामला केवल राणा के प्रत्यर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी आतंकवादियों को जवाबदेह ठहराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।
संक्षेप में
तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण निश्चित रूप से भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता है। यह न केवल उन परिवारों के लिए एक सुकून की बात है जिन्होंने आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष किया, बल्कि यह उन सभी नागरिकों के लिए भी है जो देश की सुरक्षा में विश्वास रखते हैं।
जैसे-जैसे सरकार और न्यायिक प्रणाली इस मामले पर आगे बढ़ रही है, यह उम्मीद की जाती है कि और भी आतंकवादियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाएगी।
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