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Thursday, January 22, 2026

पहलगाम में आतंकी हमले का कनेक्शन: हाशिम मूसा का खतरनाक जुड़ाव

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पहलगाम हमले से जुड़े आतंकी मूसा की कुंडली: एक पूर्व कमांडो का काला सच

आत्मघाती हमले की गुत्थी: कौन है हाशिम मूसा?

पहलगाम, जम्मू-कश्मीर में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के संदर्भ में जानकारी आ रही है कि इसमें शामिल एक प्रमुख आतंकी हाशिम मूसा है। यह जानकारी सुरक्षा सूत्रों द्वारा पुष्टि की गई है। संकेत मिल रहे हैं कि हाशिम मूसा भारतीय सेना के खिलाफ चलाए जा रहे हमलों के लिए पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ संगठित रूप से काम कर रहा है। इसे एक विशेष मिशन के तहत गैर-कश्मीरी लोगों और सुरक्षा बलों पर हमले के लिए कश्मीर भेजा गया था।

क्या हुआ, कब हुआ, और क्यों हुआ?

22 अप्रैल 2025 को, पहलगाम में एक भीषण आतंकी हमला हुआ जिसमें निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया गया। इस हमले में शामिल हाशिम मूसा को पूर्व में पाकिस्तान की सेना के स्पेशल फोर्सेज का पैरा कमांडो बताया गया है। यह विशेष बल अत्याधुनिक सैन्य तकनीकों और गुप्त अभियानों में कुशल होते हैं। मूसा को लश्कर के आकाओं ने हमले को अंजाम देने के लिए कश्मीर भेजा था। इस हमले की योजना और क्रियान्वयन स्वास्थ्य सुरक्षा बलों के बीच चिंता का विषय बन गया है।

कैसे हुई घटना और इसकी योजना?

सूत्रों के अनुसार, हाशिम मूसा और उसके साथियों ने हमले को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए कश्मीरी ओवरग्राउंड वर्कर्स की मदद ली। इन वर्कर्स ने ना केवल हमले की योजना बनाने में मदद की, बल्कि हमले के लिए लॉजिस्टिक्स की भी व्यवस्था की। यह तथ्य एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी द्वारा सामने आया है।

आत्मसमर्पण के बाद खुलासे

पहलगाम हमले के बाद, भारतीय सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर में अलर्ट जारी किया है और कई संदिग्धों की धरपकड़ के लिए टारगेटेड ऑपरेशन शुरू कर दिया है। यह कदम इस डर से उठाया गया है कि मूसा जैसे आतंकियों की मदद करने वाले स्थानीय नेटवर्क अब भी सक्रिय हो सकते हैं।

कश्मीर में आतंकवाद का काला सच

स्थानीय आतंकवादियों और पाकिस्तानी आतंकियों का गठबंधन कश्मीर में सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। पहलगाम हमले से पहले भी मूसा का नाम कई अन्य हमलों से जुड़ा रहा है। पिछली बार अक्टूबर 2024 में गांदरबल क्षेत्र में हुए हमले में उसकी संलिप्तता पाई गई थी, जिसमें कई लोग मारे गए थे।

क्या इसकी जड़ें और भी गहरी हैं?

एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक, कश्मीरी ओवरग्राउंड वर्कर्स के जरिए मूसा का पाकिस्तान से संबंध पुष्टि करता है। इन ओवरग्राउंड वर्कर्स ने मूसा के हमले में मदद करने वाले अन्य आतंकवादियों की पहचान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आतंकवाद का यह नेटवर्क स्थानीय आबादी में घुसपैठ कर चुका है।

पाकिस्तान का आतंकवाद निर्यात

पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों ने कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं की संख्या को बढ़ा दिया है। ये संगठन भारतीय सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए न केवल पाकिस्तान से बल्क में आतंकवादियों को भेजते हैं, बल्कि स्थानीय लोगों को भी अपने साथ जोड़ने में सफल रहते हैं।

सुरक्षा बलों की तैयारियाँ

इसी संदर्भ में, अब भारतीय सुरक्षा बलों ने पहलगाम और उसके आस-पास के क्षेत्रों में ऑपरेशन को तेज कर दिया है। सुरक्षा बलों की और अधिक रिस्पॉन्स टाइम को बढ़ाने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं।

उपसंहार

पहलगाम के आतंकवादी हमले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कश्मीर में सुरक्षा स्थिति न केवल गंभीर है, बल्कि बहुत ही चुनौतीपूर्ण भी है। सुरक्षा बलों की कोशिशें अब इन आतंकियों के नेटवर्क को खत्म करने और उनकी गतिविधियों को समाप्त करने की दिशा में बढ़ रही हैं।

आप इस विषय पर और अधिक जानकारी के लिए[अमर उजाला](https://www.amarujala.com/),[रिपब्लिक वर्ल्ड](https://www.republicworld.com/) पर जा सकते हैं।

 

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